महानदी गड़गड़िया घाट पर सामूहिक श्राद्ध तर्पण
पंडित गंगाधर जोशी 1966-1997
पंडित विनोद जोशी 1998 से वर्तमान
कटक, ऐतिहासिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, प्राचीन नगरी कटक में एक अति विशिष्ट, समृद्ध परंपरा के वाहक हैं आज के विद्वान पंडित विनोद जोशी। इनके पिता जी का नाम है पंडित गंगाधर जोशी। विद्वान पंडित गंगाधर जोशी ने कटक नगर में एक समृद्ध, धार्मिक, आध्यात्मिक श्रेष्ठ परंपरा का शुभारंभ किया था अपने जमाने में 1966 में।

हर साल पितृपक्ष के 16 दिन हम सारे हिन्दुओं के लिए बड़ा ही पुण्य का समय कहलाता है। पितृपक्ष में हम सब अपने पूर्वजों, पितरों को याद करते आये हैं।उनके निमित्त हम श्राद्ध कर्म,पितृ तर्पण करते हैं हर साल, आश्विन कृष्ण पक्ष के दिनों में।

ठीक उन्हीं पवित्र पितृपक्ष के दिनों में कटक शहर में पहली बार 1966 में विद्वान पंडित गंगाधर जोशी ने स्थानीय काठजोडी नदी में सामूहिक श्राद्ध तर्पण का कर्म विधि विधान पूर्वक आरंभ किया था,कराया था।समाज के चंद धार्मिक प्रवृत्ति के लोग उन सामूहिक श्राद्ध तर्पण कार्यक्रम में शामिल होते थे उन दिनों।

विद्वान पंडित गंगाधर जोशी द्वारा संचालित सामूहिक श्राद्ध तर्पण कार्यक्रम चला 1998 तक काठजोडी नदी तट पर। तत्पश्चात उनके विद्वान सुपुत्र पंडित विनोद जोशी ने यह पुण्य कार्य संचालन अपने हाथों में लिया। विद्वान पंडित विनोद जोशी के मार्ग दर्शन में 1998 से लेकर अनेक वर्षों तक उपरोक्त कार्यक्रम आयोजित होता आया काठजोडी नदी तट पर।

लेकिन पिछले कुछ सालों से सामूहिक श्राद्ध तर्पण का कर्म महानदी के गड़गड़िया घाट पर आयोजित हो रहा है विधि विधान पूर्वक।काठजोडी नदी से महानदी तट पर जाने का कारण यह है कि साल के अधिकांश समय और विशेष कर आश्विन मास के पितृपक्ष के समय काठजोडी नदी के तट पर जल की उपलब्धता नहीं होती है। चूंकि नदी में श्राद्ध तर्पण के समय बहते जल की उपलब्धता रहनी चाहिए, इसलिए पंडित विनोद जोशी को महानदी गड़गड़िया घाट आना पड़ा। उनके जजमान भी उनके पीछे-पीछे महानदी तट पर पहुंच गए।

इसतरह यह पुण्य कार्य का सिलसिला सामूहिक श्राद्ध तर्पण महानदी गड़गडिया घाट पर सुबह साढ़े पांच बजे से सुबह आठ बजे तक लगातार चलता आ रहा है। यहां एक और बात का उल्लेख करना जरूरी है कि सामूहिक श्राद्ध तर्पण की सामग्री की सारी व्यवस्था पंडित विनोद जोशी द्वारा की जाती है हर साल।

