कपुरगौरं करुणावतारं
संसार सारं भुजगेन्द्र हारम्
शिवमहापुराण प्रवचन तपोभूमि मारवाड़ी क्लब से -११ वीं कड़ी
नन्द किशोर जोशी, एक्जिक्यूटिव एडिटर क्रांति ओडिशा मीडिया
आज मैं आपको शिवमहापुराण प्रसंग में शिव विवाह पर लिख रहा हूं।कल तपोभूमि मारवाड़ी क्लब में प्रवचन का पांचवां दिन रहा।कल प्रवचन में भक्तों की अपार संख्या रही। अंग्रेजी नये साल में भक्तों का महाशिवपुराण प्रवचन में तांता लगा रहा।
देवों के देव महादेव के विवाह का बहुत सुंदर वर्णन किया बालव्यास पंडित श्रीकांत जी शर्मा ने।आम भक्तों की धारणा है कि भगवान शिव देखने में सुंदर नहीं थे। हमेशा पहाड़ों पर रहते थे , तपस्या में तल्लीन रहते थे।
लोगों की धारणा को प्रवचक श्रीकांत शर्मा जी ने गलत साबित किया।वे बोले कपुर गौरंं करुणावतारं , संसार सारं भुजगेन्द्र हारम् का मतलब हुआ कि भोले बाबा भगवान शंकर बहुत ही सुन्दर,गौरवर्णी हैं,कपुर जैसा हैं। करुणा के अवतार हैं । भगवान शंकर सभी के हृदय में विराजमान हैं।
भगवान शिवजी की बारात में श्रृंगी,भृंगी ,भूत , प्रेत,डाकणी,सांकणी चले थे । भगवान शंकर बैल पर सवार होकर उल्टे बैठे थे।सारे देवगण बारात को देखने पहुंचे थे।दुल्हे शंकर के गले में सांप बैठा था। शंकर भगवान भस्म लगाए हुए थे।सास जंवाई राजा का वेश देखकर एकबार तो मूर्छित हो गयी ।
सास मैना को होश आया पार्वती को बोलीं कि तू ने चंदन को छोड़कर कीचड़ को गले लगाया है। पार्वती बोलीं कि मेरे भाग्य में यही दुल्हा लिखा है,मुझे यही दुल्हा पसंद है।
विष्णु भगवान बोले कि भगवान शंकर उपर्युक्त वर हैं।जब सृष्टि नहीं थी , भगवान शंकर थे।इस ब्रह्माण्ड में शंकर जैसा न कोई सुंदर था,न कोई होगा। कपुरगौरं करुणावतारं में शिव महिमा लिखी गई है।
भगवान शंकर हर पूर्णिमा के दिन गोलोक धाम में जाते हैं। वहां हर पूर्णिमा को रास होता है । ब्रह्माण्ड में पार्वती जैसी कोई दातार नहीं है।शिव ज्ञान का प्रकाश सबसे बड़ा प्रकाश है।

