भारत के बड़े मीडिया हाउस, पिछले अनेक वर्षों से भारत विरोधी, सनातन विरोधी होरखे हैं
नन्द किशोर जोशी
एक्जिक्यूटिव एडिटर, क्रांति ओडिशा मीडिया
प्रथम कड़ी
कल मैंने टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के बारे में लिखा था।आज मैं भारत के अन्य तीन बड़े मीडिया हाउस के बारे में लिख रहा हूं।ये ग्रुप हैं इंडियन एक्सप्रेस, हिन्दू एवं आनन्द बाजार पत्रिका।
इनमें सर्वप्रथम मैं इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप प्रकाशन के बारे में लिख रहा हूं। इंडियन एक्सप्रेस के मालिक थे रामनाथ गोयनका।इनका राजस्थान का गांव और मेरा गांव संयोग से एक ही है । गांव का नाम है मंडावा,यह झुंझुनूं जिले में आता है।मेरे घर के पास ही इनका घर है।
रामनाथ गोयनका का नाम भारतीय पत्रकारिता में बड़े आदर से लिया जाता है।इनके नाम से पत्रकारिता क्षेत्र में एक बड़ा प्रतिष्ठित एवार्ड हर साल इनके उत्तराधिकारियों की तरफ से दिया जाता है।इसी ग्रुप का हिंदी अखबार है जनसत्ता।
इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी में सर्वाधिक प्रताड़ना इसी इंडियन एक्सप्रेस अखबार को दी थी।सेंसरशीप अखबारों पर लगायी थी।इस अखबार का बिजली कनेक्शन सबसे पहले दिल्ली में काटा गया था।रामनाथ गोयनका स्वाधीनता सेनानी थे। अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन कर जेल भी गये थे। गोयनका बड़े स्वाभिमानी,देश भक्त थे।
उन्होंने इमरजेंसी में इंदिरा गांधी की एक भी नहीं सुनी। खुलकर इंदिरा, इमरजेंसी का विरोध किया।अखबार को सरकारी एड बंद हुई। न्यूज सही होने पर भी छापने पर पाबंदी थी। लेकिन सरकार के सामने गोयनका कभी झुके नहीं।
इसी अखबार में भारत के प्रतिष्ठित संपादक गण काम किए हैं। इनमें कुलदीप नैयर, अरुण शौरी इत्यादि।एक बार अरुण शौरी के समय चौधरी देवीलाल भारत के उपप्रधान मंत्री थे। उन्होंने अरुण शौरी को धमकी भरे लहजे में फोन पर बोला कि हम बनिया नहीं हैं,हम व्यापार नहीं करते , सौदेबाजी नहीं करते । हमारी न्यूज हमारे हिसाब से छापो इत्यादि। देवीलाल की भाषा में धमकी के साथ साथ गाली-गलौच बहुत थी।
साहसी , निडर संपादक अरुण शौरी ने ज्यूंकी त्यूं देवीलाल की भाषा को इंडियन एक्सप्रेस अखबार में दूसरे दिन छाप दिया फ्रोंट पेज पर। भारतीय पत्रकारिता क्षेत्र में इंडियन एक्सप्रेस की प्रतिष्ठा और भी बढ़ी तथा अरुण शौरी की भी प्रतिष्ठा संपादक के हिसाब से बढ़ी।ऐसे निडर अखबार,ऐसे निडर संपादक और ऐसे निडर अखबार के सेठ उस जमाने में हुआ करते थे।
इसी ग्रुप का हिंदी अखबार था जनसत्ता। वरिष्ठ पत्रकार प्रभाष जोशी इसके संपादक हुआ करते थे। उन दिनों इंदिरा ने अपने छोटे बेटे संजय गांधी को गुड़गांव में भारत की पहली छोटी कार बनाने की लाइसेंस देरखी थी, जापानी कंपनी सुजुकी के साथ पार्टनरशिप में।
इस नयी कंपनी का नाम मारुति सुजुकी पड़ा। चूंकि इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप भारत में खोजी पत्रकारिता का जनक माना जाता है, अतः इस ग्रुप के हिंदी अखबार जनसत्ता में प्रकाशित सभी खबरों का भी बहुत असर होता था पाठकों पर, सरकार पर।
एक दिन की बात है जनसत्ता के संपादक प्रभाष जोशी के पास खबर आयी कि मारुति सुजुकी इंडस्ट्री में बहुत बड़े घपले हुए हैं। इंदिरा गांधी की सरकार ने सारे सरकारी नियम कानून को तोड़कर संजय गांधी की कंपनी को बहुत ज्यादा लाभ कराया है।संपादक प्रभाष जोशी ने बिना सेठ रामनाथ गोयनका से परामर्श कर पूरी छानबीन वाली खोजी पत्रकारिता की खबर छाप दी ।
दूसरे दिन संसद में इस खबर का जबरदस्त असर हुआ। इंदिरा गांधी बैकफुट पर आयीं। विपक्षी सारे सरकार पर हावी हो गये। सरकारी पक्ष में सन्नाटा छा गया। सरकार को, कांग्रेस पार्टी को जबरदस्त परेशानी झेलनी पड़ी।
वहीं बाद के जमाने में इंडियन एक्सप्रेस में मनमोहन सिंह के जमाने में खबर छपी थी कि भारत की सेना आगरा से दिल्ली कूच कर गई है।भारत में जल्द सैन्य तख्तापलट होने वाला है ।उस समय जेनरल वी के सिंह सेनाध्यक्ष थे। सोनिया उनको पसंद नहीं करती थी। इंडियन एक्सप्रेस के संपादक शेखर गुप्ता थे,सो इंडियन एक्सप्रेस में ऐसी बेतुकी, मनगढ़ंत कहानी फ्रोंट पेज पर छप गई थी, सोनिया के इशारे पर।
हमारा देश भारत है, पाकिस्तान नहीं है, यहां आजतक कभी भी सैन्य कार्रवाई से तख्तापलट नहीं हुआ है,जैसा पाकिस्तान, बंग्लादेश में होता रहता है। लेकिन शेखर गुप्ता ने इंडियन एक्सप्रेस में 100% झूठी खबर फ्रोंट पेज पर छापदी।
इसी से साफ मालूम होता है कि इंडियन एक्सप्रेस 1975-77 इमरजेंसी के समय क्या था, तत्पश्चात 1989-90 में देवीलाल के समय क्या था, तत्पश्चात 2013 में मनमोहन सिंह के समय क्या होगया था।
अब मैं आज 2026 के इंडियन एक्सप्रेस के बारे में लिखता हूं।आज इंडियन एक्सप्रेस संपूर्ण रुप से भारत , सनातन विरोधी अखबार होगया है। सोनिया गांधी के लेख बीच-बीच में छापता है। सोनिया चीन के इशारे पर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर बराबर इसी अखबार में लेख देती है और इंडियन एक्सप्रेस भारत के स्वार्थ के खिलाफ चीन के एजेंडे की पूर्ति के लिए छापता है। हमारा दुश्मन देश चीन कभी नहीं चाहता कि भारत अंडामान निकोबार द्वीप समूह में फौजी एक्टिविटी बढ़ाये।भारत की फौजी एक्टिविटी वहां बढ़ने पर आनेवाले समय में चीन को काफी दिक्कतें आ सकती हैं। इसलिए अपने आका चीन को खुश करने के लिए सोनिया गांधी भारत विरोधी लेख अखबार में लिखती है और सोनिया को खुश करने के लिए इंडियन एक्सप्रेस उन लेखों को बराबर छापती रहती है।
सो फर्क साफ दिखाई देता है राष्ट्रवादी से राष्ट्रविरोधी लेखन में।आज भारत के अनेक प्रतिष्ठित अखबारी मीडिया हाउस इसी श्रेणी में आते हैं, इसीलिए इनपर से लोगों का विश्वास घटता गया और घटता ही जा रहा है दिनों दिन। क्रमशः


