एक बंदर बहुत सुंदर,जिसके अंदर सियाराम चंद्र,यह कथा बड़ी सुंदर –  सुंदरकांड प्रबंधन के सूत्र : कथा व्यास पंडित विजय शंकर जी मेहता 

एक बंदर बहुत सुंदर,जिसके अंदर सियाराम चंद्र,यह कथा बड़ी सुंदर –

सुंदरकांड प्रबंधन के सूत्र : कथा व्यास पंडित विजय शंकर जी मेहता

नन्द किशोर जोशी

एक्जिक्यूटिव एडिटर

क्रांति ओडिशा मीडिया

 

हनुमान जी बहुत सुन्दर हैं, इसलिए संत तुलसीदास ने सुंदरकांड में हनुमानजी पर पूरा वर्णन किया है।एक बंदर बहुत सुंदर, जिसके अंदर सियाराम चंद्र,यह कथा बड़ी सुंदर। जीवन में अगर सब खोजाये , लेकिन हनुमानजी को बचाकर रखना,तब भगवान रामचन्द्रजी चलके आयेंगे। हनुमानजी बोले कि जब तक मैं औषधी नहीं लाऊंगा,तबतक सूर्य नहीं उगेगा कल ।जीवन में हनुमान हैं तो लक्ष्मण लौट आए।कभी कभी सफलता सामने खड़ी है, लेकिन सफलता पीछे रह जाती है।

 

हमेशा कार्य में मन से लगा रहना चाहिए ,हनुमानजी जैसे जड़ी-बूटी खोज में लगे रहे। हनुमान जी फेमिली मेनेजमेंट के बहुत बड़े ज्ञाता हैं।रावण केवल हनुमानजी से डरा।जिस रावण ने सारी दुनिया को डिप्रेशन में डाला,उसे हनुमानजी ने डिप्रेशन में डाला।

 

जय जय जय हनुमान गोसाईं,कृपा करहु गुरुदेव की नाईं। हमारे हनुमान तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस के माध्यम से हमें दिये।सफलता के सूत्र सुंदरकांड में हैं। दुनिया में सर्वाधिक पढ़ने वाला सुंदरकांड ही है, लोकप्रिय है।एक रात का खेल है सुंदरकांड।एक रात में हनुमानजी लंका गये, आये,तब से हनुमानजी लोकप्रिय हुए,पूजे गए, रामदूत कहलाए।

 

हमारी सारी अशांति का कारण हम खुद हैं। जीवन में सुख हो , शांति न हो तो जीवन बेकार है।सुख के साथ शांति का नाम सुंदरकांड है। शांति मिलती है मेहनत करने से, पुरुषार्थ करने से ,आज के बच्चे ऐसा सोच भी नहीं सकते एश्वर्य देख कर कि हमारे बाप ,दादा ने कैसे कैसे मेहनत, मशक्कत कर इतना सबकुछ किया है। सुंदरकांड शोर और शांति के बीच का मामला है। सुंदरकांड पाठ में पहले खंड में हनुमानजी बोलते हैं, दूसरे खंड में हनुमानजी कुछ बोलते ही नहीं। सुंदरकांड पाठ को चार भागों में समझना चाहिए। संघर्ष करें, सक्रियता रखें, तन्मयता रखें, एकाग्रता रखें।

 

सुख के साथ शांति हो तो जीवन सुंदर है।अगर जीवन को सुंदर बनाना है तो शांति लाइये। जीवन सुंदर करना हो तो बड़ी मेहनत करनी पड़ती है। जामवंत के वचन सुहाए … इन्हीं 6 लाइनों में सुंदरकांड का पूरा सारांश छिपा है। तुलसीदास जी बोलते हैं कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए घर के बुजुर्गौ का आशीर्वाद लेना चाहिए।जिस घर में बुजुर्ग पूजे गए, वहां बच्चे अवश्य आगे बढ़ेंगे। अकारण भी घर के बुजुर्गौ के पास बैठना चाहिए।पूजा नहीं करने पर भी भगवान आपको आशीर्वाद दे देते हैं।

 

हनुमान जी का मानना है कि जीवन में दुख तो आयेगा, जीवन में ऐसा कोई सुख नहीं जो बिना दुख के आया हो,ऐसे ही ऐसा कोई दुख नहीं जो बिना सुख के आया हो। हनुमानजी बच्चों को कहते हैं बुजुर्गों की सुनो ,एक कान से सुनकर दूसरे कान से मत निकालो । हनुमानजी बुजुर्गों को कहते हैं समय के हिसाब से बदलो, एडजस्ट करो।

 

कोई भी काम करो हर्ष के साथ करो। दबाव तो होगा, तनाव में मत आवो। डिप्रेशन में भक्तों को नहीं आना चाहिए। प्रसन्न रहो , मुस्कुराते रहो हमेशा। हनुमान भक्त की पहचान हाथ में ताली , मुंह में मुस्कान।

 

लंकादहन पश्चात हनुमानजी के मुंह में प्रसन्नता थी ,उदासी नहीं। विनम्रता हनुमानजी से सीखनी चाहिए।आज थोड़ी सी सफलता से लोग नाचने लगते हैं, यहां हनुमानजी से सीखना चाहिए हम सब को।

 

छलांग लंबी लगाना है तो आधार मजबूत होना चाहिए।अगर बचपन संस्कारी है तो जिंदगी बर्बाद नहीं होगी।शरीर से चार कदम चलिए,मन चार लाख कदम चलता है। हनुमानजी डबल काम करते हैं, कहां समय ,उर्जा लगाना है

हनुमानजी से सीखना चाहिए।कभी भी टाइम वेस्ट नहीं करना चाहिए। प्रशंसा में झूठ देखो , निंदा में सच देखो ,यह हनुमानजी का उसुल है।

 

हनुमानजी को बेटा,बाप,भाई ,सखा बनाइये , फिर देखें कार्य अवश्य होगा।राखी के दिन एक धागा हनुमानजी को अवश्य चढ़ाइये। हनुमानजी रिश्ते निभाने वाले देवता हैं। जय-जय -जय हनुमान गोसाईं,कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।

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