मडगाँव, गोवा के मडगाँव स्थित मनोहर पार्रिकर इनडोर स्टेडियम में 31वें सब जूनियर सीनियर राष्ट्रीय थांग-ता खेलों का भव्य उद्घाटन हुआ। थांग – ता फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन में ‘राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन’ के संस्थापक अध्यक्ष सोहन गिरी ने मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस वर्ष के राष्ट्रीय खेलों में देश के 25 राज्यों से 800 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जो इस स्वदेशी मार्शल आर्ट के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। इस अवसर पर, थांग-ता फेडरेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक ग्रैंड मास्टर प्रेम कुमार ने अपने संबोधन में बताया कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन थांग – ता को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में समर्पित कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप यह खेल अब ‘खेलो इंडिया’, ‘स्कूल गेम्स’ और ‘यूनिवर्सिटी गेम्स’ का हिस्सा बन चुका है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर दुःख व्यक्त किया कि इतने प्रयासों के बावजूद भी थांग – ता को अभी तक राष्ट्रीय खेलों में सम्मिलित नहीं किया गया है।
स्वदेशी खेलों को राष्ट्रीय पहचान देने की अपील:
मुख्य अतिथि सोहन गिरी ने इस मंच से भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ज़ोरदार अपील की। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि जुडो, कराटे, ताइक्वांडो और वुशू जैसे कई विदेशी मार्शल आर्ट्स खेल वर्षों से राष्ट्रीय खेलों में अपनी जगह बना चुके हैं, जबकि हमारा स्वदेशी खेल थांग – ता अभी भी इस श्रेणी से बाहर है।
श्री गिरी ने प्रधानमंत्री के ‘खेलो इंडिया’ अभियान की प्रशंसा की, जिसके माध्यम से स्वदेशी खेलों को प्रोत्साहन मिला है और उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी नई पहचान बनाई है। उन्होंने आह्वान किया कि भारत सरकार सभी स्वदेशी खेलों की ओर ध्यान दे और उन्हें राष्ट्रीय खेलों में तुरंत शामिल करे। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ युवाओं में स्वदेशी खेलों के प्रति विश्वास जागृत होगा, बल्कि खिलाड़ियों को नौकरी, रोज़गार और सरकारी आर्थिक सहायता भी प्राप्त हो सकेगी।
‘राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन’ ने प्रधानमंत्री मोदी की सरकार से विनम्रतापूर्वक विनती की है कि थांग – ता को राष्ट्रीय खेलों में सम्मिलित किया जाए, ताकि “हर घर स्वदेशी खेल” के नारे के साथ इस स्वदेशी मार्शल आर्ट्स को घर-घर तक पहुँचाया जाए।

