मठाधीशों के दबाव में भुवनेश्वर मारवाड़ी सोसायटी प्रेसिडेंट चुनाव स्थगित। अब कब चुनाव होगा ?
विशिष्ट संवाददाता
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के मारवाड़ी सोसायटी के इतिहास में आजतक कभी भी प्रेसिडेंट चुनाव नहीं हुआ है। इतिहास में पहली बार भुवनेश्वर मारवाड़ी सोसायटी में प्रेसिडेंट पद का चुनाव होना था,जो नहीं हुआ,इसे स्थगित किया गया है चुनाव समिति द्वारा।
भुवनेश्वर मारवाड़ी सोसायटी का गठन जब से हुआ है तब से लेकर आजतक इसके इतिहास में कभी भी प्रेसिडेंट का चुनाव नहीं हुआ है। हमेशा कुछ लोग बैठ कर अपने हिसाब से प्रेसिडेंट को चयन कर लेते हैं,वही प्रेसिडेंट कहलाता है।वह प्रेसिडेंट अनेक अनेक सालों तक बीएमएस पर काबिज रहते हैं।
ऐसे में सोसायटी के अधिकांश लोगों में असंतोष की लहर चल रही थी। लोगों में सोसायटी के अंदरूनी हालात को लेकर आक्रोश गहराता जा रहा था। सोसायटी के बहुसंख्यक असंतुष्ट लोगों में शामिल हैं युवा, मातृशक्ति, शिक्षित वर्ग के लोग तथा सामान्य भुवनेश्वर का मारवाड़ी।
भुवनेश्वर मारवाड़ी सोसायटी के लोग आपस में बात करते रहते हैं अधिकांश समय कि बगल में कटक शहर है। वहां भुवनेश्वर के 1000-1200 मारवाड़ी लोगों की तुलना में कटक मारवाड़ी समाज में लिस्टेड सदस्यों की संख्या 8100 करीब है,कटक में पिछले महीने बिना किसी झंझट के, बिना किसी परेशानी के आराम से , सहजता से चुनाव संपन्न हुआ,उसी दिन चुनाव के नतीजे की घोषणा भी हुई।सभी ने चुनाव नतीजों को स्वीकारा। कहीं कोई समस्या नहीं है।सिएमएस प्रेसिडेंट एवं उनकी टीम का शानदार शपथग्रहण समारोह भी पिछले महीने आयोजित होगया।समाज बंधुओं की उपस्थिति बड़ी संख्या में रही।
सिएमएस प्रेसिडेंट का चुनाव आठवीं बार हुआ है, यहां दो साल का प्रेसिडेंट का कार्यकाल होता है। वहीं अगर देखें तो भुवनेश्वर मारवाड़ी सोसायटी प्रेसिडेंट चुनाव पहली बार आयोजित होना था,जो नहीं हुआ, चुनाव समिति ने चुनाव को स्थगित कर दिया।
हमारे देश में गणतंत्र का शासन है। गणतंत्र में चुनाव होना एक सामान्य प्रक्रिया है।एक बार अगर चुनाव की घोषणा होगयी तो चुनाव स्थगित नहीं होते हैं हमारे देश में। चुनाव के पहले, चुनाव के दौरान अनेक लोग भारत में किसी न किसी बहाने कोर्ट पहुंचे, चुनाव को स्थगित कराने के लिए, लेकिन कोर्ट ने कभी भी चुनाव को घोषणा होने पश्चात स्थगित नहीं किया।
लेकिन भुवनेश्वर मारवाड़ी सोसायटी प्रेसिडेंट के चुनाव को चुनाव समिति ने स्थगित कर दिया।यह अनोखी घटना है।ऐसा उदाहरण शायद ही कहीं देखने, सुनने को मिले।
इससे एक बात तो सिद्ध होती है कि मठाधीशों ने अपनी हैसियत खोने के डर से बहाना बाजी कर चुनाव समिति पर असामान्य दबाव देकर भुवनेश्वर मारवाड़ी सोसायटी प्रेसिडेंट के चुनाव को स्थगित करा दिया है।यह बात गणतंत्र के हिसाब से बिल्कुल ग़लत है। इसे लेकर मारवाड़ी सोसायटी के लोगों में जबरदस्त रोष है।आने वाले दिनों में जल्द इसके गणतांत्रिक दृष्टिकोण से पोजिटिव समाचार मिल सकते हैं। प्रेसिडेंट का चुनाव बहुसंख्यक समाज बंधुओं के चाहने पर हो सकता है,ऐसी जबरदस्त संभावना भी दिखाई दे रही है।

