भगवान कृष्ण ने अग्रसेन से कहा यश, कीर्ति,धन तेरे पीछे चलेगा
महाराज अग्रसेन जी की 5180 वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में विशेष लेख 
नन्द किशोर जोशी, एक्जिक्यूटिव एडिटर, क्रांति ओडिशा मीडिया
दूसरी कड़ी
कल मैंने महाराज अग्रसेन जी की 5180 वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में विशेष लेख आरंभ किया था।आज उसकी दूसरी कड़ी है।कल महाराज अग्रसेन जी की 5180 वीं जयंती समारोह है ।इसे धूमधाम से सारे भारत ही नहीं पूरे विश्व में मनाया जारहा है।
महाराज अग्रसेन जी के युवावस्था में महाभारत युद्ध आरंभ हुआ।राजा वल्लभसेन के दरबार में पांडवों के दूत आये और युद्ध में शामिल होने के लिए बोले।शस्त्र धर्म के नाम पर पिता बल्लभसेन एवं पुत्र अग्रसेन शामिल हुए युद्ध में पांडवों के पक्ष में युद्ध करने ।
कृष्ण का सान्निध्य मिलेगा युद्ध में ऐसी चाहत थी अग्रसेन जी की। महाराज अग्रसेन ने युद्ध भूमि में गीता सुनी कृष्ण भगवान जब बोल रहे थे अर्जुन से।
भीष्म पितामह के बाणों के प्रहार से वल्लभसेन धराशाई हुए महाभारत युद्ध के मैदान में। अग्रसेन के कंधे पर युद्धिष्ठिर ने हाथ रखा। बोले तुमने मेरी आत्मा पर विजय प्राप्त कर ली है। कृष्ण भगवान ने अग्रसेन से कहा था कि यश, कीर्ति, धन तेरे पीछे चलेगा।
अग्रसेन युवा वस्था में भी परिपक्व थे।जीवन चुनौती मांगता है, अग्रसेन चाचा के आदेश पर बंदी बनाये गये। अग्रसेन को गुरु गर्ग मिले।गर्ग ऋषि अग्रसेन को बोले,यज्ञ करवाये। महालक्ष्मी ने आशीर्वाद दिया।गुरु कृपा से छोटा राज्य बन गया। अग्रोहा वीर भूमि है , अग्रोहा धाम है।घर -घर अग्रोहा,पग-पग पर अग्रसेन।
शिव पार्वती का अभिषेक किये अग्रसेन।शिव पार्वती का एकांत संवाद ही राम कथा है।शिव पार्वती के अंश हैं हनुमानजी। अनेकों परीक्षाएं ली गई अग्रसेन की।अपनी गृहस्थी को समझिए। अग्रसेन ने शंकर पार्वती के दांपत्य को पूजा। क्रमशः

