कटक, भारतीय संस्कृति के उत्थान में सन्त महात्माओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्तमान युग में इस संत संस्कृति संवर्धन के सोद्देश्य तेरापंथ भवन,कटक में मुनिश्री मोहजीतकुमार जी ठाणा 3 के सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद के तत्वावधान में तेरापंथ किशोर मंडल, कटक द्वारा A Day Like Monk का अनुठा आयोजन हुआ। जिसमें 27 सदस्यों ने भाग लेकर अपने आप को साधुचर्या से सम्बद्ध किया।
प्रातःकाल सूर्योदय के साथ ही मुनिश्री मोहजीतकुमार जी ने सभी साधको को साधना की उपसम्पदाओं से संकल्पित करवाया। सभी साधक मुनि वेशभूषा में रहें ।। साधक संरक्षक श्री अशोक बरलोटा ने संभागी साधकों को रजोहरण प्रदान किया। मुनि जयेशकुमार जी ने भगवान महावीर द्वारा उल्लेखित साधुचर्या की तरह सभी साधकों को पूर्ण जागरूकता के साथ पूरा दिन बिताने की प्रेरणा दी। उसके पश्चात मुनि भव्य कुमार जी ने 7 साधक लीडरों की नियुक्ति कर उनके साथ अन्य साधको का नियोजन किया, वे सभी साधक लीडरों के दिशानिर्देश में संलग्न रहे।
मुख्य प्रवचन में मुनि श्री मोहजीतकुमार जी ने कहा कि साधना के प्रति अंतर का भाव जागृत होने पर साधना फलीभूत हो जाती है। संभागी साधकों के साथ सब उपस्थित श्रावक समाज को विशेष पाथेय प्रदान करते हुए, मुनिवर ने कहा कि हमारी देव, गुरु, धर्म के प्रति श्रद्धा सघन हो, आस्था अटूट होने पर हम परम की प्राप्ति कर सकते है।
इस अवसर पर मुनि जयेश कुमार जी ने कहा संकल्पों से परिपूर्ण बनने से साधना शिखर चढ़ती है। आपकी की यह साधना एक दिन की ही नहीं, अपितु जीवन भर की बने। हर प्रवृत्ति में सजग रहे। वीतरागता की दिशा में आगे बढ़े। साधना का सत्व बढ़ता रहे।
मध्याह्न में मुनि श्री मोहजीतकुमार जी के केश लुंचन का दृश्य सभी साधकों ने अपनी आँखों से निहारा। संध्या गुरु वन्दना, प्रतिक्रमण, अर्हत वंदना के पश्चात A Journey of Being Monk (Part 2) उपक्रम में मुनि जयेशकुमार जी ने अपने दीक्षा पश्चात साधना यात्रा का वृत्तांत सुनाया। पावरप्वाइंट प्रेजेंटेशन में चित्र, वीडियो के साथ उनकी यात्रा को देखकर पूरी जनमेदिनी भाव विभोर हो गई।
रात्रि में साधकों ने अनुष्ठान आत्मनिरीक्षण, आत्मदर्शन के प्रयोग करने के पश्चात शयन किया। प्रातःकाल बह्म मुहूर्त में सभी ने रात्रिक प्रतिक्रमण कर गुरु वन्दना की। प्रतिलेखन के पश्चात सूर्योदय के समय मुनिप्रवर ने मंगल पाठ के साथ साधना परिसम्पन्नता की घोषणा की। इस साधना क्रम में किशोर मंडल व युवक परिषद के अनेक कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा।
साधकों की गोचरी व्यवस्था में महिला मंडल कटक की बहनों का भावपूर्ण योग रहा।

