राष्ट्रध्वज के सम्मान को केवल स्वतंत्रता दिवस तक सीमित न रखें – हिन्दू जनजागृति समिति
भारत का राष्ट्रध्वज ‘तिरंगा’ देश की स्वतंत्रता, राष्ट्रीय एकता, गौरव और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग एवं बलिदान का पवित्र प्रतीक है। आगामी स्वतंत्रता दिवस के परिप्रेक्ष्य में, हिन्दू जनजागृति समिति के पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत राज्य समन्वयक, श्री शम्भू गवारे ने समस्त देशवासियों से भावपूर्ण आवाहन किया है कि राष्ट्रध्वज का सम्मान केवल एक दिन के उत्सव तक सीमित नहीं रहना चाहिए। श्री गवारे ने स्पष्ट किया कि तिरंगे को देखते ही प्रत्येक भारतीय के मन में जो राष्ट्रप्रेम जागृत होता है, उसकी गरिमा को बनाए रखना केवल शासन-प्रशासन का नहीं, अपितु प्रत्येक भारतीय नागरिक का सर्वोच्च दायित्व है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभर में तिरंगे के प्रति अपार उत्साह दिखाई देता है, परंतु इसी दौरान अज्ञानतावश या लापरवाही के कारण राष्ट्रध्वज के अनुचित उपयोग की हृदयविदारक घटनाएं भी सामने आती हैं। समिति ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि तिरंगे का उपयोग कपड़ों, जूते-चप्पलों, केक, खाद्य पदार्थों अथवा चेहरे और शरीर पर रंगने के लिए किया जाना राष्ट्रध्वज की गरिमा के सर्वथा विरुद्ध है। इसी प्रकार, अल्पकालिक उपयोग के पश्चात प्लास्टिक या कागज़ के तिरंगों को सड़कों, नालियों या कचरे के ढेरों पर फेंका हुआ देखना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
सच्ची राष्ट्रभक्ति केवल झंडा फहराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके प्रति आजीवन सम्मानजनक व्यवहार करने में निहित है। विशेषकर बच्चों एवं युवा पीढ़ी को राष्ट्रध्वज के संवैधानिक महत्व और उसके सम्मान के विषय में जागरूक करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। राष्ट्रहित एवं धर्मरक्षा हेतु समर्पित हिन्दू जनजागृति समिति देशवासियों से यह पुरजोर अपील करती है कि वे प्लास्टिक के तिरंगे का पूर्णतः बहिष्कार करें। इसके साथ ही, उपयोग किए गए राष्ट्रध्वज को सड़क अथवा कचरे में कदापि न फेंकें तथा तिरंगे का उपयोग ऐसे वस्त्रों, खाद्य पदार्थों एवं अन्य वस्तुओं पर करने से सर्वथा बचें, जिससे उसकी गरिमा को ठेस पहुँचे।
देशभक्ति जीवन भर राष्ट्र के प्रति सम्मान, कर्तव्य और समर्पण की भावना का नाम है। अतः इस स्वतंत्रता दिवस पर प्रत्येक भारतीय को यह राष्ट्रभक्त संकल्प लेना चाहिए: *”राष्ट्रध्वज का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है। मैं सदैव तिरंगे की गरिमा एवं सम्मान बनाए रखूँगा तथा दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करूँगा।”

