लोक सभा अध्यक्ष, श्री ओम बिरला ने आज इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत 2047 के विज़न को जन भागीदारी, नवाचार, उद्यमशीलता और सामूहिक संकल्प से ही साकार किया जा सकता है। नई दिल्ली में माहेश्वरी समाज के राष्ट्रीय सम्मेलन की थीम “माहेश्वरी समाज और विकसित भारत 2047′ पर बोलते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उद्यमशीलता और राष्ट्र निर्माण दोनों साथ-साथ आगे बढ़ने चाहिए ताकि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। उन्होंने इस बात का उल्लेख भी किया कि एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत को समावेशी विकास, सामाजिक जिम्मेदारी और सक्रिय जन भागीदारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
माहेश्वरी समाज को भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास में एक जीवंत शक्ति बताते हुए, श्री बिरला ने कहा कि इस समाज ने सेवाभाव, नैतिक व्यावसायिक प्रथाओं, परोपकार और सामाजिक जिम्मेदारी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि माहेश्वरी समाज ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, जन सेवा और धर्मार्थ पहलों के माध्यम से समाज के कल्याण के लिए लगातार काम किया है। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि इस समाज ने पीढ़ी-दर-पीठी देश के विभिन्न क्षेत्रों में जन कल्याण के लिए समर्पित संस्थानों की स्थापना की है ।
लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से माहेश्वरी समाज ने स्वयं को परिस्थितियों के अनुसार ढालने की उल्लेखनीय क्षमता और उद्यमशीलता का परिचय देते हुए पूरे देश के विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। चाहे महानगरों के केंद्र हों, उत्तर-पूर्व हो या दक्षिण भारत, इस समाज के लोगों ने अपनी उद्यमशीलता से अवसर पैदा किए हैं, रोजगार उत्पन्न किया है और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, नैतिक आचरण और सामाजिक सद्भाव के प्रति इस समाज की प्रतिबद्धता ने व्यवसाय के क्षेत्र में में अनुकरणीय मानक स्थापित किए हैं।
श्री बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि सफलता का वास्तविक मापदंड केवल धन सृजन नहीं होना चाहिए, बल्कि वैल्यू क्रिएशन और सकारात्मक सामाजिक बदलाव होना चाहिए। श्री आनंद राठी की उद्यमशीलता की सराहना करते हुए उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि उनकी अनुकरणीय यात्रा युवा उद्यमियों की पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी के योगदान की भी सराहना की और कहा कि उनके प्रयासों ने न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने और न्यायिक सुधारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी प्रतिष्ठित हस्तियां इस समाज की उत्कृष्टता, नेतृत्व और जनसेवा की परंपरा को दर्शाती हैं।
भविष्य को आकार देने में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, श्री बिरला ने कहा कि शिक्षित, कुशल और प्रौद्योगिकी के ज्ञान से सम्पन्न युवा विकसित भारत 2047 की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने युवा पीढ़ी से आने वाले दशकों में भारत को एक वैश्विक लीडर के रूप में स्थापित करने के लिए नवाचार, उद्यमिता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आने वाला युग ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार द्वारा संचालित होगा, और युवाओं से जॉब सीकर्स बनने के बजाय जॉब क्रिएटर्स बनने का आह्वान किया।
अध्यक्ष महोदय ने आगे कहा कि पिछले दशक में भारत की प्रगति ने राष्ट्र की दृढ़ता, आत्मविश्वास और सामूहिक संकल्प को प्रदर्शित किया है। उन्होंने अधिकारों और कर्तव्यों के संतुलन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र निर्माण के लिए जिम्मेदार नागरिक बनना, संस्थानों का सम्मान करना, ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद और लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से किए गए सुधारों से पारदर्शिता को बढ़ावा मिला है और देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार हुआ है।
अपने संबोधन के अंत में, श्री बिरला ने विश्वास व्यक्त किया कि एकता, सेवा, उद्यमिता की भावना और ‘नेशन फर्स्ट’ (राष्ट्र प्रथम) का सिद्धांत भारत को विकसित भारत 2047 के विज़न को प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने माहेश्वरी समाज, विशेष रूप से इसके युवाओं से नवाचार, नैतिक नेतृत्व और सामाजिक प्रतिबद्धता के माध्यम से राष्ट्रीय विकास में योगदान देना जारी रखने का आह्वान किया। श्री बिरला ने यह भी कहा कि एक विकसित भारत का निर्माण तभी किया जा सकता है जब प्रत्येक नागरिक देश की प्रगति में भागीदार बने और जब आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी और सबके कल्याण की भावना का समावेश भी हो।

