दिल्ली में बेटियों की सुरक्षा केवल नारों तक सीमित न रहे दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी हो”राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन 

नई दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली के नेहरू प्लेस क्षेत्र में असम एवं बिहार की दो युवतियों के साथ हुई छेड़छाड़, मारपीट एवं सार्वजनिक उत्पीड़न की घटना ने देश की राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन के संस्थापक अध्यक्ष सोहन गिरि के संज्ञान में यह मामला सोशल एक्टिविस्ट डॉ घरीताश्री भूयान नरूला द्वारा लाया गया। जानकारी मिलने तक एफआईआर दर्ज हो चुकी थी, किंतु घटना के वीडियो फुटेज एवं आरोपियों की पहचान होने के बावजूद अभी तक कोई गिरफ्तारी न होना अत्यंत चिंताजनक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है।

पीड़िताओं के अनुसार, नेहरू प्लेस क्षेत्र में कुछ असामाजिक तत्वों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, जातीय एवं अश्लील टिप्पणियाँ कीं तथा विरोध करने पर मारपीट की। एक युवती के कपड़े तक फाड़ दिए गए। घटना के दौरान कई लोग वीडियो बनाते रहे, परंतु किसी ने सहायता नहीं की। इससे समाज की संवेदनहीनता भी उजागर होती है।

राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय पीएमओ के माध्यम से दिल्ली के एल जी तरणजीत सिंह संधू,मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता , गृह मंत्री आशीष सूद तथा दिल्ली पुलिस के पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की है।

संगठन ने कहा कि राजधानी दिल्ली में लगातार महिलाओं एवं बाहरी राज्यों से आई बेटियों के साथ हो रही घटनाएँ पुलिस व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाती हैं। केवल “बेटी बचाओ” जैसे नारे और विज्ञापन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सरकार का दायित्व है कि बेटियों को वास्तविक सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।

राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन की प्रमुख मांगें:

 

• आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए।

• पीड़िताओं को सुरक्षा प्रदान की जाए।

• मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए।

• पुलिस की प्रारंभिक लापरवाही की निष्पक्ष जांच हो।

• महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर कठोर विशेष कानून लागू किए जाएँ।

संस्थापक अध्यक्ष सोहन गिरि ने कहा कि यदि राजधानी में भी बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं, तो यह पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। सरकार एवं प्रशासन को इस मामले में उदाहरण प्रस्तुत करते हुए त्वरित और कठोर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी अपराधी कानून का भय भूलने का साहस न कर सके।

 

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