श्री जगन्नाथ मंदिर पुरी में ‘पुरुषोत्तम ‘ या ‘मलमास ‘ मंदिर दर्शन से अधिक मास में अधिक लाभ
नन्द किशोर जोशी
एक्जिक्यूटिव एडिटर
क्रांति ओडिशा मीडिया
विश्व का सर्वाधिक प्राचीनतम धर्म है सनातन धर्म। हजारों हज़ारों साल पहले से सनातन धर्म इस धरा पर चला आ रहा है। महाभारत कथा काल 5 हजार साल से भी ज्यादा पुराना है।इसी महाभारत युद्ध में भगवान कृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से सारे संसार को गीता के रुप में संदेश दिया है। जीवन जीने की कला ,नीति शास्त्र का इसमें विस्तार से वर्णन किया गया है।हरि अनंत हरि कथा अनंता
हमारे देश में आदि शंकराचार्य ने भारत के चार दिशाओं,चार कोनों में चार धामों की स्थापना की थी। इसमें पूर्वी भारत के पुरी में भी एक पीठ की स्थापना की थी।इस पीठ का नाम है गोवर्धन पीठ।
चारों धामों में पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर एक धाम है। यहां बड़े भाई बलभद्र,बहन सुभद्रा और छोटे भाई जगन्नाथ का दर्शन बड़े ही पुण्य वाला माना जाता है। यहां ठाकुरजी रत्न सिंहासन पर विराजमान रहते हैं। इसके अलावा यहां अनेक पार्श्व देवी देवता भी विराजमान हैं।
मैंने जगत के नाथ जगन्नाथ नाम की एक पुस्तक हिन्दी में 2023 में लिखी है। इसमें 208 पृष्ठ हैं।इसी पुस्तक में एक चेप्टर है 36 -37 नंबर पेज पर 19 नंबर पोइंट में,इसका नाम है’ पुरुषोत्तम ‘ या ‘मलमास ‘ मंदिर।
इसी चेप्टर में पुरुषोत्तम या मलमास मंदिर के बारे में अच्छे से उल्लेख है।यह मंदिर वटमंगला (सर्वमंगला) मंदिर के सामने है।इस मंदिर की विशेषता यह है कि प्रत्येक 3 वर्ष में एक बार मलमास आरंभ होने के पूर्व दिन की अमावस्या तिथि से यह मंदिर खुलता है तथा अगले माह की अमावस्या तक मलमास में एक महीने तक खुला रहता है। वहां वराह , नृसिंह की पूजा अर्चना की जाती है। पूजा-अर्चना की विधि भी भिन्न है। जिसमें कुमुदिनी,कमल, तुलसी,गेंदा आदि के 30 प्रकार फूलों,आम , कटहल,केला,लिचु आदि फल चढ़ाये जाते हैं।
विष्णु की प्राप्ति के लिए व्रत रखनेवाली महिलाओं की यहां भीड़ रहती है। महिलाएं नारियल, सुपारी से संकल्प करके घी डालती हैं। वहां पर मलमास की व्रतकथा पढ़ी जाती है।
पूजा के अंतिम दिन ( अमावस्या) भगवान को खीर ,काकरा ,पीठा भोग लगाकर महिलाएं पूजा समाप्त करती हैं।
कल श्री जगन्नाथ मंदिर पुरी में, मैं मेरी पत्नी नीरु जोशी ,मेरे मित्र हनुमान दास अग्रवाल तथा उनकी पत्नी पुष्पा अग्रवाल संध्या समय श्री जगन्नाथ मंदिर पुरी में जाकर बलभद्र, सुभद्रा, जगन्नाथ के दर्शन किए, तत्पश्चात जीवन में पहली बार अधिक मास में पुरुषोत्तम या मलमास के मंदिर का भी दर्शन किए।
तीन साल में एक बार इस मंदिर का पट खुलता है एक महीने के लिए अधिक मास में।मेरा सभी सनातनियों से आग्रह है कि अधिकमास में अधिक पुण्य अर्जित करने के लिए श्री जगन्नाथ मंदिर पुरी में जाकर जगन्नाथ जी के अलावा इस मलमास मंदिर का दर्शन भी अवश्य करें और पुण्य के भागी बनें।जय जगन्नाथ।


