32 बीमा कंपनियों के अंतर्गत कैशलेस इलाज की सुविधा देने के लिए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ने जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए

आयुर्वेद को स्‍वास्‍थ्‍य बीमा इकोसिस्‍टम की मुख्‍यधारा से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक स्‍वायत्‍तशासी संस्‍थान, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्‍थान (एआईआईए), नई दिल्ली ने 10 फरवरी 2026 को जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (जीआईसी) के साथ एक साझा मनोनयन समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए।

इस समझौते के साथ, एआईआईए को जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के तहत सभी 32 जनरल इंश्योरेंस कंपनियों की सूची में सम्मिलित कर दिया गया है, जिससे मरीज़ों को योग्य आयुर्वेद-आधारित सम्‍पूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य सेवा के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सकेगी।

समझौता ज्ञापन पर एआईआईए के निदेशक प्रो. (वैद्य) पी. के. प्रजापति और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के निदेशक (स्‍वास्‍थ्‍य) श्री सेगर संपतकुमार ने आयुष हेल्थ इंश्योरेंस पर एक्सपर्ट्स के कोर ग्रुप के चेयरमैन प्रो. बेजोन कुमार मिश्रा की मौजूदगी में औपचारिक रुप से हस्‍ताक्षर किए।

इस कार्यक्रम में प्रोफेसर (डॉ.) महेश व्यास, डीन (पीएचडी), प्रोफेसर (डॉ.) आर. के. यादव, डीन (पीजी), डॉ. अलका कपूर, निदेशक चिकित्सा सेवाएं (डीएमएस) और एआईआईए के अन्य वरिष्ठ संकाय सदस्य भी शामिल हुए।

इस अवसर पर, एआईआईए के निदेशक प्रोफेसर (वैद्य) पी. के. प्रजापति ने कहा कि इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के साथ, एआईआईए सामान्य बीमा परिषद से जुड़ी सभी 32 बीमा कंपनियों के तहत कैशलेस उपचार सेवाएं प्रदान करने योग्य हो गया है। उन्होंने आयुष मंत्रालय और पूरी एआईआईए टीम के निरंतर प्रयासों के लिए उनका आभार व्यक्त किया और कहा कि इस पहल से आयुर्वेद-आधारित स्वास्थ्य सेवा में पहुंच, सामर्थ्य और विश्वास में सुधार करके रोगियों को काफी लाभ होगा।

एआईआईए टीम को बधाई देते हुए, आयुष स्वास्थ्य बीमा पर विशेषज्ञों के कोर समूह के अध्यक्ष प्रोफेसर बेजोन कुमार मिश्रा ने कहा कि एआईआईए में कैशलेस इलाज की सुविधाओं से मरीज़ों का भरोसा बढ़ने, ज़्यादा लोगों तक पहुंच बढ़ने, संस्‍थागत विश्‍वसनीयता मज़बूत होने और मरीज़ों की संख्या बढ़ने और आयुष सम्‍पूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के लगातार बढ़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इस मौके पर, प्रो. मिश्रा ने आयुष इलाज के लिए इंश्योरेंस से जुड़ी मदद को आसान बनाने के मकसद से आयुष मंत्रालय की एक खास पहल के बारे में भी बताया। पहली बार, मंत्रालय ने बेनिफिशियरी को इंश्योरेंस से जुड़े सवालों के जवाब देने और आयुष इंश्योरेंस कवरेज के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद करने के लिए एक खास आयुष हेल्थ इंश्योरेंस हेल्पलाइन शुरू की है।

आयुष हेल्थ इंश्योरेंस हेल्पलाइन की जानकारी:

हेल्पलाइन नंबर: 1800-11-0008

समय: सभी कार्य दिवसों में सुबह 9:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक

हेल्पलाइन का मकसद हकदार बीमा लाभार्थी तक आसान पहुंच पक्का करना और बीमा-समर्थित आयुष हेल्थकेयर को बड़े पैमाने पर अपनाने को बढ़ावा देना है।

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद (एआईआईए) के बारे में

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तहत बना अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्‍थान (एआईआईए) आयुर्वेद का एक सबसे बड़ा संस्‍थान है, जो पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक तरक्की के बीच तालमेल बिठाता है। यह इंस्टीट्यूट कई विषयों में पोस्टग्रेजुएट और डॉक्टरेट प्रोग्राम देता है और आयुर्वेदिक दवाओं के अनुसंधान, दवाओं के विकास, मानकीकरण, गुणवत्‍ता नियंत्रण, सुरक्षा मूल्‍यांकन और वैज्ञानिक प्रमाणीकरण में सक्रिय रूप से लगा हुआ है।

एआईआईए में 200 बिस्‍तरों का रेफरल हॉस्पिटल है, जिसमें लेटेस्ट डायग्नोस्टिक सुविधाएं हैं और इसमें 25 स्पेशलिटी डिपार्टमेंट, 12 क्लिनिकल यूनिट और 8 इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च लैब हैं, जो एडवांस्ड पेशेंट केयर, टीचिंग और रिसर्च में मदद करती हैं। इंस्टीट्यूट में आयुर्वेद के ग्लोबल प्रमोशन और रिसर्च के लिए एक इंटरनेशनल कोलैबोरेटिव सेंटर भी है।

जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (जीआईसी) के बारे में

जनरल इंश्योरेंस काउंसिल एक कानूनी संस्था है जिसे इंश्योरेंस एक्ट, 1938 के सेक्शन 64सी के तहत बनाया गया है, और यह 2001 से इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (आईआरडीएआई) के अंतर्गत काम कर रही है। काउंसिल तेज़ी से बदलते बीमा माहौल में लोगों के हितों की रक्षा करते हुए उद्योग के तरीकों को नियंत्रित सुधारों के साथ कोऑर्डिनेट और अलाइन करने में अहम भूमिका निभाती है।

इस समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर होना भारत में समावेशी, एकीकृत और बीमा-समर्थित आयुर्वेदिक सम्‍पूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाने वाला कदम है, जो नेशनल हेल्थकेयर फ्रेमवर्क के अंदर आयुष प्रणाली को मज़बूत बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत बनाता है।

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