कटक सनसाईन फिल्ड के तीसरे दिन के प्रवचन में व्यासपीठ पर विराजमान पूज्य इंद्रेश जी महाराज बोले कि पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में रात्रिकालीन,शयन आरती पश्चात जैसे ही महाप्रभु के कपाट बंद हो जाते हैं,तो तुरंत ही महाप्रभु वृंदावन में पहुंच जाते हैं तथा सखियों संग रासलीला करते हैं, कृष्ण बनकर।

श्री जगन्नाथ मंदिर में विराजमान चतुर्धा मूर्तियों में पूरे ठाकुरजी विराजते हैं। इसलिए श्रीक्षेत्र, तीर्थ क्षेत्र का नाम पुरी रखा गया है। ठाकुरजी प्रेमयुक्त हैं इसलिए पुरी में हैं। रासबिहारी हैं जगन्नाथ जी।कल की कथा में कई दिव्यांग श्रोता भी आये थे श्रीमद्भागवत कथा सुनने। ठाकुरजी को याद न करना सबसे बड़ी विपदा है।

ठाकुरजी का प्रेम युक्त भजन करना चाहिए।कल पूरे पंडाल में गुंजायमान रहा लोकप्रिय मारवाड़ी भजन श्याम बाबा का ,जिसे प्रेम से गाया था इंद्रेश जी महाराज ने।यह भजन है थाली भरकर ल्याइ खिचडो ,उपर घी की बाटकी,जीमो म्हारा श्याम धणी जीमाव बेटी जाट की।

यह लोकप्रिय भजन कर्मा बाई द्वारा गाया गया है। इन्हीं कर्मा बाई के नाम से आज भी हर दिन सुबह का खिचड़ी भोग श्री जगन्नाथ मंदिर में लगाया जाता है।कर्मा बाई जिंदगी के अधिकांश समय पुरी में रही। यहीं उन्होंने जीवन की अंतिम सांस ली।उनकी समाधी पुरी में आज भी है।

हमारे शरीर का सबसे बड़ा, खतरनाक अंग है जीभ। इसके पास स्वर्ग,नर्क बनाने के समस्त हथियार हैं।तन भगवान का मंदिर है , इसमें मुर्दा मत खाओ, अर्थात मांसाहारी कभी मत बनो। कब्रिस्तान मत बनाओ अपने शरीर को।

मंदिर में कोई मांस लेकर नहीं जाता,तो हम हमारे शरीर में क्यों लेकर जायें।मांस,मदिरा दोनों का त्याग करना चाहिए।एक समय आप भी फल खाओ,जब तक पूरे परिवार को शाकाहारी न बनालो,आहार की शुद्धी बहुत जरुरी है।
इगो अभिमान का विशेष रुप है, अतः इसे त्याग करो।लंबे समय तक मन में इगो मत रखो।भोजन में संतोष करो ,जीने के लिए भोजन करो, भोजन के लिए मत जीओ।धन में संतुष्ट होना चाहिए। संबंधों में संतोष करो, परिवार, मित्रों संग मित्रवत रहो।

