महाराज अग्रसेन जी की 5180 वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में विशेष लेख  महाराज अग्रसेन श्रीराम जी के वंशज रहे , श्रीकृष्ण जी के समकालीन रहे

महाराज अग्रसेन जी की 5180 वीं जयंती समारोह के उपलक्ष्य में विशेष लेख

महाराज अग्रसेन श्रीराम जी के वंशज रहे , श्रीकृष्ण जी के समकालीन रहे

नन्द किशोर जोशी, एक्जिक्यूटिव एडिटर, क्रांति ओडिशा मीडिया

प्रथम कड़ी

 

आज से लगातार 3 कड़ियों में महाराज अग्रसेन जी की जीवनी पर मैं लिखूंगा। अनेक वर्षों से अनेक बार महाराज अग्रसेन जी के बारे में मुझे पढ़ने,लिखने,बोलने का मौका मिला है।उनके जीवन की अनेक बातें मुझे अच्छी लगी, उन्हीं बातों पर मेरी लेखनी फोकस करेगी।

 

महाराज अग्रसेन प्रभु श्रीराम के वंशज रहे, भगवान श्रीकृष्ण के समकालीन रहे।

 

महाराज अग्रसेन जी ने 5000 साल पहले रुढ़िवाद को मिटाने में अहम् भूमिका निभाई। धर्म को आजतक जिन लोगों ने बचाकर हमें दिया है , उनमें अग्रसेन जी प्रमुख रहे। द्वापर युग में हुए अग्रसेन जी, उसके बाद कलयुग आया। द्वापर युग में अनूठे कार्य किए अग्रसेन जी। कर्मयोग के अटल प्रणेता थे अग्रसेन जी। ईश्वर तुल्य महामानव थे अग्रसेन।

 

अग्रसेन उम्मीद का दूसरा नाम है।जीवन में तीन चीज है व्यापारी, पारिवारिक, सांसारिक। आंखें बोलतीं है तपस्वी की, महात्मा की।महान पितृ पुरुष का नाम अग्रसेन है । अग्रसेन पर रामजी , कृष्णजी,शिवजी, हनुमानजी,माता लक्ष्मीजी का प्रभाव पड़ा।

 

प्रभु राम के बेटे थे कुश और कुश के बेटे थे अग्रसेन। अर्थात अग्रसेन राम के वंशज थे।मूल रूप से इंसान कहीं न कहीं प्रगट होता है।अग्र भागवत पुस्तक में विस्तार से चर्चा है।इस पुस्तक के लेखक हैं राम अग्रवाल।जय भारत ग्रंथ से अग्रसेन का चरित्र मिलता है।

 

राजा परिक्षित का बेटा राजा जन्मेजय बना।परहित को स्वहित समझने वाले राजा अग्रसेन हैं।जय भारत ग्रंथ में अग्रसेन कथा आती है।परहित में स्वहित देखना वैश्य धर्म है। अग्रसेन जी की माता भगवती देवी ,पिता वल्लभ जी थे।माता भगवती देवी गर्भावस्था में राम को बराबर याद करती थी। इसलिए राम जैसे बालक अग्रसेन हुए।

 

ज्योतिषी बोले कि प्रतिभाशाली बालक है अग्रसेन। कर्तव्य,अधिकार के धनी थे अग्रसेन।उनका जीवन आगे चलता है ,ख्याति,यश, कीर्ति उनके पीछे चलती है। कीर्ति की पताका लहराती है,दूर से दिखती है। अग्रसेन जी काफी लोकप्रिय हो गये थे।

 

महाराज अग्रसेन जी खुशी-खुशी लोगों की समस्याओं का समाधान कर देते थे। दुनिया तेज दिमाग से चलती है,दिल से नहीं। रिश्तों को निभाना ही लाइफ मेनेजमेंट है।राम जी से मेनेजमेंट सीखीये। क्रमशः

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