नवीन,बीजेडी की हो रही किरकिरी  आज के बंद को पहले समर्थन, फिर ना बोले 

नवीन,बीजेडी की हो रही किरकिरी

आज के बंद को पहले समर्थन, फिर ना बोले

    नन्द किशोर जोशी

 एक्जिक्यूटिव एडिटर, क्रांति ओडिशा मीडिया

 

विश्व के सभी गणतांत्रिक देशों में जितनी इज्जत शासक दल की होती है , करीब करीब उतनी ही इज्जत मुख्य विपक्षी दल की भी होती है। गणतांत्रिक देशों में आम लोगों को यह भरोसा, विश्वास रहता है कि जो आज मुख्य विपक्ष में है ,वो कल शासन में भी आ सकते हैं। गणतांत्रिक देशों के वोटरों के हिसाब से यह सोच अच्छी ही है।

 

ऐसे में आम वोटरों को बारंबार चुनावों में सरकार बदलने का मौका भी मिलता रहता है,जो राष्ट्रहित, समाज हित के लिए अच्छा ही है। बशर्ते मुख्य विपक्षी दल अगर जनता जनार्दन से पूरे तौर पर जुड़ कर रहें।समय समय पर जनहित, लोकहित के मुद्दे उठाते रहें।

 

2009 में जब से ओडिशा में भाजपा -बीजेडी की साझा सरकार का पतन हुआ है,तब से लेकर 2024 तक यानि शासन में आने तक भाजपा ने ओडिशा में नवीन सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा। हमेशा लोगों से जुड़े रहे ,जनता जनार्दन के हर छोटे बड़े मुद्दे उठाते रहे।

 

15 सालों तक सड़क पर जनता के हित में संग्राम किया और आज सत्ता में जनता के समर्थन के कारण काबिज हैं।2009 में जब भाजपा और नवीन की राहें जुदा हुई, तत्पश्चात भाजपा ने सड़क पर मेहनत कर, सर्वप्रथम कांग्रेस को मुख्य विपक्षी दल से नीचे की ओर धकेला, राज्य में कांग्रेस को 3 नंबर की पार्टी बनाने में मेहनत किये, तत्पश्चात बीजेडी को दो नंबर की पार्टी बनाने में मेहनत किये और आज भाजपा राज्य में एक नंबर की पार्टी बन कर सत्ता में काबिज है।

 

कल मैंने अपने लेख के माध्यम से ओडिशा में मुख्य विपक्षी दल के नेता नवीन पटनायक की राजनीति के बारे में मेरी सोच,समझ, आकलन पर लेख लिखा था।आज समझिए उसी की दूसरी कड़ी है।

 

आज इंडि गठबंधन आयोजित, प्रायोजित ओडिशा बंद है। परसों दिल्ली में इसी इंडि गठबंधन प्रायोजित कार्यक्रम में नवीन के 3 सांसदों ने हिस्सेदारी निभाई थी। लेकिन आज नवीन की बीजेडी बंद के समर्थन में नहीं है।

 

बीजेडी का कहना है कि हम तटस्थ हैं,न्यूट्रल हैं।अब सवाल यह उठता है कि अगर आप न्यूट्रल हैं तो दिल्ली में कांग्रेस का हाथ कैसे थामे ? इसके साथ में एक और बात उजागर हो रही है कि आज के इंडि गठबंधन को लेकर कल भुवनेश्वर में पहले समर्थन को लेकर हां क्यूं बोले और फिर समर्थन को ना क्यूं बोले?

 

कल दोपहर साढ़े 12 बजे नवीन निवास के बाहर बीजेडी मीटिंग पश्चात विधायिका प्रमिला मल्लिक मीडिया से मुखातिब होते हुए बोलीं कि बीजेडी आज के बंद के समर्थन में है ।

 

लेकिन केवल आधे घंटे पश्चात दिन के एक बजे प्रमिला मल्लिक पलट गई अपने घर पर मीडिया से मुखातिब होते हुए बोलीं कि हम ओड़िशा बंद को समर्थन नहीं करेंगे। अर्थात केवल आधे घंटे में मुख्य विपक्षी दल के स्टेंड में पूरा बदलाव आगया,यू टर्न होगया।

 

ओडिशा मीडिया सर्कल में इसे लेकर काफी हंसी मजाक हो रहा है।लोग तरह-तरह की बातें बना रहे हैं।कुछ मीडिया वालों का कहना है कि पहली खबर बंद के समर्थन वाली मीडिया ने जैसे ही ब्रेकिंग न्यूज बोल कर चलाया,तैसे ही दिल्ली में शासक भाजपा सक्रिय हुई, तुरंत दिल्ली से फोन आया भुवनेश्वर और बीजेडी के स्वर में परिवर्तन होगया आधे घंटे के अंदर।बंद के समर्थन वाली बात न्यूट्रल में बदल गई।

 

मतलब केवल आधे घंटे में मुख्य विपक्षी दल बीजेडी पूरी पलट गयी,यू टर्न ले ली।इसका मतलब साफ है कि जैसा मैंने कल लिखा था कि नवीन पटनायक दिल्ली में कांग्रेस संग एक हाथ मिलाये और दूसरे हाथ में पीठ पीछे कमल के फूल को थामे हुए हैं ओडिशा में।

 

आज यह बात पूरी तरह 100% ठीक साबित हुई।अब सवाल यह उठना लाजिमी है कि अगर राज्य में मुख्य विपक्षी दल बीजेडी अपनी विपक्षी भूमिका को जनता के सामने नहीं दिखायेगी या नजर अंदाज करती रहेगी ,तो आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेडी दो नंबर की पार्टी से हटकर तीन नंबर की पार्टी भी बन सकती है, जैसे पहले कांग्रेस 1995 से 2000 एक नंबर की पार्टी थी। फिर 2000 से 2009 तक मुख्य विपक्षी पार्टी रही।2009 से 2014 मुख्य विपक्षी पार्टी रही। तत्पश्चात 2014 से 2024 राज्य में तीसरे नंबर की पार्टी रही।

 

ऐसे ही देखा जाये तो आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेडी दो नंबर से तीन नंबर पर खिसकने की संभावना पूरी पूरी दिखाई देरही है। अगर इससे बचना चाहते हैं नवीन,तो उनको यह बात त्यागनी होगी कि गंगा के किनारे गये ,गंगा राम और जमुना के किनारे गये, जमुना राम। अर्थात दिल्ली में एक बात और ओडिशा में दूसरी बात नहीं चलेगी।

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