राष्ट्रवाद, सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और संगठनात्मक विस्तार पर हुआ व्यापक मंथन
पुरी, भगवान श्रीजगन्नाथ की पावन नगरी पुरी में राष्ट्रीय हिंदू संगठन का 14वां स्थापना दिवस एवं दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक तथा राष्ट्रीय अधिवेशन विभिन्न राज्यों से आए राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक पदाधिकारियों, संत-महात्माओं और लगभग 400 कार्यकर्ताओं की सहभागिता के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
दो दिनों तक चले इस राष्ट्रीय आयोजन में संगठन के विस्तार, सामाजिक सेवा, सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, राष्ट्रवाद, संगठनात्मक अनुशासन, जनसंपर्क, सदस्यता विस्तार तथा भविष्य की कार्ययोजना सहित विभिन्न विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। ओडिशा प्रभारी ब्रह्मानंद साहू कार्यक्रम की शुभारंभ किए और उड़ीसा राज्य अध्यक्ष डा सुनीति मुंड सभीको स्वागत करते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
प्रथम दिवस पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अंतर्गत चार महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए। प्रत्येक सत्र में संगठन की वर्तमान गतिविधियों, भावी रणनीति और विभिन्न प्रकोष्ठों के कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई।
प्रथम सत्र
प्रथम सत्र का संचालन अभयानंद मिश्र जी, अध्यक्ष, केंद्रीय निर्णायक मंडल ने किया। सत्र में राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र दुबे सत्या जी, वरिष्ठ सदस्य राष्ट्रीय परिषद महेंद्र नाथ मिश्रा जी, केंद्रीय कार्यकारिणी अध्यक्ष सारांश निगम जी, राष्ट्रीय परिषद सदस्य डी.एन. मधु जी, प्रो. सुरेश बाघ जी, टी. विजय जी एवं राधा रमन कुलश्रेष्ठ जी सहित प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।

इस सत्र में संगठनात्मक नेतृत्व, केंद्रीय कार्यकारिणी की भूमिका तथा संगठन को अधिक प्रभावी एवं सक्रिय बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
द्वितीय सत्र
द्वितीय सत्र का संचालन संदीप बोस जी, प्रदेश अध्यक्ष, मध्यप्रदेश ने किया।
इस सत्र में महेंद्र नाथ मिश्रा जी, चंद्रिका प्रसाद पांडेय जी, कुंवर आदर्श सिंह जी, मुन्नी लाल श्रीवास जी, रविता विश्वकर्मा जी तथा कवि रामेंद्र सिंह बृजवासी जी ने सहभागिता की।
सत्र में संगठन की वित्तीय नीति एवं भविष्य की वित्तीय योजना, प्रचार विभाग की कार्यप्रणाली, सक्रिय एवं कर्मठ सदस्यों की भूमिका तथा साप्ताहिक हिंदू समागम जैसे संगठनात्मक विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। संगठन के विभिन्न प्रकोष्ठों को अधिक सक्रिय बनाने तथा जनसंपर्क को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
तृतीय सत्र
तृतीय सत्र का संचालन जितेंद्र मिश्रा ‘जीतू’ जी, केंद्रीय अध्यक्ष, विधि प्रकोष्ठ ने किया।
सत्र में राधा रमन कुलश्रेष्ठ जी, अभयानंद मिश्र जी, डी.एन. मधु जी, विनय झा जी, गुलशन अरोड़ा जी तथा रितेश श्रीवास्तव जी उपस्थित रहे।
इस सत्र में भगवान श्रीजगन्नाथ की स्तुति एवं मांगलिक कार्यक्रम के साथ संगठन के संपर्क-सूचना तंत्र तथा विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक गतिविधियों के विस्तार पर चर्चा की गई। संगठन की मूल अवधारणा, ध्येय-वाक्य तथा हिंदू राष्ट्र घोषणा यात्रा जैसे विषयों पर भी विचार प्रस्तुत किए गए।
चतुर्थ सत्र
चतुर्थ सत्र का संचालन सारांश निगम जी, केंद्रीय अध्यक्ष, कार्यकारिणी ने किया।
इस सत्र में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमंत सत्येंद्र दुबे सत्या जी, टी. विजय जी, ब्रह्मानंद साहू जी, डॉ. सुनीति मुंड जी, चित्रसेन राउत राय जी तथा पुष्कर नायक जी सहित प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इस सत्र में संगठन की आगामी रणनीति, सदस्यता विस्तार, सभी जिलों में जिला कार्यालय स्थापित करने, वैदिक गुरुकुल की स्थापना, हिंदू शक्ति केंद्रों के विस्तार तथा आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों पर विशेष मंथन किया गया।

इसके पश्चात एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न प्रदेशों के प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, केंद्रीय समितियों के अध्यक्ष, केंद्रीय प्रकोष्ठों के अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय परिषद के प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए। इस विशेष सत्र में संगठन के राष्ट्रव्यापी विस्तार एवं भावी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा हुई।
दूसरे दिन हुआ ध्वजारोहण, समुद्र पूजन और श्रीजगन्नाथ मंदिर परिक्रमा
राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन प्रातः संगठन के रुशि प्रकोष्ठ प्रमुख ऋक्वेदी आचार्य अरक्षित जी के मार्गदर्शन में संगठन ध्वज की पूजा-अर्चना के पश्चात ध्वजारोहण किया गया।
इसके बाद ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुनीति मुंड, संगठन मंत्री सोनू पांडेय जी, ओडिशा प्रदेश महासचिव किशोर सुतार जी, तेलंगाना प्रदेश अध्यक्ष टी. विजय जी, अंडमान-निकोबार प्रदेश अध्यक्ष डी.एन. मधु जी, महाराष्ट्र प्रदेश उपाध्यक्ष प्रो. सुरेश बाघ जी सहित संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों एवं विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने समुद्र पूजन किया।
समुद्र देवता से अनुमति एवं आशीर्वाद प्राप्त करने के पश्चात देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 400 पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता सामूहिक रूप से श्रीजगन्नाथ मंदिर की परिक्रमा में शामिल हुए। सभी ने भक्तिभाव एवं अनुशासन के साथ मंदिर परिक्रमा करते हुए श्रीमंदिर में प्रवेश किया।
टाउन हॉल में स्थापना दिवस का भव्य समापन समारोह
दूसरे दिन शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक पुरी टाउन हॉल में राष्ट्रीय हिंदू संगठन के 14वें स्थापना दिवस का भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संत-महात्माओं, राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों, विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों की उपस्थिति रही।

मंच पर प्रमुख रूप से श्री मीनाकेतन मिश्रा जी, श्री सारांश निगम जी, श्री उदय प्रताप सिंह जी, श्री सुरेश बाघ जी, श्री टी. विजय जी, पूज्य राधारमण कुलश्रेष्ठ जी महाराज, श्री डी.एन. मधु जी, श्री महेंद्रनाथ मिश्रा जी, स्वामी नवल किशोर महाराज जी, स्वामी तपस्यानंद सरस्वती महाराज जी, स्वामी महीप्रकाश महाराज जी, पूज्य जयनारायण महाराज जी, श्री चंद्रिका पांडेय जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सत्येंद्र दुबे जी तथा ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुनीति मुंड उपस्थित रहे।
अतिथियों ने राष्ट्रवाद, सनातन और आध्यात्मिक चेतना पर रखे विचार
समापन समारोह में वक्ताओं ने राष्ट्रवाद, सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता तथा संगठन की भूमिका जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।
श्री मीनाकेतन मिश्रा जी ने राष्ट्र और संस्कृति के प्रति जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए संगठन को समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद एवं सेवा का माध्यम बनाने पर जोर दिया।

श्री सारांश निगम जी ने संगठनात्मक अनुशासन, कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका और राष्ट्रव्यापी विस्तार को संगठन की प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए निरंतर जनसंपर्क की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री उदय प्रताप सिंह जी ने राष्ट्रवाद को केवल विचार नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और कर्तव्यबोध से जोड़ने की बात कही तथा युवाओं की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
प्रो. सुरेश बाघ जी ने भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और सनातन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा शिक्षा एवं सामाजिक जागरूकता के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने पर बल दिया।
श्री टी. विजय जी ने विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक एकता और राष्ट्रहित के मुद्दों पर समन्वित प्रयास की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं के बीच संपर्क और सहयोग संगठन की शक्ति को बढ़ाता है।
पूज्य राधारमण कुलश्रेष्ठ जी महाराज ने आध्यात्मिकता और सनातन जीवनदृष्टि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण के साथ चरित्र निर्माण और आत्मिक जागरण भी आवश्यक है।

श्री डी.एन. मधु जी ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में संगठन की गतिविधियों के विस्तार, सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक जागरण पर अपने विचार रखे।
श्री महेंद्रनाथ मिश्रा जी ने संगठन के अनुभव और कार्यकर्ताओं की ऊर्जा को एक साथ जोड़ते हुए दीर्घकालीन संगठनात्मक योजना पर जोर दिया।
स्वामी नवल किशोर महाराज जी ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, सेवा और संस्कार को समाज जीवन का आधार बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
स्वामी तपस्यानंद सरस्वती महाराज जी ने आध्यात्मिक चेतना को व्यक्तिगत जीवन से आगे बढ़ाकर समाज और राष्ट्र के कल्याण से जोड़ने का संदेश दिया।

स्वामी महीप्रकाश महाराज जी ने सनातन परंपरा की व्यापकता, मानव कल्याण की भावना और भारतीय आध्यात्मिक दृष्टिकोण को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।
पूज्य जयनारायण महाराज जी, मुख्य सेवायत, श्रीजगन्नाथ मंदिर, पुरी ने श्रीक्षेत्र की आध्यात्मिक परंपरा, शंख क्षेत्र की महत्ता और शंखनाद की सांस्कृतिक परंपरा पर अपने विचार रखे। उन्होंने पुरी की धार्मिक परंपरा और श्रीजगन्नाथ संस्कृति के संदर्भ में आयोजन के महत्व को रेखांकित किया।
श्री चंद्रिका पांडेय जी ने संगठन के विस्तार, सक्रिय सदस्यता और सामाजिक संपर्क को मजबूत करने पर बल देते हुए कहा कि संगठन की वास्तविक शक्ति उसके समर्पित कार्यकर्ताओं से निर्मित होती है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सत्येंद्र दुबे जी ने संगठन के आगामी विस्तार, राष्ट्रव्यापी संपर्क, सदस्यता वृद्धि और कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संगठन को अनुशासन, विचार और सेवा के आधार पर आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुनीति मुंड ने पुरी में राष्ट्रीय अधिवेशन के आयोजन को ओडिशा के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि श्रीजगन्नाथ की भूमि पर देश के विभिन्न राज्यों के कार्यकर्ताओं का एकत्रित होना अपने आप में आध्यात्मिक एवं संगठनात्मक एकता का प्रतीक है। उन्होंने राष्ट्रवाद, सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक सेवा को संगठनात्मक कार्य के साथ जोड़कर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
‘हिंदू राष्ट्र’ की अवधारणा पर चर्चा
समारोह के दौरान वक्ताओं ने संगठन की विचारधारा के संदर्भ में ‘हिंदू राष्ट्र’ की अवधारणा पर भी अपने-अपने विचार रखे। वक्ताओं ने इसे सनातन सांस्कृतिक मूल्यों, राष्ट्रभाव, सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना और भारतीय परंपरा के संदर्भ में प्रस्तुत किया तथा इस विषय पर समाज में वैचारिक संवाद और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
RHS Community App का प्रस्तुतिकरण
समारोह के दौरान RHS Community App से संबंधित एक लघु वृत्तचित्र प्रस्तुत किया गया। इसके माध्यम से संगठन के डिजिटल संपर्क, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय तथा विभिन्न गतिविधियों को एक मंच पर जोड़ने की पहल की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर विभिन्न राज्यों के पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों को मानपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
समापन समारोह के अंतिम चरण में ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुनीति मुंड ने राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सत्येंद्र दुबे जी को शंख अर्पित करते हुए उनसे शंखनाद करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर श्रीजगन्नाथ मंदिर, पुरी के मुख्य सेवायत श्री जयनारायण महापात्र जी ने शंख क्षेत्र एवं शंखनाद की परंपरा और उसके आध्यात्मिक-सांस्कृतिक महत्व पर अपने विचार रखे।
इसके बाद शंखनाद के साथ कार्यक्रम का समापन भावपूर्ण वातावरण में हुआ।
समापन समारोह में ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुनीति मुंड ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष, संत-महात्माओं, राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों, विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा पुरी के नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि दो दिनों का यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विचार-विमर्श, संगठनात्मक एकता और भविष्य के संकल्प का अवसर रहा।
उन्होंने कहा कि संगठन केवल मंच पर दिखाई देने के लिए नहीं, बल्कि समाज के बीच सक्रिय रूप से दिखाई देने के लिए है। विचार केवल बोलने के लिए नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारने के लिए हैं और संकल्प केवल लेने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए हैं।

डॉ. मुंड ने कहा कि पुरी भगवान श्रीजगन्नाथ की भूमि है—समन्वय, सेवा, आध्यात्मिकता और मानवता की भूमि है। ऐसी पवित्र भूमि पर देश के विभिन्न राज्यों से आए कार्यकर्ताओं का एक साथ बैठना और संगठन के भविष्य पर विचार करना विशेष अनुभव रहा।
उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले आयोजन समिति, व्यवस्था समिति, आवास, भोजन, यातायात, मंच, मीडिया एवं अन्य सभी कार्यकर्ताओं का विशेष आभार व्यक्त किया।
अंत में उन्होंने महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के चरणों में प्रार्थना करते हुए कहा कि वे संगठन के सभी कार्यकर्ताओं को शक्ति, सद्बुद्धि, एकता और समाज एवं राष्ट्र की सेवा करने का सामर्थ्य प्रदान करें।

“आपका साथ, आपका स्नेह और आपका सहयोग ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।”
धन्यवाद ज्ञापन के पश्चात सभी अतिथियों एवं कार्यकर्ताओं के लिए प्रसाद सेवन की व्यवस्था की गई और इसी के साथ राष्ट्रीय हिंदू संगठन के 14वें स्थापना दिवस एवं दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का विधिवत समापन हुआ।

