केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का फार्मास्युटिकल क्षेत्र विश्व भर में गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवा तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए देश की प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है।
नई दिल्ली में फार्मास्युटिकल क्षेत्र पर आयोजित वैश्विक राजदूत सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि भारत की सभ्यतागत विचारधारा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ की परिकल्पना देश के स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्युटिकल्स के प्रति दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करती है।
भारत को एक भरोसेमंद वैश्विक फार्मास्युटिकल सहयोगी के तौर पर रेखांकित करते हुए मंत्री जी ने कहा कि इस क्षेत्र ने गुणवत्ता, भरोसा और सामर्थ्य को संयोजित करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा किया बल्कि कई देशों, विशेष तौर पर ग्लोबल साउथ और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को दवाएं और टीके भी उपलब्ध कराए।
श्री गोयल ने कहा कि भरोसा, नवाचार और साझेदारी भारत के फार्मास्युटिकल उद्योग की शक्ति का आधार हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग के स्थापित गुणवत्ता मानकों और विनिर्माण क्षमताओं के कारण भारतीय दवाएं वैश्विक बाजारों में व्यापक तौर पर स्वीकार्य हैं। उन्होंने अनुसंधान, नवाचार, एडवांस प्रौद्योगिकियों और उच्च मूल्य वाले उत्पादों पर इस क्षेत्र के बढ़ते ध्यान को भी रेखांकित किया और वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश करने, उत्पादन करने और सहयोग करने के लिए आमंत्रित किया।
मंत्री जी ने कहा कि भारत एक नवप्रवर्तक, निर्माता, किफायती दवाओं के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता, उन्नत स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकियों में भागीदार और अनुबंध विनिर्माण के गंतव्य के तौर पर दुनिया की सेवा करने हेतु बेहतर स्थिति में है।
श्री गोयल ने बताया कि भारत का फार्मास्युटिकल निर्यात वित्त वर्ष 2014-15 में लगभग 14 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 31 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है, और दवाएं 200 से अधिक देशों के रोगियों तक पहुंच रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि जहां भारत जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए हुए है, वहीं यह क्षेत्र नवाचार-आधारित विकास की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है।
मंत्री महोदय ने आईपीएचईएक्स 2026 को वैश्विक बाजार में भारत की फार्मास्युटिकल और स्वास्थ्य सेवा क्षमताओं को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने राजदूतों, उच्चायुक्तों और विदेशी दूतावासों के प्रतिनिधियों से अपने-अपने देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।
वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने सुदृढ़ स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण के लिए फार्मास्युटिकल एवं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में वैश्विक सहयोग के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर नियामक सहयोग और मजबूत अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी से दवाओं तक पहुंच को बेहतर करने और वैश्विक स्तर पर जन स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने गुणवत्ता, नवाचार, उत्कृष्ट नियामक व्यवस्था और बाजार विविधीकरण के माध्यम से 2030 तक 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर के फार्मास्युटिकल निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के भारत के उद्देश्य को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत में 60 चिकित्सीय श्रेणियों में 10,500 से अधिक विनिर्माण इकाइयां और 60,000 से अधिक जेनेरिक ब्रांड उपलब्ध हैं।
श्री अग्रवाल ने आगे इस विषय पर प्रकाश डाला कि भारत के दवा निर्यात का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अत्यधिक विनियमित बाजारों के लिए है, जो भारत की दवा निर्माण क्षमताओं और गुणवत्ता मानकों में बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय भरोसे को प्रदर्शित करता है।
आईपीएचईएक्स 2026 का आयोजन 7-9 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जाएगा। इस आयोजन में 700 से अधिक प्रदर्शकों, 600 से अधिक विदेशी व्यापार प्रतिनिधियों और करीब 25,000 घरेलू आगंतुकों के शामिल होने की उम्मीद है।
इस मौके पर 30-31 जुलाई, 2026 को होने वाले वैश्विक औषधि विनियामक सम्मेलन 2026 और आईपीएचईएक्स 2026 का पदार्पण किया गया। दोनों कार्यक्रमों को प्रदर्शित करने वाला एक प्रचार वीडियो भी जारी किया गया।
वैश्विक औषधि विनियामक सम्मेलन 2026 में विश्व भर के नियामकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं के एक साथ आने और दवा विनियमन में नियामक संमिलन, पारस्परिक सहयोग तंत्र और उभरती चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने की उम्मीद है।
वैश्विक राजदूत सम्मेलन में 98 देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों और राजनयिकों के साथ-साथ फार्मास्युटिकल उद्योग, नियामकों, स्वास्थ्य सेवा से जुड़े हितधारकों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
इस बैठक में अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों को सुदृढ़ करने, नियामक सहयोग को आगे बढ़ाने और फार्मास्युटिकल निर्माण, नवाचार और स्वास्थ्य सेवा सहयोग के लिए एक भरोसेमंद वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।


