100 से अधिक कवि-साहित्यकारों ने लिया हिस्सा, ‘अनुवादक बनाम एआई’ पर हुआ मंथन।
भुवनेश्वर, गीत गोबिंद भवन में श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव (SNLF) का पांचवां संस्करण आयोजित किया गया ।इस दो दिवसीय महोत्सव में देशभर से करीब 100 से अधिक कवियों, कथाकारों, अनुवादकों और साहित्यकारों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बहुभाषी कवि सम्मेलन रहा, जिसमें 12 से अधिक भारतीय एवं जनजातीय भाषाओं के रचनाकारों ने अपनी मातृभाषा में कविता पाठ किया।
इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं की साहित्यिक विविधता को मंच प्रदान करने के साथ साथ मातृभाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और परस्पर संवाद को बढ़ावा देना था । संस्था के निदेशक डॉ. फणी महांती ने कहा कि भारत की भाषाएं भले ही अनेक हैं, लेकिन भारतीय साहित्य की संवेदना एक है। सभी भाषाओं के बीच सम्मान, संवाद और सहयोग की भावना मजबूत होना जरूरी है।
इस कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में साहित्यिक पत्रिका ‘शब्दब्रह्म’ के विशेषांक और ‘बतायन’ पत्रिका का विमोचन किया गया। ‘संवेदना और आत्मा’ विषय के तहत ‘अनुवादक बनाम एआई’ तथा ‘क्या कथा-लेखन सौंदर्य के लिए है या दायित्व के लिए?’ विषय पर परिचर्चाएं हुईं। कथा-लेखन पर सत्र की अध्यक्षता मैथिली उपन्यासकार प्रदीप बिहारी ने की। इसमें ओड़िया कथाकार प्रकाश महापात्र, प्रो. सुधीर जोशी, तेलुगु कवि प्रसन्न कुमार, असमिया कवि राजीव फूकन सहित कई साहित्यकारों ने अपने अपने विचार रखे।
दूसरे दिन के सत्र में विभिन्न भारतीय भाषाओं की पुस्तकों के साथ 20 से अधिक अनूदित पुस्तकों का विमोचन किया गया । ‘अनुवादक बनाम एआई’ परिचर्चा में प्रो. चित्तरंजन ने मॉडरेटर की भूमिका निभाई। वहीं श्यामली सेनगुप्ता, सुतपा साहा, अनिमा दास, राजीव फूकन, दिनेश माली, बरनाली शर्मा, परमिता सारंगी, संजीव बोरुडे, रचना सहित कई पुरस्कार प्राप्त अनुवादकों और साहित्यकारों ने विचार साझा किए।
इस महोत्सव में पद्मश्री देवी प्रसन्न पटनायक, अश्विनी कुमार, सुबोध सरकार, नरेंद्र पुण्डरीक, सुरेंद्र नागराज, प्रफुल्ल कुमार मोहंती तथा विश्व हिंदी परिषद, ओडिशा के अध्यक्ष एवं हिंदी कवि विक्रमादित्य सिंह सहित कई प्रतिष्ठित साहित्यकार शामिल हुए।
इस अवसर पर राष्ट्रीय कवि विक्रमादित्य सिंह ने कहा, “भारत की भाषाएं अनेक हैं, लेकिन उनकी आत्मा एक है।” उनके काव्य पाठ पर सभागार तालियों से गूंज उठा।
श्रीक्षेत्र राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के सचिव डॉ. सत्यव्रत जेना और साहित्य संस्कृति समारोह के सचिव प्रणव कुमार छोटराय ने बताया कि विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों को एक मंच पर लाने के लिए पिछले छह महीने से कार्यक्रम की तैयारी की जा रही थी। मंच संचालन डॉ. सोनाली साहू और डॉ. संघमित्रा रायगुरु ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सरोज महापात्र ने किया। युवा, वरिष्ठ और विशेष रूप से महिला साहित्यकारों की उत्साहपूर्ण भागीदारी के साथ महोत्सव का समापन हुआ।

