2 नावों में सवार नवीन, दिल्ली में कांग्रेस के साथ, ओडिशा में भाजपा के साथ
नन्द किशोर जोशी
एक्जिक्यूटिव एडिटर, क्रांति ओडिशा मीडिया
पिछले 30 वर्षों से नवीन पटनायक राजनीति में हैं।इन 30 सालों में साढ़े 26 साल नवीन सत्ता सुख भोगे हैं।1998-2000 दो साल केंद्र में अटल बिहारी वाजपेई के मंत्री मंडल में स्टील और खनिज मंत्री विभाग के केबिनेट मंत्री बने रहे।
2000 -2024 वर्षों में लगातार साढ़े 24 साल ओडिशा के मुख्यमंत्री पद पर काबिज रहे नवीन। इन्होंने पांच बार ओडिशा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।इनके पिताजी बिजु पटनायक दो बार मुख्यमंत्री बने, नंदिनी सत्पथी 2 बार मुख्यमंत्री बनीं,जानकी पटनायक 3 बार मुख्यमंत्री बने।
मजेदार बात यह है कि इन तीनों के 7 बार मुख्यमंत्री बने रहने के बावजूद भी नवीन पटनायक का 5बार मुख्यमंत्री शासन पद पर कायम रहना ज्यादा समय रहा । उपरोक्त तीनों ही नेता केंद्र में भी मंत्री रहे, नवीन भी केंद्र में मंत्री रहे।
बिजु पटनायक के निधन पश्चात ओडिशा में एक नयी पार्टी का गठन हुआ,जिसका नाम है बिजु जनता दल। अपने पिता के नाम से शुरु हुई पार्टी में राजनीति की शुरुआत किये नवीन पटनायक दिल्ली से भुवनेश्वर आकर 1996 में।
2000-2024 तक नवीन के शासन काल में केंद्र में किसी भी दल के नेतृत्व की सरकार हो , नवीन ने हमेशा उनके साथ अच्छे संबंध रखे।चाहे भाजपा नेतृत्व की एनडिए सरकार हो या कांग्रेस नेतृत्व की सरकार हो नवीन ने अपने हिसाब से बैलेंस बनाकर रखा।संबंध बढ़िया बनाकर रखा।
केंद्र के सारे मंत्रियों ने जब जब ओडिशा का दौरा किया नवीन पटनायक के शासन की प्रशंसा किए। नवीन सभी के साथ अपने अच्छे संबंध बनाकर रखने में माहिर साबित हुए।
नवीन हमेशा एक बात बोलते रहे कि हम निष्पक्ष हैं,गुटनिरपेक्ष हैं,हम सभी दलों से समान दूरी बनाए हुए हैं। अर्थात हम कांग्रेस और भाजपा के साथ समान दूरी बनाए हुए हैं। लेकिन एक बात जो बराबर देखने को मिली कि नवीन 2014 से मोदी सरकार को केंद्र में हर मुद्दे पर समर्थन देते आये हैं,संसद के दोनों सदनों में।
यहां तक कि ओडिशा शासन से विदाई होने के पश्चात भी नवीन पटनायक ने बराबर मोदी सरकार का साथ दिया संसद के दोनों सदनों में परसों तक यानि 5 ओक्टोबर 2026 तक।
केवल कल कांग्रेस,इंडि गठबंधन प्रायोजित भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ,मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन में बीजेडी के तीन राज्य सभा सांसद दिल्ली की सड़क पर उतरे। हाथों में प्लाकार्ड पकड़े दिखे,मोदी, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वाले,वोट चोरी वाले।
राज्यसभा में बीजेडी नेता मानस मंगराज कल बोले कि ओडिशा में 20 लाख वोटरों का एसआइआर में नाम काटना,भारत में 13 करोड़ वोटरों का नाम काटना , ठीक नहीं हुआ, इसलिए हम मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सड़क पर उतरे हैं, विरोध दर्ज कराने।
इसपर ओडिशा से एक मात्र कांग्रेस लोकसभा सांसद सप्तगिरी उलाका ने नवीन के कदम की प्रशंसा की। वहीं ओडिशा भाजपा सेक्रेटरी विरंची नारायण त्रिपाठी बोले कि इंडि गठबंधन के साथ नवीन का संपर्क नया नहीं है। बीजेडी राजनीति में बने रहने के लिए अस्तित्व की लड़ाई लड रही है।
इन सब बातों के मद्देनजर मुझे एक बात याद आयी है 1970 के दशक के प्रारंभिक काल की। संयुक्त राष्ट्र संघ में कम्युनिस्ट चीन का प्रवेश हुआ चीन की शर्तों पर । अमेरिका ने भी वन चाइना पोलिसि को माना और अपने चहेते लोकतांत्रिक ताइवान को संयुक्त राष्ट्र संघ से बाहर का रास्ता दिखाया।
उस समय एक प्रसिद्ध कार्टून मैंने ओड़िआ अखबार में देखा कि अमेरिका चीन के कंधे पर एक हाथ रख कर उसे यूएन यानि संयुक्त राष्ट्र संघ में शामिल कराने के लिए लेजारहा है , वहीं दूसरे हाथ से ताइवान से पीछे की तरफ हाथ मिला रहा है।
आज नवीन पटनायक की ऐसी ही स्थिति लग रही है। दिल्ली में नवीन पटनायक एक हाथ से राहुल गांधी संग हाथ मिला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दूसरे हाथ में पीछे की तरफ कमल का फूल पकड़े हुए हैं।इसका मतलब दो अलग-अलग नावों में नवीन ने एक साथ सवारी की है।इसका नतीजा हमें आने वाले दिनों में, वर्षों में देखने को मिलेंगे।


