गोपीनाथ जी की कृपा से गोपीनाथ मंदिर की लंबी ग्रांउड फ्लोर ढलाई 13 जून रात को हुई। वहां दो तीन देशी अपंग ,बिना दूध वाली गाय समाज हित में होनी चाहिए।
नन्द किशोर जोशी
कटक, ऐतिहासिक, धार्मिक नगरी कटक की नयासडक में स्थित है प्राचीन श्रीगोपीनाथ मंदिर। करीब 125 साल पुराना है श्रीगोपीनाथ मंदिर। अंग्रेजों के समय इस प्राचीन मंदिर की स्थापना हुई और इसके संस्थापक परिवार की फीकी आने पर कोलकाता वापस चले गए , बहुत अर्से पहले।
आज की संचालन समिति ने बहुत बडा और अच्छा कार्य किया है। मंदिर का सौंदर्यीकरण, मंदिर की लोकेशन को देखते हुए इसका समयानुसार, भक्तों के अनुकूल, मंदिर के अनुकूल विस्तारीकरण कार्य जोर-शोर से आजकल चल रहा है। बहुत अच्छा कार्य समाज हित में,समाज के लोगों को साथ में जोड़कर किया जा रहा है।ऐसे कार्य को भक्त दशकों याद रखेंगे।
एक और जरुरी कार्य समाज हित में यह है कि यहां दो तीन बिना दूध देने वाली गायों को रखना चाहिए।वह इसलिए कि आगामी पितृपक्ष में हमारे कटक के बड़ा बाजार यानि मारवाड़ी एरिया में गायों की बहुत जरुरत होती है।
ऐसे में गायों की अनुपलब्धता हमें बेचैन कर देती है पितृपक्ष के 16 दिनों में। पहले के समय लोगों के घरों में गायें होती थी। तत्पश्चात हमें गायों की उपलब्धता मारवाड़ी क्लब के मेन गेट के सामने होजाती थी। आजकल वो भी नहीं है।
पिछले एक दो साल में अचानक दिन के समय गायें बाजार में दिखाई नहीं देरही इस इलाके में। कारण अनेक हैं।अब सवाल यह उठता है कि गायें उपलब्ध कैसे हो ,कैसे पितृपक्ष में गौ ग्रास गौमाता को खिलाया जाये ।
इसका एक सहज,सरल समाधान यह है कि श्रीगोपीनाथ मंदिर प्रांगण में खाली स्थान, अनुपयोगी स्थान पर 2-3 गौमाताओं को रखा जाये स्थायी या अस्थायी तौर पर।दो तीन बिना दूध वाली देशी गाय हमें श्रीगोपाल कृष्ण गौशाला या अन्नपूर्णा गौशाला या मंगराजपुर गौशाला में मिल सकती है।
बिना दूध वाली गायों पर रखरखाव भी ज्यादा नहीं है।इसपर जो थोड़ा खर्च आयेगा उसे समाजबंधु उठाने में समर्थ हैं। गायें रहने से पूरे साल भर दाग तिथि के श्राद्ध कर्म में भी भक्तों को मदद मिल सकती है। वैसे भी गौमाता, गोपाल, गोपीनाथ सभी शब्दों में गौ प्रथम शब्द है ।अगर दो तीन गौमाता समाज हित में,धर्म हित में, सामाजिक एरिया के बीचोंबीच नहीं रहेगी ,तो फिर कहां रहेगी ।
उल्लेखनीय है कि श्री गोपीनाथ मंदिर के संस्थापकों की कुछ पर्सनल प्रोपर्टी बालु बाजार एरिया,नयासडक एरिया में पिछले लगभग 40 साल पहले बिकी थी।आज भी संस्थापकों की कुछ पर्सनल प्रोपर्टी इसी एरिया में है।

