भारत की धरती पर संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान : राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन

पूज्य श्री शंकर स्वामी जी प्रकरण में निष्पक्ष जांच, दोषी पुलिस कर्मियों पर कठोर कार्रवाई एवं दोष सिद्ध होने पर सेवा से बर्खास्त करने की मांग.

नई दिल्ली, राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन के संस्थापक अध्यक्ष सोहन गिरि ने तेलंगाना राज्य के गदवाल जिले में पूज्य श्री शंकर स्वामी जी के साथ हुई कथित घटना पर गहरा रोष एवं चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत संतों, ऋषियों एवं सनातन संस्कृति की पवित्र भूमि है। यदि किसी संत के साथ कानून एवं संविधान की मर्यादाओं के विपरीत अपमानजनक व्यवहार किया गया है, तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का विषय है।

 

सोहन गिरि ने बताया कि राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं माननीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी, तेलंगाना गोवर्नर, मुख्य्मंत्री पुलिस अधिकारी को विस्तृत शिकायत भेजी है। यह शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा शिकायत संख्या PMOPG/E/2026/0115053 के अंतर्गत स्वीकार कर ली गई है।

उन्होंने कहा कि संगठन ने अपने ज्ञापन में मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि सत्य देश के सामने आए और न्याय होते हुए दिखाई भी दे।

सोहन गिरि ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता, गरिमा एवं विधि के समक्ष समानता का अधिकार प्रदान करता है। कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का कर्तव्य है, किंतु कानून लागू करने वाले अधिकारियों का भी यह दायित्व है कि वे अपने अधिकारों का प्रयोग संविधान, कानून एवं मानवीय गरिमा के अनुरूप करें।

 

उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि संबंधित पुलिस अधिकारियों अथवा कर्मियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया, सेवा नियमों का उल्लंघन किया अथवा किसी संत के साथ अनुचित एवं अपमानजनक व्यवहार किया, तो ऐसे अधिकारियों को केवल निलंबित ही नहीं, बल्कि सेवा से बर्खास्त किया जाए तथा उनके विरुद्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।

 

राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन ने केंद्र एवं तेलंगाना सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं—

1. पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

2. जांच पूरी होने तक संबंधित पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।

3. यदि जांच में दोष सिद्ध होता है, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों को सेवा से बर्खास्त किया जाए तथा उनके विरुद्ध कठोर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।

4. जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि न्याय के प्रति जनता का विश्वास बना रहे।

5. भविष्य में किसी भी संत, महात्मा या धार्मिक व्यक्तित्व के साथ ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

सोहन गिरि ने कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन किसी व्यक्ति, संस्था अथवा पुलिस विभाग के विरुद्ध नहीं है, बल्कि न्याय, संविधान, कानून के शासन एवं संत समाज के सम्मान के पक्ष में खड़ा है। यदि कोई अधिकारी दोषी नहीं है तो उसे न्याय मिले, और यदि कोई दोषी है तो उसे कानून के अनुसार दंड मिले—यही संगठन की मांग है।

अंत में उन्होंने कहा भारत की पहचान उसकी सनातन संस्कृति, संत परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से है। संतों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है। यदि किसी संत के साथ अन्याय हुआ है तो दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन न्याय, संविधान और राष्ट्रहित के लिए निरंतर संघर्ष करता रहेगा। संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।

 

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