जय अग्रसेन जी महाराज
एक शाम महाराजा अग्रसेन जी के नाम
अग्रसेन श्रीराम के वंशज थे , कृष्ण के समकालीन थे -पंडित विजय शंकर मेहता
अधिक मास में अधिक पुण्य करने पर अधिक सुफल मिलता है,ऐसी मान्यता सनातनियों की सारी दुनिया भर में है और विशेषकर सारी दुनिया के कोने कोने में विराजित मारवाडियों की तो है ही।

देखते-देखते कटक शहीद भवन में आयोजित चार कदम शांति की ओर कार्यक्रम का समापन कल शाम होगया। हमारे हनुमान कार्यक्रम के तहत ही अंतिम दिन यानि चौथे दिन एक शाम महाराजा अग्रसेन जी के नाम कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

हर रोज संध्या समय शहीद भवन में सैंकड़ों भक्तों का जमावड़ा लगा रहता था।कल समापन दिवस पर महाराजा अग्रसेन जी पर कार्यक्रम बहुत शानदार, जानदार, जानकारी से भरा था।शहीद भवन पूरा श्रोताओं से खचाखच भरा हुआ था।

व्यासपीठ पर विराजमान थे पंडित विजय शंकर जी मेहता। उन्होंने महाराजा अग्रसेन जी के बारे में बहुत सारी ,जरुरी जानकारी दी।वे बोले महाराजा अग्रसेन प्रभु श्रीराम के वंशज थे,वे भगवान कृष्ण के समकालीन थे। मतलब अग्रसेन महाभारत कालीन समय के थे।

धर्म को आजतक जिन लोगों ने बचाकर हमें दिया है, उनमें अग्रसेन प्रमुख थे। द्वापर युग में हुए अग्रसेन जी, उसके बाद कलयुग आया। द्वापर युग में अनूठे कार्य किए अग्रसेन जी।कर्म योग के अटल प्रणेता थे अग्रसेन, ईश्वर तुल्य महामानव थे अग्रसेन।जय अग्रोहा,जय अग्रसेन।

उम्मीद का दूसरा नाम है अग्रसेन। तीन जीवन है व्यापारिक , पारिवारिक, सांसारिक।महान पितृ पुरुष का नाम है अग्रसेन। अग्रसेन पर रामजी , कृष्णजी,शिवजी, हनुमानजी ,माता लक्ष्मी का प्रभाव पड़ा।राम के बेटे थे कुश और कुश के वंशज थे अग्रसेन।मूल रूप से इंसान कहीं न कहीं प्रगट होता है।अग्र भागवत पुस्तक में विस्तार से चर्चा है।जय भारत ग्रंथ से अग्रसेन का चरित्र मिलता है।
राजा परिक्षित का बेटा राजा जनमेजय बने।परहित को स्वहित समझने वाला राजा अग्रसेन हैं।जय भारत ग्रंथ में अग्रसेन कथा आती है। परहित में स्वहित देखना वैश्य धर्म है। अग्रसेन माता भगवती देवी और पिता वल्लभ सेन की संतान थे।माता भगवती गर्भावस्था में भगवान राम को बहुत याद करती थी, इसलिए राम जैसे बालक अग्रसेन हुए।
अग्रसेन कर्तव्य,अधिकार के धनी थे। अग्रसेन का जीवन आगे चलता है,ख्याति ,यश , कीर्ति तीनों अग्रसेन के पास थे। कीर्ति की पताका लहराती है,दूर से दिखती है, अग्रसेन अपने जमाने में बहुत लोकप्रिय हो गये थे।महाराज अग्रसेन खुशी-खुशी लोगों की समस्याओं का हल कर देते थे।
दुनिया तेज दिमाग से चलती है,दिल से नहीं। रिश्ते को निभाना ही लाइफ मेनेजमेंट है।रामजी से मेनेजमेंट सीखना चाहिए।
अग्रसेन की युवावस्था में महाभारत युद्ध हुआ। अग्रसेन ,वल्लभ सेन पांडवों की तरफ से युद्ध करने कुरुक्षेत्र में पहुंचे। अग्रसेन ने युद्ध भूमि में गीता सुनी,जब कृष्ण भगवान अर्जुन से बोल रहे थे।
भीष्म पितामह के बाणों के प्रहार से वल्लभ सेन धराशाई हुए। तत्पश्चात अग्रसेन के कंधे पर युद्धिष्ठिर ने हाथ रखा, बोले कि तुमने मेरी आत्मा पर विजय प्राप्त की है। कृष्ण भगवान ने अग्रसेन से कहा कि यश, कीर्ति,धन तेरे पीछे चलेगा।
अग्रसेन को गुरु गर्ग मिले । अग्रसेन युवावस्था में भी परिपक्व थे।गर्ग ऋषि ने अग्रसेन से यज्ञ करवाये । महालक्ष्मी आशीर्वाद दीं।गुरु कृपा से छोटा राज्य बन गया। अग्रोहा वीर भूमि है, अग्रोहा धाम है।घर घर अग्रोहा,पग पग पर अग्रसेन।शिव पार्वती का अभिषेक किये अग्रसेन,शिव पार्वती का एकांत संवाद ही रामकथा है।शिव पार्वती के अंश हैं हैं हनुमानजी। अग्रसेन ने शंकर पार्वती के दांपत्य को पूजा।
अग्रसेन का नाग कन्या माधवी से विवाह हुआ।माधवी के आने से सौभाग्य आया।पशुबलि देने से स्वर्ग मिलता है,अश्व वध नहीं किये। अग्रसेन पशुबली त्यागे , क्षत्रिय धर्म त्यागा,वैश्य धर्म अपनाये। गौसेवा ,कृषि, वाणिज्य, व्यापार,उद्योग अग्रवंशी करेंगे,ऐसी घोषणा महाराज अग्रसेन जी ने की।
गौसेवा से वैश्य समाज, मारवाड़ी समाज शुरु से ही जुड़ा हुआ है ,तभी से। अग्रसेन जी बोले हमें धन कमाना है। कंपनी का सिइओ मतलब मालिक, कर्मचारी दोनों,यह अग्रसेन जी की देन है। ऋषियों के आश्रम में 18 पुत्रों को भेजे तो ऋषि ने गौत्र दे दिया।एक पुत्री भी थी अग्रसेन जी को।
अग्रसेन ने घोषणा की कि आज के बाद जब कोई अग्रोहा में आये तो उसे एक इंट,एक रुपया दिया जाये।108 साल अग्रसेन शासन किये। अग्रोहा श्रापित होकर ध्वंस होगया। तत्पश्चात अग्रवाल सारी दुनिया में फैल गये। दुनिया में दामोदर और दान कार्य करते हैं। दामोदर बैठे रहें,दाम करे सब काम।यह आज के जमाने में भी सौ प्रतिशत सही है।

