कटक, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण के सुशिष्य मुनिश्री मोहजीत कुमार जी ने तेरापंथ भवन, कटक में 33 वें विकास महोत्सव पर विचार प्रकट करते हुए कहा कि आचार्य तुलसी ने तेरापंथ धर्मसंघ को अनेक कोणों से विकास की ऊंचाईयां प्रदान की। उन्होंने संघीय, सामाजिक, व्यावहारिक एवं आध्यात्मिक ऊंचाईयों के साथ अपनी शासना में अनेकानेक व्यक्तित्वों का निर्माण किया।
आचार्य तुलसी ने आगम सम्पादन के साथ संघ में प्राकृत, संस्कृत, हिन्दी और राजस्थानी के क्षेत्र में जो कार्य किया उसे शताब्दीयों तक भूलाया नहीं जा सकता। उन्होंने संघ के आन्तरिक विकास के लिए अनेक स्वप्न देखे तथा उन्हें साकार किया।
विकास महोत्सव के अवसर पर मुनि भव्यकुमार जी ने विकास के तथ्यों को गीत के माध्यम से प्रकट किया।
मुनि जयेश कुमार जी ने कहा कि विकास और विश्वास एक-दूसरे के पूरक हैं। जहां विश्वास की मजबूत नींव होती है, वहां विकास के नए मार्ग स्वतः प्रशस्त होते जाते हैं। विश्वास व्यक्ति को आगे बढ़ने का साहस देता है और विकास उस विश्वास को सार्थक दिशा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि आचार्य तुलसी को स्वयं पर, अपने संकल्पों पर और संघ की सामर्थ्य पर अटूट विश्वास था। इसी आत्मविश्वास, दूरदृष्टि और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने संघ को नई दिशा और नई गति प्रदान की। उनके नेतृत्व में संघ ने निरंतर प्रगति की और विकास के शिखरों को स्पर्श किया।
मुनिश्री ने आगे कहा कि विकास केवल गति का नाम नहीं, बल्कि उसकी दिशा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। हमारा विकास सम्यक दिशा में हो, यही अपेक्षा है। संघगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

