हलाल मुक्त दिवाली अभियान’ में सहभागी बनें! – हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति का आह्वान

निजी संस्थाओं की अवैध ‘हलाल थोपने’ की नीति के विरुद्ध संसद में उठाएंगे आवाज! – भाजपा सांसद डॉ. अनिल बोंडे

 

अमरावती : ‘‘भारत में खाद्य पदार्थों को प्रमाणित करने का कानूनी अधिकार केवल सरकार की ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण’ (FSSAI) और ‘खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग’ (FDA) के पास है; किसी निजी धार्मिक संस्था के पास नहीं। FSSAI का प्रमाणपत्र दुनिया के 192 देशों में मान्य है। भारत में बहुसंख्यक हिंदू समाज रहता है और संविधान ने हमें ‘फ्रीडम टू ईट’ (खाने की स्वतंत्रता) दी है। इसलिए, किसी एक विशिष्ट धर्म की आहार पद्धति को दूसरों पर थोपना कतई उचित नहीं है। जिस प्रकार उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में अवैध ‘हलाल’ प्रमाणपत्रों पर प्रतिबंध लगाने का स्वागत योग्य निर्णय लिया है, उसी तर्ज पर पूरे देश में इस अवैध व्यवस्था पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। इसके लिए आगामी शीतकालीन सत्र में हम संसद में यह मुद्दा उठाएंगे,’’ *यह प्रतिपादन अमरावती के भाजपा सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने आज एक पत्रकार परिषद में किया।*

अमरावती में हलाल प्रमाणपत्र के विरोध में हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति और अन्य हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा आयोजित संयुक्त पत्रकार परिषद में वे बोल रहे थे। इस पत्रकार परिषद की प्रस्तावना हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति के विदर्भ समन्वयक श्री श्रीकांत पिसोलकर ने रखी। इस अवसर पर ‘हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति’ के ऱाष्ट्रीय संगठक श्री सुनील घनवट, राष्ट्रीय श्रीराम सेना (महाराष्ट्र) के प्रदेश अध्यक्ष श्री कवलजीत पांडे, हिंदू क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत मालवीय, श्री योग वेदांत सेवा समिति के प्रतिनिधि श्री मानव बुद्धदेव सहित अन्य हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

*पशु क्रूरता और अवैध मांस बिक्री पर उचित कार्रवाई की अपेक्षा*

 

*भाजपा सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने आगे कहा,* ‘‘लोकसभा के अतारांकित प्रश्न संख्या 724 के आधिकारिक उत्तर में सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘भारतीय गुणवत्ता परिषद’ (QCI) और ‘राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड’ (NABCB) द्वारा कुछ निजी संस्थाओं को दी गई मान्यता केवल ‘मांस और मांस उत्पादों के निर्यात’ तक ही सीमित है। सरकार ने देश में अनधिकृत हलाल प्रमाणीकरण पर रोक लगाने के भी निर्देश दिए हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि घरेलू बाजार में शाकाहारी और अन्य उत्पादों पर थोपी जा रही ‘हलाल सक्ती’ पूरी तरह से अनधिकृत और सरकार की नीतियों के विरुद्ध है।’’

‘‘हलाल प्रक्रिया में पशुओं को अधिक समय तक दर्द सहना पड़ता है। यूरोपीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर 6 यूरोपीय देशों ने ‘हलाल’ पर प्रतिबंध लगा दिया है। हमारे देश में भी ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम’ है। जिस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ मंदिरों में पशु बलि पर रोक लगाई है, उसी प्रकार हलाल प्रक्रिया में होने वाली क्रूरता पर भी विचार होना चाहिए। साथ ही, शहरों में खुलेआम अवैध मांस बिक्री और सड़कों पर जानवरों के अवशेष व खून फेंकने पर FDA और इसके आयुक्त तुकाराम मुंढे को अधिक प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे में न पड़े।’’

 

*त्योहारों में मोदक, लड्डू और करंजी के आटे पर भी ‘हलाल सक्ती’!*

 

इस अवसर पर *‘हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति’ के राष्ट्रीय संगठक श्री सुनील घनवट ने ‘हलाल मुक्त दिवाली अभियान’ (#HalalFreeDiwali) की घोषणा की। उन्होंने कहा,* ‘‘पहले हलाल केवल निर्यात तक सीमित था, लेकिन अब दिवाली के पकवान, गणेशोत्सव के मोदक, लड्डू और करंजी के आटे जैसे उत्पादों के लिए भी ‘हलाल प्रमाणपत्र’ लेना पड़ता है। यह अत्यंत क्रोधित करने वाला है। मैकडॉनल्ड्स, पिज्जा हट, डोमिनोज और केएफसी जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियां केवल ‘हलाल’ पद्धति से बना भोजन बेचकर हिंदू, जैन और सिख भाइयों पर ‘इस्लामी धार्मिक परंपरा’ थोप रही हैं। 100 से अधिक देशों में ‘हलाल’ उत्पाद नहीं हैं। केन्या जैसे देश में तो हलाल के कारण स्थानीय लोगों का रोजगार छिनने की वजह से वहां जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है।’’

 

*‘चितले’ जैसे स्वाभिमानी उद्यमी बनें!*

 

श्री घनवट ने आगे कहा, ‘‘खाद्य पदार्थ, सौंदर्य प्रसाधन, दवाइयां और दैनिक उपयोग की वस्तुएं बनाने वाली लगभग 400 कंपनियों ने 3,200 उत्पादों के लिए हलाल प्रमाणपत्र लिया है। नए हलाल प्रमाणपत्र के पंजीकरण के लिए 40,000 से 90,000 रुपये तक और वार्षिक नवीनीकरण के लिए 35,000 से 75,000 रुपये तक शुल्क वसूला जाता है। ‘एडराइट रिसर्च’ और ‘हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया’ के हवाले से वैश्विक बाजार में हलाल उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 19% (लगभग 7 बिलियन डॉलर यानी साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक) है, जिसमें भारतीय कंपनियों और होटलों की हिस्सेदारी लगभग 80,000 करोड़ रुपये है। यानी हलाल प्रमाणपत्र के नाम पर निजी संस्थाएं करोड़ों रुपये वसूल रही हैं।’’

 

‘‘यह पैसा 7/11 और 26/11 के मुंबई हमलों जैसी आतंकी गतिविधियों में शामिल आरोपियों को बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, यह हमारा पिछला अनुभव रहा है। इसका अर्थ है कि हमारे ही पैसे से आतंकियों की मदद की जाती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने हलाल सक्ती पर प्रतिबंध लगाया है और यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, हम इसके फैसले का इंतजार कर रहे हैं। अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए हिंदू व्यापारियों को ‘चितले’ जैसे स्वाभिमानी उद्यमी बनना चाहिए। हमें अपना व्यापार अपने ही लोगों के साथ करना चाहिए। इस दिवाली हम हलाल प्रमाणित उत्पाद नहीं खरीदेंगे और हलाल संस्थाओं के पास अपना पैसा नहीं जाने देंगे।’’

 

इस समानांतर और राष्ट्र-विरोधी अर्थव्यवस्था को खत्म करने के लिए समिति की ओर से देश भर में ‘हलाल मुक्त दिवाली अभियान’ चलाया जाएगा। इसके तहत देश भर में व्यापारियों की बैठकें, मार्गदर्शन और जगह-जगह होर्डिंग्स लगाकर व्यापक जन जागरूकता फैलाई जाएगी। ‘‘हम पूरे हिंदू समाज से आह्वान करते हैं कि श्री लक्ष्मी पूजन और दिवाली के पकवान बनाने के लिए ‘हलाल प्रमाणित उत्पादों’ का उपयोग न करें। हिंदू समाज अब हलाल उत्पादों की सक्ती बर्दाश्त नहीं करेगा,’’ श्री घनवट ने स्पष्ट किया।

 

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