बंगाल में भाजपा मस्त,विपक्षी ध्वस्त
विपक्ष में लड़ाई दूसरे, तीसरे,चौथे नंबर की
नन्द किशोर जोशी
एक्जिक्यूटिव एडिटर
क्रांति ओडिशा मीडिया
आज भारत सभी गणतांत्रिक चुनावों के मामलों में विश्व में एक नंबर पर काबिज है। भारत में ही सही मायने में 100% गणतंत्र कायम है। अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, फ्रांस समेत सभी देशों में गणतंत्र के नाम पर ढकोसला बाजी है और कुछ नहीं।
भारत में समय पर चुनाव होते रहे हैं। विश्व में सर्वाधिक राजनीतिक दल भारत में ही पाये जाते हैं। दुनिया के सभी धनवान गणतांत्रिक देशों में जितनी पार्टियां हैं,उससे कहीं ज्यादा अकेले भारत में मौजूद हैं। भारत में गणतंत्र कितना मजबूत है,जड जमाये हुए है, साबित होता है।
अब बंगाल की बात करते हैं। बंगाल के हाल के चुनाव में भाजपा को 206 सीटें मिली.फाल्टा विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिले करीब 70% वोट।यह 70% वोट सारे के सारे हिन्दुओं के वोट हैं।
30% वोट कांग्रेस,सिपिएम ,टिएमसि इत्यादि में बंट गए। केवल सिपिएम को छोड़कर सारे दलों के सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई।यह 30% वोट एक सेंपल है आगामी बंगाल के चुनावों में। हिन्दुओं के 100% वोट मिलना भारत के चुनावी इतिहास की पहली घटना है।
भारत का चुनावी इतिहास कहता है कि एक बार भाजपा कहीं अगर सत्ता में आ जाये तो सहज से जाती नहीं है। अगर कहीं भूल-चूक से चली भी गई तो वापस पांच साल बाद चुनाव में आजाती है।
कांग्रेस का इतिहास बेहद खराब है इस मामले में। भारत के अनेक राज्यों में पिछले करीब 40-50-55 सालों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है और निकट भविष्य में आने के आसार नहीं नजर आ रहे।
सिपिम का इतिहास भी कांग्रेस से थोड़ा मिलता जुलता है। त्रिपुरा से चली गई, बंगाल से गये 15 साल हो गये ,इस बार केरल से भी चली गयी । मतलब पूरे भारत में कहीं भी सिपिएम शासन में नहीं है।
टिएमसि तो बंगाल चुनाव में करारी हार पश्चात अभी तक सदमे से उबर नहीं पाई है। ममता बनर्जी की पार्टी टूट की कगार पर खड़ी है। नेताओं में टिएमसि छोड़ कर भागने की होड़ मची है।
ऐसे में निकट भविष्य में आने वाले पंचायत, नगर चुनाव तथा बाद में आने वाले लोकसभा, विधानसभा चुनाव में कौन दो नंबर, कौन तीन नंबर और कौन चार नंबर की पार्टी बनेगी यही देखना रहगया है, क्यों कि भाजपा तो बंगाल मे अंगद की तरह पांव जमा चुकी है ,अगले 20-25 वर्षों के लिए। हिन्दुओं के 100% वोट भाजपा को मिलने की संभावना दिखाई देरही है। वहीं मुस्लिमों के 30% वोटों में उपरोक्त तीनों दलों में बंटवारा होना तय है।


