क्षमा लेना और देना हमारी संस्कृति

कटक, क्षमा का पर्व अतीत की भूलों को भूलने का महान पर्व है। यह पर्व मनोव्यवहार के परिष्कार का विशिष्ट पर्व है। क्षमा लेना और देना भावों को शुद्ध बनाने की प्रक्रिया है। ये विचार मुनि मोहजीत कुमार ने क्षमापना दिवस पर तेरापंथ भवन में प्रकट किए । मुनि ने कहा ‘क्षमा पर्व आया है अनुपम, आओ मन में क्षमा घरें, राग द्वेष को त्याग हृदय से, क्षमा मांग ले, क्षमा करें।

मुनि जयेश कुमार जी ने श्रावक समाज को क्षमाभाव का माहात्म्य समझाते हुए कहा कि पुरानी बातों को भूले या माफ किये बिना हम जीवन में आगे नहीं बढ़ सकते। कोई कहता है उस व्यक्ति ने मुझे इतने घाव दिए कि मै उसे कभी माफ नही कर सकता। यह हमारे हाथ में है कि घाव की पीड़ा को यूं ही झेलते रहना है अथवा क्षमा की मलहम लगा दुखमुक्त बनना है।क्षमा वो अमृत है जिसका पान वही कर सकता है जो भूलना जानता हो।

मुनि भव्य कुमार जी ने मैत्री गीत का भावपूर्ण संगान किया।

क्षमापना दिवस के अवसर पर मुनिवरों ने अपने धर्मगुरु का विनत भाव से गुणगान करते हुए अपने द्वारा हुई प्रमाद वश,अविनय आशातना के लिए भावपूर्ण खमत खामणा किया। इसी के साथ धर्म संघ के युवाचार्य प्रवर, साध्वीप्रमुखा, साध्वीवर्या एवं समस्त सन्तों व सतीयों से अपने द्वारा हुए प्रमाद के लिए खमत खामणा किया।

इस अवसर पर मुनि मोहजीत कुमार ने रास्ते की सेवा में संलग्न श्रावकों, सेवार्थीगणो कासीदों, परिभ्रमण के दौरान आए क्षेत्रीय श्रावक- श्राविकाओं एवं कटक तेरापंथ समाज , अन्य सभा, संस्थाएं जैन समाज तथा विभिन्न अवसरों पर मिलने बाल ‘राजनयिक, साहित्यकार, समाजसेवी आदि लोगों से खमत खामणा कर धर्मसंघ की प्रभावना में योग‌भूत बने।

कार्यक्रम में सभा संरक्षक मोहनलाल सिंघी सभाध्यक्ष मुकेश सेठिया ,भवन समिति अध्यक्ष चैनरूप चोरडिया, तेयुप अध्यक्ष शशि चोरडिया, मंडल अध्यक्षा सुनीता बैंगाणी, अणुव्रत समिति अध्यक्ष संतोष सिंघी ,किशोर मण्डल प्रभारी हर्ष चोपड़ा, कन्या मंडल संयोजिका उर्वशी चोपड़ा ने अपनी अपनी संस्थाओं की ओर से खमत खामणा किया।

समुपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने गुरुवर से, मुनिवरों से एवं सामुहिक रूप से खमत खामणा किया। इन क्षणों में थांस्यू म्हारा खमत-खामणा का उद्‌घोष जन-जन के मुख से उच्चरित हुआ।

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