तीसरा दिन : हनुमान चालीसा और जीवन प्रबंधन तीन दिवसीय हनुमत कथा के समापन पर बोले जीवन प्रबंधन गुरु पं. मेहता हनुमान चालीसा में छिपे हैं जीवन प्रबंधन के सूत्र

 

उज्जैन। गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित हनुमान चालीसा कोई साधारण पंक्तियां नहीं हैं। इसका एक-एक शब्द, एक-एक पंक्ति दिव्य और अभिमंत्रित है जिसमें जीवन की समस्याओं के समाधान और जीवन प्रबंधन के सूत्र छिपे हैं। हनुमान चालीसा को जीवन से जाड़ लिया जाए तो लगता हर पल, हर कदम पर हनुमानजी हमारे साथ हैं। और जब हनुमानजी के रूप में एक दिव्य शक्ति का सहारा हो तो फिर जीवन में संकट, परेशानी, तनाव, हताशा, निराशा और अशांति का कोई स्थान नहीं होता।

यह बात जीवन प्रबंधन गुरु पं. विजयशंकर मेहता ने यहां स्थानीय शहिद भवन पर चल रही चार दिवसीय हनुमत कथा के अंतिम दिन 13 जून को ‘हनुमान चालीसा और जीवन प्रबंधन’ विषय पर बोलते हुए कही।

 

जीवन को सहज और आनंदमय बनाने का सूत्र बताते हुए कहा किसी भी क्षेत्र में मनुष्य तीन मार्गों ज्ञान, कर्म और उपासना पर चलकर अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकता है। जीवन जीने की दो शैली हैं व्यवहार से जीना और स्वभाव में जीना। व्यवहार से जीने से संसार और स्वभाव से ईश्वर की प्राप्ति होती है। इन दोनों का संतुलन होना चाहिए, इसी का नाम जीवन प्रबंधन है।

ध्यान का महत्व बताते हुए कहा- हर प्रकार के तनाव व अवसाद का सबसे प्रभावी, सरल और सस्ता उपचार है ध्यान। यूं तो ध्यान की कई विधियां हैं परंतु यदि हनुमान चालीसा से मेडिटेशन किया जाए तो अद्भुत परिणाम प्राप्त होते हैं। आयोजक संस्था के श्री …. ने बताया कथा के समापन दिवस पर …… आदि सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।

14 जून को सुबह 10 बजे से 11 बजे तक हनुमान चालीसा से मेडिटेशन कोर्स का विशेष सत्र है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *