जंतर-मंतर पर हिंदू देवताओं का अपमान और ‘हेट स्पीच’

कुणाल कामरा और प्रकाश राज पर एफआयआर दर्ज करे !- हिन्दू जनजागृति समिति एवं सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की मांग

नई दिल्ली : जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और सोनम वांगचुक के नेतृत्व में नीट (NEET) मुद्दे को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के मंच से खुलेआम सनातन धर्म का अपमान और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने का गंभीर मामला सामने आया है। इसके विरुद्ध आज सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं और ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराते हुए एफआयआर (FIR) की मांग की है।

यह शिकायत संसद मार्ग थाने के थानाध्यक्ष (SHO) को प्रत्यक्ष रूप से सौंपी गई। शिकायत दर्ज कराने वाले इस प्रतिनिधिमंडल में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एड. मकरंद डी. अडकर, एड. अमिता सचदेवा, एड. मयंक द्विवेदी, एड. अतुल शर्मा, एड. पार्थ यादव, एड. यादवेंद्र सक्सेना, एड. केशरी सत्या तथा हिन्दू जनजागृति समिति के प्रतिनिधि श्री कार्तिक सालुंखे व श्री श्रीराम लुकतुके उपस्थित थे।

शिकायत के कहा है की, स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने मंच से ‘‘ये सरकार सालो सें सीता के पति (राम) का नाम लेकर नीता के पति (मुकेश अंबानी) का काम कर रही है’’ जैसी आपत्तीजनक एवं अपमानजनक टिप्पणी कर 100 करोड़ हिंदुओं की आस्था पर चोट की है। मंच से एक महिला द्वारा ‘‘सब बुत (मूर्ति) उठवाए जाएंगे… बस नाम रहेगा अल्लाह का’’ गीत गाया गया, जो सीधे तौर पर सनातन धर्म की मूर्तिपूजा को खत्म करने की एक भड़काऊ व हिंसक घोषणा है। इस छात्र मंच पर ‘सिमी’ जिसे भारत सरकार ने आतंकी गतिविधियों के कारण बैन किया है उस के पूर्व सदस्य और दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास उपस्थित थे। अभिनेता प्रकाश राज ने मंच से युवाओं को भड़काते हुए ‘‘आतंकवादी और पाकिस्तानी’’ शब्दों का महिमामंडन किया और युवाओं को व्यवस्था के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए उकसाया।

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि यह छात्रों का नहीं, बल्कि वामपंथी और कट्टरपंथी इस्लामवादियों का देशविरोधी एजेंडा है। शिष्टमंडल ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘हेट स्पीच’ (शाहीन अब्दुल्ला बनाम भारत संघ) के मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए, पुलिस से उसी के अनुसार स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है। वकीलों और समिति ने इन सभी आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS, 2023) की धारा 299, 196, 152 और 353 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। इसके साथ ही इस पूरे आंदोलन की फंडिंग और सिमी के तार जुड़े होने के कारण युएपीए(UAPA) के तहत भी जांच करने की अपील केंद्रीय गृह मंत्री और दिल्ली पुलिस आयुक्त से की गई है।

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