हनुमान जी समस्या समाधान के देवता हैं -खुश रहें,खुश रखें  कथा व्यास पंडित विजय शंकर जी मेहता के किष्किन्धाकाण्ड पर समस्या के समाधान सूत्र से –

हनुमान जी समस्या समाधान के देवता हैं -खुश रहें,खुश रखें

कथा व्यास पंडित विजय शंकर जी मेहता के किष्किन्धाकाण्ड पर समस्या के समाधान सूत्र से –

नन्द किशोर जोशी

एक्जिक्यूटिव एडिटर

क्रांति ओडिशा मीडिया

कटक के केंद्रीय स्थल शहीद भवन में कल से चार दिवसीय कार्यक्रम,चार कदम शांति की ओर का प्रथम दिन था।कथा व्यास पंडित विजय शंकर मेहता जी ने किष्किन्धाकाण्ड – समाधान के सूत्र विषय पर बड़े ही सुन्दर ढंग से,सरल भाषा में समझाया।

 

मेहता जी के अनुसार मनुष्य के जीवन का सार अंश श्रीरामचरितमानस में लिखा है। किष्किन्धाकाण्ड में ही भगवान श्री राम,लक्ष्मण के साथ भक्त शिरोमणि हनुमान जी की प्रथम मुलाकात होती है।

 

प्रथम मुलाकात में ही परिचय पश्चात भगवान राम अपने प्रिय भक्त हनुमान जी को गले लगाते हैं।गले लगाते वक्त आंसुओं की धारा रामजी के आंखों से बहती है, लगता है जैसे आंसुओं से अभिषेक हो रहा है हनुमान जी का।इस तरह बड़ा ही मार्मिक चित्रण राम -हनुमान के प्रथम मिलन का वर्णन किये हैं।

 

हम धन्य हैं कि हमने पवित्र भारत भूमि पर जन्म लिया है। माता पिता का आशीर्वाद हमेशा हमें उपलब्ध रहता है। गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस ग्रंथ लिखकर बड़ा उपकार हम-सब पर किया है ।जो राम कभी साधु संतों के थे ,उनको साधारण जनता के बीच में पहुंचा दिया।

 

श्रीरामचरितमानस में सात कांड हैं। किष्किन्धाकाण्ड चौथा है , संघर्ष का है।इसी में है कि हनुमान जी अपने कंधों पर बैठाकर राम लक्ष्मण को सुग्रीव के पास पहुंचाते हैं, मित्रता कराते हैं। किष्किन्धाकाण्ड समस्याओं की समाधान का कांड है। इसमें एक हनुमान जी क्या आये ,सब समस्या का समाधान कर दिये।

 

मनुष्यों के जीवन में पांच रास्ते से समस्या आती है।एक स्थान मार्ग से समस्या आती है,दूसरी समस्या संपत्ति है, तीसरे संबंधियों से आती है ,चौथे स्वास्थ्य मार्ग से समस्या आती है, पांचवें में औलाद मार्ग से समस्या आती है। आजकल बच्चों को लेकर तीन समस्या है, डिवोर्स, डिस्टेंस ,डिजिज ।इन सारी समस्याओं का समाधान किष्किन्धाकाण्ड में उल्लेख है।

 

हमारे चार बड़े धार्मिक ग्रंथ हमें चार बातें सीखाते हैं। महाभारत रहना सीखाती है, गीता करना सीखाती है, रामायण जीना सीखाती है, भागवत मरना सीखाती है।

 

हनुमान जी बचपन में माता अंजना से पूछे कि मैं बड़ा होकर क्या बनूंगा? माता बोली कि तू राम दूत बनेगा,तू राम के कार्य पूरा करेगा,तीन कार्य करने से राम आयेंगे, प्रार्थना, पुरुषार्थ, प्रतीक्षा।

 

संतानों को ऐसे ही कार्य करना चाहिए कि उनके माता-पिता को सुख शांति मिले। जीवन की हर समस्या के पीछे उसका समाधान खड़ा है , हनुमानजी के दृष्टिकोण से।

 

हनुमान जी का कहना है कि जरा मुस्कुराइए, भक्तों के होंठों पर सदा मुस्कान होनी चाहिए। अपने घर पहुंचना चाहिए मुस्कुराते हुए,सभी से मिलना चाहिए मुस्कुराते हुए। मनुष्यों को लड़ना चाहिए खुद के लिए,मुस्कुराना चाहिए दूसरों के लिए। हाथों से ताली , होंठों पर मुस्कान भगवान के भक्त की पहचान है। अहंकारी व्यक्ति किसी की सलाह नहीं लेता, सुनता नहीं। भगवान की चाहत में भक्त अलग दिखना चाहिए।

 

समय रहते माता पिता अपने बच्चों को भगवान से जोड़ दें।आज बच्चे तर्क करते हैं।अब एआइ का समय आगया है, रोबोट जीवन बर्बाद कर देगा।बाली ने अपने पुत्र अंगद को भगवान को सौंपा। माता पिता ने बच्चों को साफ नियत दी है। माता पिता का निर्णय नहीं नियत देखो अंगद के मामले में।

 

राम लक्ष्मण के विचार नहीं मिलते ,फिर भी साथ रहते हैं।कोई गरम ,कोई नरम । परिवार में कोई सुस्त,कोई चुस्त।अपने से विपरीत विचार रखने वाले के साथ हमें घर में रहना चाहिए।

 

हनुमान जी मनोविज्ञान के विशारद हैं।पाप बोयेंगे ,पाप उगेगा, पुण्य बोयेंगे , पुण्य उगेगा।हर घर में कुछ न कुछ नेगेटिविटी चलती रहती है। पति-पत्नी में गहरे मतभेद होने से कीमत परिवार को चुकानी पड़ती है। अपनी गृहस्थी के केंद्र में हनुमानजी को रखना चाहिए। इसलिए भगवान राम ने हनुमान को चुना।

 

आज शहीद भवन में कथा प्रवचन का विषय है सुंदरकांड -सफलता के सूत्र।कल भी शहीद भवन हाउसफुल था ,आज भी रहेगा। अतः आयोजक सोंथालिया परिवार का सभी से अनुरोध है कि कृपया चार बजे के पहले आकर अपना स्थान आरक्षित कर लें।कथा व्यास विजय शंकर जी मेहता ठीक चार बजे पहुंच जाते हैं।जय श्री राम,जय वीर हनुमान।

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