ट्रंप की घनघोर बेइज्जती चीन में  मार्को रुबियो की घनघोर बेइज्जती भारत में 

ट्रंप की घनघोर बेइज्जती चीन में

मार्को रुबियो की घनघोर बेइज्जती भारत में

नन्द किशोर जोशी

एक्जिक्यूटिव एडिटर

क्रांति ओडिशा मीडिया

विश्व का सर्वाधिक ताकतवर देश है अमेरिका।पैसे में, मिलिट्री पावर में, टेक्नोलॉजी में सबसे ज्यादा ताकतवर देश है अमेरिका। विश्व का सबसे बड़ा दादा ,गुंडा , बाहुबली देश भी है अमेरिका।

ऐसे में सर्वशक्तिमान अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प की बेइज्जती नहीं, घनघोर बेइज्जती हुई है हाल ही में चीन में।बड़े बड़े मंसूबे लेकर,बड़े हाइलेबल सरकारी डेलिगेशन, बिजनेस डेलिगेशन लेकर,बड़े लाव-लश्कर के साथ,बडी आशा और भरोसे के साथ बिगड़ैल डोनाल्ड ट्रम्प पहुंचे चीन की राजधानी बीजिंग दस दिन पहले।

बीजिंग हवाई अड्डे पर ट्रंप का स्वागत किये चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के एक अदने से, गुमनाम, सर्वाधिक कनिष्ठ कार्यकर्ता ने। वैसे तो वे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता थे,लेकिन सरकारी हैसियत चपरासी जितनी।

डोनाल्ड ट्रम्प की बड़ी डेलिगेशन ने योजना के मुताबिक चीन के राष्ट्रपति सि जिनपिंग के चारों ओर चक्कर काटने शुरु किए।सि जिनपिंग के चरणों में लेट गये , केवल चीन से फायदे का सौदा करने के लिए।

डोनाल्ड ट्रम्प ने भी अपनी तथाकथित मीठी जुबान से सि जिनपिंग को रिझाने,मनाने की सारी कोशिश की।बड़े ही आदर भाव से सि जिनपिंग के सामने झुके ,सलाम किये।सारी मेहनत, मशक्कत सब बेकार गयी।

सि जिनपिंग और चीनी कम्युनिस्टों ने कोई भाव अमेरिका, ट्रंप को नहीं दिया।उल्टे सि जिनपिंग ने ट्रंप को कहा कि खबरदार ताइवान के मामले में टांग मत फंसाओ, नहीं तो मामला बहुत बुरा होगा।

ट्रंप चुपचाप सुनते रहे , जैसे सांप सूंघ गया हो।एक रुपए का भी बिजनेस नहीं हुआ।दो दिन चीन में अमेरिकी लोगों के बेकार ही गुजरे।बड़े बेआबरु होकर ट्रंप एंड कंपनी का कूचा अमेरिका वापस रवाना हुआ।

सि जिनपिंग ने अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप और उनकी संपूर्ण मुतफर्का टिम को चीन से वापसी पर इलोक्ट्रोनिक्स गेजेट्स, टेबलेट इत्यादि रिटर्न गिफ्ट दिये ।चीनी रिटर्न गिफ्टों को सारे अमेरिकी बीजिंग एयरपोर्ट पर फेंक कर अमेरिका लौट गये।वे सारे डर गये कि इनमें चीन ने कोई जासूसी चिप्स डाल दी है और हम अमेरिका में इस्तेमाल करने पर फंस जायेंगे।

अब मैं बता रहा हूं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत के पांच दिन दौरे पर। मार्को रुबियो भारत में सर्वप्रथम कोलकाता में पधारे पिछले सप्ताह। कोलकाता हवाईअड्डे पर मार्को को रिसिव करने के लिए एक अति जूनियर सरकारी अधिकारी मौजूद थे।

कोलकाता में मार्को का कोई सरकारी कार्यक्रम तो था नहीं। मार्को रुबियो कोलकाता में मदर टेरेसा के मिसनेरिज ओफ चेरिटि पहुंचे सपत्नीक। गौरतलब है कि यह मिसनेरिज ओफ चेरिटि भारत में गरीब हिन्दुओं को क्रिस्चियन बनाने का, कन्वर्ट करने का सबसे बड़ा अड्डा है। यहां फोरन फंडिंग हर साल करोड़ों में आती है पिछले सौ सालों से।

भारत सरकार ने इस फंडिंग को रोकने के लिए कानून में संशोधन किए हैं।इससे इनका कन्वर्जन धंधा थोड़ा कम चल रहा है आजकल। मार्को के आने के दो दिन पहले इसी मिसिनेरिज की दो नन ने ममता बनर्जी से मुलाकात की थी।

ममता बनर्जी की मददगार भूमिका अब खत्म होगयी है। दोनों ननों ने ममता बनर्जी संग मीटिंग की आपबीती सुनाई। मार्को रुबियो ने फोरन फंडिंग के दूसरे रास्ते सुझाए और दिल्ली लौट गए।

दिल्ली हवाई अड्डे पर विदेश मंत्रालय के अति जूनियर अधिकारी ने मार्को रुबियो की अगवानी की।थोड़ी देर दिल्ली रुके ।मोदी संग शिष्टाचार के नाते मुलाकात की और जयपुर रवाना हुए।

जयपुर में राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी की हार्दिक इच्छा थी अमेरिकी विदेश मंत्री,उनकी पत्नी की आवभगत करने की। दिल्ली से मेसेज आया कि हवाई अड्डे पर जाने पर मंत्रीमंडल से छुट्टी।

दिया कुमारी हवाई अड्डे नहीं पहुंची ।एक जूनियर अधिकारी ने रिसिव किया और आमेर का किला मार्को रुबियो दंपती को घूमाकर लेआये 48 डिग्री सेल्सियस,तपती दोपहर में सूट बूट पहने मार्को को। मार्को को सिओफ करने जयपुर में स्थानीय थानेदार,डिएसपि,एसिपि , पुलिस हवलदार मौजूद थे। मार्को सभी पुलिस वालों से हाथ मिलाये और हवलदार से हाथ नहीं मिलाकर जल्दी जल्दी में विमान में सवार हो गये।

इसके पहले मार्को दंपती आगरा ताजमहल भी गये 46 डिग्री सेल्सियस में। सूट-बूट में ताजमहल के सामने बैठ कर अपनी पत्नी संग फोटो खिंचवाये।आगरा के विधायक यूपी में मंत्री भी हैं। लेकिन उपर से संदेश के कारण वे भी नहीं गये मार्को रुबियो को रिसिव,सिओफ करने।

इसतरह भारत के चार हवाई अड्डे पर मार्को रुबियो दंपती का स्वागत, सत्कार किया गया।वे समझ गए कि अमेरिका की आज भारत में क्या हैसियत है,क्या इज्जत है।

क्वाड मीटिंग की बैठक हुई। जापान, आस्ट्रेलिया,भारत , अमेरिका के विदेश मंत्री दिल्ली बैठक में शामिल हुए।क्वाड का असली मकसद था चीन की घेराबंदी। लेकिन ट्रंप के बिगड़े बोल, ढुलमुल रवैए के कारण क्वाड केवल औपचारिकता पूरी कर पाया।

इसतरह बिना किसी फायदे के ,अपनी घनघोर बेइज्जती करा कर अमेरिकी विदेश मंत्री बेआबरु होकर अमेरिका लौट गये अपने कूचे में। गौरतलब है कि आज भारत के पास पक्के में अग्नि मिसाइल , पृथ्वी मिसाइल इत्यादि हैं,जिनकी मारक क्षमता 8 हजार किलोमीटर है और कच्चे में इनकी मारक क्षमता 12 हजार किलोमीटर है।यानि भारत से छोड़ी मिसाइल अमेरिका तक पहुंच सकती है।

तभी तो बिगडेल अमेरिका, ट्रंप को भारत ने मार्को रुबियो के माध्यम से उसकी औकात बताई है और अमेरिका को भी इसका एहसास है।

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