कटक, आज निर्जला एकादशी व्रत है। प्रवचन में इंद्रेश जी महाराज बोले कि निर्जला ,भीम एकादशी के शुभ दिन पर लोग प्रार्थना करते हैं, निर्जला व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु का आशीर्वाद मांगते हैं।इस एकादशी का व्रत करने से धर्म,अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है,इस दिन व्रत करने से वर्ष भर की सारी एकादशी का फल प्राप्त होता है। जजमान गुप्ता परिवार एवं एसजिबिएल ग्रुप की तरफ से आयोजित श्रीमद्भागवत कार्यक्रम में लोगों को रस आने लगा है। सर्वप्रथम गुप्ता परिवार की तरफ से जजमान सज्जन गुप्ता ने श्रीमद्भागवत महापुराण ग्रंथ की पूजा की। व्यासपीठ पर विराजमान इंद्रेश जी महाराज एवं मंच पर उपस्थित सभी संतों से आशीर्वाद लिया , तत्पश्चात कथा शुभारंभ हुई।

अतः जो साधक वर्ष की समस्त एकादशियों का व्रत कर पाने में असर्मथ हों, उन्हें निर्जला एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए।व्रत के चार फल बताये गये हैं धर्म, अर्थ,काम,मोक्ष।

एकादशी में अन्न नहीं खाना चाहिए। एकादशी में अन्न खाने से पाप लगता है। केवल फलाहार करना चाहिए। वैष्णवों की करवाचौथ है एकादशी। पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर में लक्ष्मी जी के छू लेने से अन्न,अन्न नहीं रहता, महाप्रसाद की प्रक्रिया शुरू होती है। जगन्नाथ महाप्रभु के पास भोग लगाया जाता है, तत्पश्चात माता बिमला के पास भोग लगाया जाता है एवं इसके फलस्वरुप प्रसाद महाप्रसाद का रुप लेता है। जगन्नाथ पुरी में एकादशी के दिन महाप्रसाद पाना चाहिए।होसके तो बिना जल के या मजबूरी में जल के साथ एकादशी करना चाहिए।

मनुष्यों को जीवित अवस्था में ठाकुरजी का स्मरण करना चाहिए। खूब भजन करो, खूब मनन करो।संसार की कोई भी वस्तु हर दिन सुख नहीं देती , निभाना पड़ता है। ज्यों ज्यों हमारी उम्र बढ़ती जाती है, आनंद में क्रमशः कमी होती जाती है।मन उबजाये उसकी प्रतीक्षा मत करो, हमेशा आनंद देने वाले कार्य करो, जिससे मन प्रसन्न रहे।

सुकदेव जी ने राजा परिक्षित को भक्ति की बात सुनायी।जड भरत के प्रसंग पर भी बोले। भक्तों के चरण रज को प्रणाम करो। वैष्णव वेश धारी कोई भी हो प्रणाम करो। ठाकुरजी की कृपा से भगवत प्रेम आयेगा।

