यह बात सन् 1946 की है। कलकत्ता में नई-नई सोहरावर्दी की मुस्लिम सरकार बनी थी। उसने कलकत्ता के दो थानों को छोड़कर सभी थानों में मुस्लिम थानेदार नियुक्त कर दिये थे। उसमें से एक थानेदार को यह पता लग गया था कि डायरैक्ट एक्शन डे होने वाला है, जिसके अंदर हिन्दूओं को नरसंहार होगा। बताते चलें कि बंगाल में यह नरसंहार जिन्ना के इशारे पर उस समय के मुख्यमंत्री सोहरावर्दी ने करवाया था।
इसी का फायदा उठाते हुए एक मुस्लिम थानेदार कलकत्ता के मुक्तराम बाबू स्ट्रीट पर निवास करने वाले बग्रीदास गोयनका के यहां जाकर उनसे प्रोटेक्शन मनी के रूप में पाँच लाख रूपये माँगने लगा। उन्हीं के घर के बगल में सीताराम पोद्दार भी अपने पुत्र बालकिशन पोद्दार के साथ रहते थे। आपको बताते चलें कि यह सड़क उस समय कलकत्ता की सबसे वी आई पी सड़क हुआ करती थी क्योंकि यहां पर तब के बड़े-बड़े सेठ साहूकार निवास किया करते थे।
उसके रूपये मांगने के बाद गोयनका जी अपने मित्र सीताराम पोद्दार के यहां विचार विमर्श करने आए। सीताराम जी से विचार विमर्श कर ही रहे थे कि बालकिशन जी बोले कि आप चिंता मत करो चाचाजी। मैं इस विषय को अपने आप देख लूँगा। बालकिशन जी उस समय स्पेशल पुलिस विभाग में बड़े अधिकारी थे। उन्हें कई पुलिसवाले पहले से जानते थे।
बालकिशन जी ने अपनी सूझबूझ का प्रयोग करते हुए उस थानेदार की शिकायत ऊपर के अधिकारी को कर दी। बाद में उस थानेदार को विभाग द्वारा बुलाया गया। वो थानेदार पहले से उनसे मिलने आता रहता था। इस बात से चिढ़कर वो थानेदार उनसे लड़ने पहुँच गया। वो थानेदार बोला कि तुमने हमारी शिकायत करके अच्छा नहीं किया। हम तुम्हें छोडेंगे नहीं, मार देंगे। बालकिशन जी बिना किसी हथियार के थे। उन्होंने बात को संभालते हुए उससे मारने से पहले अपनी आखिरी इच्छा पूछने को कहा। उन्होंने अपनी आखिरी इच्छा बताते हुए लघुशंका करने जाने के लिये कहा।
इसके बाद बालकिशन जी घर के अंदर गये। और फौरन पीछे से दरवाजे से बाहर निकलकर पीछे से घर के बाहर आकर उसे धक्का मारकर गिरा दिया और उस पर पैर रखकर खड़े हो गये। थानेदार को गिराने के बाद अपने सुरक्षाकर्मी को बुलाया उन्होंने उससे उस थानेदार पर मूत्र विसर्जन करते हुए फोटो लेने को कहा। उसके बाद उसकी फोटो को पुलिस विभाग में शिकायत देकर भेज दिया कि आपके थानेदार पर कोई मूत्र विसर्जन करके चले जा रहा है। उसके बाद उस थानेदार को नौकरी से हाथ धोना पड़ा।

