1971 बंगाल विधानसभा विपक्ष शून्य  2026 बंगाल विधानसभा विपक्ष शून्य  कुछ मिलती-जुलती, कुछ अलग-अलग 

1971 बंगाल विधानसभा विपक्ष शून्य

2026 बंगाल विधानसभा विपक्ष शून्य

कुछ मिलती-जुलती, कुछ अलग-अलग

Nand Kishore Joshi
Nand Kishore Joshi

नन्द किशोर जोशी

एक्जिक्यूटिव एडिटर

क्रांति ओडिशा मीडिया

 

1971 चुनाव में इंदिरा गांधी एवं कांग्रेस का नारा था गरीबी हटाओ।

इसी गरीबी हटाओ लोकलुभावन नारे की बदौलत इंदिरा गांधी बड़ी बहुमत के साथ भारत की प्रधानमंत्री बनीं और बंगाल में सिद्धार्थ शंकर राय मुख्यमंत्री बने।

 

ग़रीबी हटाओ नारे में बड़ा आकर्षण था और भारत की भोली भाली जनता उस लोकलुभावन, मनभावन नारे में फंस गयी और कांग्रेस केंद्र, बंगाल समेत अनेक राज्यों में सत्ता में पहुंच गई।

 

भारत से गरीबी आजतक नहीं हटी है। लेकिन वोट चोरी अवश्य ही हुई है और वोट चोरी की थी इंदिरा गांधी यानि राहुल गांधी की दादीजी ने। राहुल गांधी को भारत की जनता को जवाब देना चाहिए कि इंदिरा गांधी के 16 साल , राजीव गांधी के 5 साल, नरसिम्हा राव के 5 साल, मनमोहन सिंह के 10 साल में अर्थात 36 साल में कांग्रेस सीधे शासन में रही, चरण सिंह चंद्रशेखर, देवेगौड़ा,गुजराल के शासनकाल में कांग्रेस तीन साल बाहरी समर्थन से केंद्र सरकार चलायी ,तब भी 39 सालों में कांग्रेस गरीबी क्यों नहीं हटायी भारत से।

 

केवल नारे बाजी से और वोट चोरी करके भारत की जनता से वोट लेते रहे , स्विस बैंक में नोटों के अंबार लगाते रहे। भारत के लोगों को झूठे सुनहरे सपने दिखाते रहे और अपनी तिजोरियां भरते रहे।

 

अब मैं बंगाल विधानसभा विशेष पर बात कर रहा हूं। कांग्रेस की असीम मेहरबानी से , कांग्रेस के मार्ग दर्शन से 1952 से लेकर 2021 तक बंगाल में जितने भी विधानसभा चुनाव हुए, लोकसभा चुनाव हुए, पंचायत, म्युनिसिपल चुनाव हुए,सभी चुनावों में रिकॉर्ड ब्रेक हिंसा हुई, सैंकड़ों आम लोगों की जानें गईं, लाखों गरीबों के घर जलाये गये, हिन्दू महिलाओं की अस्मिता लूटी गई, हिन्दुओं के व्यापारी प्रतिष्ठान लूटे गए।

 

ठीक उपर लिखित तर्ज़ पर बंगाल में 1971 में विधानसभा चुनाव हुए। भयंकर रक्तपात हुआ,हिंसा हुई। कांग्रेसी हिंसा में वामपंथियों पर भयंकर रुप से भारी पड़े । कांग्रेस की बहुत बड़ी जीत हुई और वामपंथी बहुत कम सिटों पर सिमट गये।

 

सिद्धार्थ शंकर राय कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने।ज्योति बसु विपक्ष के नेता के रुप में उभरे। लेकिन ज्योति बसु के नेतृत्व वाली वामपंथी दलों ने बंगाल विधानसभा का वहिष्कार किया पूरे पांच साल।

 

ज्योति बसु तथा अन्य वामपंथियों का आरोप था कि चुनाव में धांधली हुई है,हिंसा हुई है, हमारे साथ अन्याय हुआ है, अतः हम बंगाल विधानसभा के सारे अधिवेशनों का वहिष्कार करेंगे और उन्होंने पूरे पांच साल विधानसभा में प्रवेश नहीं किया।

 

उस समय वामपंथियों के इस दांव से कांग्रेस सकते में आगयी।ऐसे में कांग्रेस जनता में बदनाम होजाती कि विपक्ष बिना विधानसभा चल रही है, कांग्रेस सरकार मनमानी कर रही है। अपनी बढ़िया छवि को कायम रखने के लिए कांग्रेस ने नायाब सूत्र निकाला और कांग्रेस ही सत्ता में है और कुछ कांग्रेसी विधानसभा में विपक्षी भूमिका में दिखाई देंगे और सरकार से सवाल जवाब करेंगे जैसे विपक्षी करते हैं।

 

यह बात ऐसे ही रही जैसे चित भी मेरी ,पट भी मेरी। सरकार और विपक्षी दोनों हाथों में लड्डू कांग्रेस के ।

 

अब आज की बंगाल विधानसभा की बात कर लेते हैं। भाजपा के 208 विधायक,टिएमसि के 80 विधायक में से 72 विधायक भाजपा से ,सुवेंदु अधिकारी से अंदर खाने मिले हुए हैं।इसका मतलब बंगाल भाजपा के साथ हैं।इसका मतलब आज बंगाल भाजपा के लिए चित भी मेरी,पट भी मेरी।

 

फर्क केवल यह है कि 1971 में वामपंथियों ने बंगाल विधानसभा में गैर हाजिर रहना उचित समझा और आज का मुख्य विपक्ष यानि टिएमसि विधायकों ने भाजपा सरकार से हाथ मिलाना, उचित समझा।

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