तपोभूमि मारवाड़ी क्लब में शिवमहापुराण से -नकल कभी असल नहीं होता,असल असल होता है। जिन्हें तूफ़ान से लडने की आदत है ,उसे समंदर भी रास्ता देता है, व्यासपीठ से बोले श्रीकांत जी शर्मा
नन्द किशोर जोशी, एक्जिक्यूटिव एडिटर क्रांति ओडिशा मीडिया
१३ वीं कड़ी

कटक, मैं लगातार तपोभूमि मारवाड़ी क्लब में आयोजित श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण पाठ की , तत्पश्चात संध्या समय शिवमहापुराण प्रवचन की रोज खबरें आपको दे रहा हूं। बहुतों ने इसे सराहा भी है,खुशी जाहिर की है। प्राचीन, ऐतिहासिक ख़बरें पाकर लाभान्वित हो रहे हैं।प्रभु श्रीराम जी की कृपा से मुझे भी आनंद ही नहीं रोज परमानंद की प्राप्ति हो रही है।प्रभु, मर्यादा पुरुषोत्तम राम के बारे में लिखना, देवों के देव महादेव के बारे में लिखना मेरे लिए जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है।
शिवमहापुराण प्रवचन के छठे दिन बालव्यास पंडित श्रीकांत जी शर्मा बोले कि नकल कभी असल नहीं होता ,असल असल होता है। भारतीय ऋषियों की संतानें हैं। सुसंस्कृत बनें, विकृत न बनें। जिन्हें तूफानों से लडने की आदत है,उसे समंदर भी रास्ता देता है।
भगवान श्रीकृष्ण ने पहले अर्जुन को शास्त्र सुनाया, फिर अर्जुन से शस्त्र उठवाया। सबसे बढ़िया मंदिर है मन मंदिर। मंदिर के दरवाजे बंद नहीं हैं,हमारी आंखें बंद हैं। मंदिर तो सब समय खुला है।हम भगवान शंकर के रुप हैं।
परमात्मा रुपी सूर्य निकला हुआ है। भगवान की करुणा में कोई कमी नहीं है। योग्यता में हमारे कमी रह गई है।उनकी पित्रता में कोई कमी नहीं है,पुत्रता में हमारी कमी है।
दुनिया में सबसे बड़ी ताकत है संकल्प की। पहाड़ों से भी ज्यादा ताकतवर है मनुष्य के संकल्प की। मनुष्य को उंचा उठने के लिए संकल्प की जरूरत होती है।
भगवान शंकर को रिझाने के लिए श्रावण मास में भक्तों का कांवड़ यात्रा में बारंबार बोलना होता है,बोलबम, हर हर बम । गांजा वाला पार करेगा,कंकड़ पत्थर पार करेगा,चीलम वाला पार करेगा। भगवान शंकर ऐसा सुनकर बड़े प्रसन्न होते हैं। शिवरात्रि में भी कांवड़ यात्रा होती है।
माता पार्वती ने प्रथम मिलन पर शिवजी से आग्रह किया राम कथा सुनाने को । शंकर भगवान अति प्रसन्न हुए। आंखों से अश्रु धारा निकल पड़ी।शिवजी बहुत देर तक रोते रहे। भगवान रामजी की पूरी कथा शिवजी के अंदर आगयी। भगवान शंकर ने माता पार्वती जी को राम कथा सुनायी। प्रथम मिलन में माता पिता ने हमें श्रीरामचरितमानस मानस दिया।अमर कथा श्रीमद्भागवत है। क्रमशः

