शिवछत्रपति के शुद्धीकरण अभियान को 350 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर ‘राष्ट्रीय शुद्धीकरण दिवस’ संपन्न; सोलापुर में 5 लोगों का हिंदू धर्म में विधिवत पुनर्प्रवेश!

गजवा-ए-हिंद’ का प्रखर विरोध कर ‘भगवा-ए-हिंद’ साकार करने हेतु हिंदू संगठित हों! – श्री. सुनील घनवट

 

सोलापुर : छत्रपति शिवाजी महाराज ने सरसेनापति नेताजी पालकर का शुद्धीकरण कर हिंदू समाज के समक्ष एक नया आदर्श स्थापित किया। आज भी धोखाधड़ी, प्रलोभन और ‘लव जिहाद’ के माध्यम से हो रहे धर्मांतरण को रोकने के लिए समाज को संगठित होना चाहिए। हमें केवल इतिहास पढ़ने वाला नहीं, बल्कि इतिहास रचने वाला सैनिक बनना चाहिए। प्रत्येक हिंदू को ‘गजवा-ए-हिंद’ का प्रखर विरोध कर ‘भगवा-ए-हिंद’ साकार करने का दृढ़ संकल्प लेना चाहिए, *यह प्रखर आवाहन हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्य संगठक श्री. सुनील घनवट ने किया।

 

राष्ट्रीय शुद्धीकरण दिवस के अवसर पर हिंदू जनजागृति समिति और हिंदू राष्ट्र सेना के संयुक्त तत्वावधान में अशोक चौक स्थित लोटस मल्टीपर्पज हॉल में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में वे बोल रहे थे। इस वर्ष हिंदवी स्वराज्य के दूसरे सरसेनापति नेताजी पालकर के शुद्धीकरण (घरवापसी) को तिथिनुसार 350 वर्ष पूर्ण होने की पृष्ठभूमि में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। *विशेष बात यह है कि इस ऐतिहासिक दिन के उपलक्ष्य में सोलापुर में हिंदू धर्म छोड़कर अन्य धर्मों में गए 5 लोगों ने स्वेच्छा से और विधिवत रूप से हिंदू धर्म में पुनर्प्रवेश किया। इसके साथ ही, हिंदू जनजागृति समिति ने समस्त हिंदू समाज से इस दिन को ‘राष्ट्रीय शुद्धीकरण दिवस’ के रूप में मनाने का आवाहन किया।

इस अवसर पर श्री. घनवट ने आगे कहा कि धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज ने धर्म के लिए अमानवीय अत्याचार सहकर बलिदान दिया, परंतु परधर्म स्वीकार नहीं किया। वही अडिग निष्ठा प्रत्येक हिंदू को अपनानी चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि धर्मांतरित हिंदुओं को सम्मानपूर्वक स्वधर्म में वापस लाने के लिए हमारे द्वार सदैव खुले रहने चाहिए।

 

हिंदू राष्ट्र सेना के श्री. रवि गोणे ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि धर्मांतरित हिंदुओं को वापस स्वधर्म में लाने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रबोधन को समाज से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। आज भी कई धर्मांतरित व्यक्तियों की हिंदू धर्म में वापस लौटने की इच्छा है; उन तक पहुंचकर उन्हें सम्मानपूर्वक स्वधर्म में लाने के लिए सभी को संगठित रूप से प्रयास करना चाहिए।

सामाजिक विश्लेषक तथा लेखापरीक्षक श्री. सर्वेश मेंहदले ने कहा कि* बड़े पैमाने पर हो रहे धर्मांतरण के कारण कई क्षेत्रों में बहुसंख्यक हिंदू समाज दुर्भाग्यवश आज अल्पसंख्यक होता जा रहा है। यह केवल एक धार्मिक मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्र और धर्म के अस्तित्व पर हुआ एक अत्यंत गंभीर आघात है। इस चुनौती को रोकने के लिए हिंदू समाज को अब अधिक सतर्क, संगठित और सक्रिय होना समय की मांग है।

 

इस कार्यक्रम में श्रीक्षेत्र तुलजापुर के महंत मावजीनाथ महाराज ने कहा, “स्वधर्म में मृत्यु भी कल्याणकारी है, परंतु परधर्म में जाना जीवन के लिए अत्यंत घातक है, ऐसा श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित है। हिंदू धर्म में मोक्ष और मुक्ति की संकल्पना है। केवल इसी धर्म में मुक्ति मिल सकती है। इसलिए हिंदुओं को अपने धर्म की महानता को जानकर धर्मांतरित होने वालों का प्रबोधन करना चाहिए और उन्हें स्वधर्म में ही बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।” इस अवसर पर प्रज्ञापुरी ज्ञानपीठ के पीठासीन धर्माधिकारी श्री. प्रसाद पंडित ने भी उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन किया।

 

‘भगवा-ए-हिंद’ का संकल्प!

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज और धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज से प्रेरणा लेकर धर्मरक्षा के लिए कार्य करने का दृढ़ निश्चय व्यक्त किया। जब तक परधर्म में गया प्रत्येक हिंदू सम्मानपूर्वक स्वधर्म में वापस नहीं आ जाता, तब तक जागृति, संगठन और शुद्धीकरण का कार्य और अधिक गति से आगे बढ़ाने का संकल्प इस अवसर पर लिया गया।

 

 

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