इंडसफूड मैन्युफैक्चरिंग 2026, फूडटेक 4.0 के साथ, 6 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर – यशोभूमि में शुरू हुआ। यह आयोजन खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ऑटोमेशन और उत्पादन से जुड़ी तकनीकी को समर्पित एक महत्वपूर्ण मंच का शुभारंभ है। भारतीय व्यापार संवर्धन परिषद (टी पी सी आई) द्वारा आयोजित यह मंच, खाद्य प्रसंस्करण और गुणवत्ता संवर्धन से जुड़े सभी पक्षों को एक साथ लाने वाला है, जिसमें नई प्रद्योगिकी उपलब्ध कराने वालों से लेकर, उत्पादनकर्ता, नीति निर्माता और वैश्विक साझेदार शामिल हैं।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में सचिव श्री अविनाश जोशी ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में भारत में देश की अपनी खपत के अतिरिक्त होने वाले कृषि उत्पादन, मजबूत उत्पादन आधार और युवा, कुशल कार्यबल पर प्रकाश डाला, और मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता में वृद्धि और प्रौद्योगिकी को अपनाने के ज़रिए खाद्य प्रसंस्करण को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बाल दिया। उन्होंने कहा कि आज भारत में जितनी खपत है उससे अतिरिक्त कृषि का उत्पादन हो रहा है, एक मजबूत विनिर्माण आधार है और एक युवा तथा कुशल कार्यबल है। यह हमारे सामने एक अवसर है कि हम मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता में वृद्धि और नई तकनीकि अपनाने के ज़रिए खाद्य प्रसंस्करण को और मजबूत करें ताकि हम और अधिक रोज़गार सृजन कर सकें, किसानों की आय में वृद्धि कर सकें और निर्यात बढ़ा सकें। इंडसफूड मैन्युफैक्चरिंग जैसे प्लेटफॉर्म इस क्षमता को ठोस नतीजों में बदलने में अहम भूमिका निभाते हैं।”
उद्घाटन समारोह में भारतीय व्यापार संवर्धन परिषद के अध्यक्ष श्री मोहित सिंगला; वाणिज्य विभाग के कृषि एस एम डी के आर्थिक सलाहकार श्री यशवीर सिंह; जर्मनी गणराज्य के दूतावास के कृषि एवं खाद्य विभाग के प्रमुख श्री वोल्कर क्लाइमा; जे बी टी मारेल, अमरीका के क्षेत्रीय व्यापार प्रमुख श्री विक्रम मुलमुले; द वर्ल्ड बैंक ग्रुप के सीनियर ए आई और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एक्सपर्ट श्री विकास कानूंगो; ममता मशीनरी लिमिटेड के प्रेसिडेंट श्री राजशेखर वेंकट; और ऑटोमेशन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री सुनील मेहता शामिल हुए।

इंडसफूड मैन्युफैक्चरिंग 2026 और फूडटेक 4.0 आने वाले दिनों में लाइव शोकेस, सम्मेलनों और व्यापार वार्ताओं के माध्यम से प्रौद्योगिकी, नीति निर्माताओं और उद्योग को एक साथ लाएंगे, जिससे विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अंतर्गत भविष्य के लिए तैयार, टिकाऊ और निर्यात उन्मुखी खाद्य विनिर्माण पारिस्थितिकी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता मज़बूत होगी।

