ममता की सत्ता गयी,पार्टि भी गयी  ममता एक बार फिर सड़क से सड़क पर 

ममता की सत्ता गयी,पार्टि भी गयी

ममता एक बार फिर सड़क से सड़क पर

नन्द किशोर जोशी

एक्जिक्यूटिव एडिटर

क्रांति ओडिशा मीडिया

 

ममता बनर्जी की राजनीति 1974 में सड़क से आरंभ हुई और आज 2026 में वापस सड़क पर ही आगयी है, अर्थात 52 साल में ममता बनर्जी की राजनीति बंगाल में 360 डिग्री घूम गयी है। जहां से शुरु वहीं पर खत्म।

 

ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की स्थापना हुई 1जनवरी 1998 के दिन। ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री बनी 2011 में।13 साल लगातार वामपंथियों से लड़कर , संघर्ष कर ममता बनर्जी सत्ता में आई।

 

1998 से लेकर 2011 के बीच का दौर ममता बनर्जी का सुनहरा दौर था। ममता जनता की जायज मांगों को सड़क पर बारंबार उतर कर जोरदार तरीके से लगातार उठाती रही। ऐसे में ममता की छवि बंगाल में एक जुझारू नेता की बन गयी। ममता बंगाल की जनता की आंखों का तारा बन गयी।ऐसे में ममता अगर अकेले किसी छोटे मोटे कार्यक्रम में कहीं अगर कोलकाता में पहुंच जाती तो दस मिनट में हजारों की भीड़ वहां ममता की एक झलक पाने के लिए इकट्ठा हो जाती।

 

बंगाल बंद वामपंथी सरकार में होते हुए भी हर साल एक या दो बार कराते थे। वामपंथियों के बंद से ज्यादा प्रभावी बंद ममता बनर्जी वाला होता था। ममता बनर्जी अगर बंद का आह्वान करदे तो स्वत: बंगाल बंद हो जाता।यह पावर थी ममता की मुख्यमंत्री बनने से पहले अर्थात 2011 से पहले ।

 

ममता बनर्जी 2011 से 2026 निरंकुश शासक बनीं। ममता 2011 में सत्ता में आते ही धीरे धीरे हिंदू विरोधी बनती गई। मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर चलती रही।ओबिसि सूची में छेड़छाड़ कर मुसलमानों को सरकारी नौकरी में ज्यादा से ज्यादा भर्तियां करती रही।

 

मस्जिद के इमामों को मासिक तनख्वाह देने लगी। मदरसों को फंड हर साल बढ़ाती रही। इस साल बजट में मदरसों को 5700 करोड़ रुपए आवंटित किए। बंग्लादेशियों को बसाने में भरपूर मदद करने लगी। उन्हें राशनकार्ड बनाने,वोटर कार्ड बनाने, आधार कार्ड बनाने में मदद करने लगी। उन्हें आवास योजना में घर बनाने में मदद करने लगी।इन सभी के जरिए अपना वोट बैंक बढाली बेतहाशा।

 

इन वोट बैंक के जरिए मुसलमानों को हर तरह से सुविधा देकर उनको मजबूती से अपने पक्ष में कर ली। इसके उलट हिन्दुओं को प्रताड़ित करना, हिन्दुओं की लड़कियों संग बलात्कार करना जैसे इन जिहादियों का रोजमर्रा का काम होगया था।

 

बंगाल में कहीं कोई अगर अपना घर बनायेगा,घर मरम्मत करेगा ,अच्छे स्कूल, कोलेज में एडमिशन लेगा तो टिएमसि वालों को कट मनि ,दादा टैक्स देना ही होगा, नहीं तो काम नहीं होगा।

 

हर बुराई की एक सीमा होती है,अंत होता है। बंगाल की हिन्दू जनता ममता की टिएमसि शासन के आतंक राज से तंग आ चुकी थी,उब चुकी थी,त्राही त्राही पुकार रही थी। इसतरह 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के जरिए बंगाल की जनता ने ममता को उखाड़ फेंका और भाजपा के सुवेंदु को सत्ता सौंप दी।

 

अब ममता के 80 में से 60 विधायक बागी बन गये।रितो व्रत बंदोपाध्याय बागी विधायकों के नेता बने , नेता प्रतिपक्ष भी बन गये। विधानसभा अध्यक्ष ने रितो व्रत बंदोपाध्याय को विपक्षी नेता के तौर पर मान्यता दे दी।

 

ममता बनर्जी के 29 लोकसभा सांसदों में 20 सांसद तथा राज्यसभा के 13 सांसद टिएमसि छोड़कर भाजपा में आने के लिए तैयार बैठे हैं। भाजपा उन्हें आज नहीं तो कल लेगी कैसे भी हो,किस तरह से भी हो।ये सारे बागी पर्दे के पीछे भाजपा के इशारे से ही बागी बने हुए हैं।

 

इसतरह ममता बनर्जी की राजनीति सड़क से आरंभ हुई वापस सड़क पर आगयी। ममता आज के दिन विधायक, सांसद,मंत्री, मुख्यमंत्री कुछ भी नहीं है।सभी कर्मों का भोग है , आनेवाले दिनों में ममता को, उसके सारे टोले बाजों को ,कट मनि वालों को भोगना ही पड़ेगा।

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