इस्पात मंत्रालय ने ‘इनोप्रोम इंडिया 2026’ के तहत भारत मंडपम के हॉल 1 में ‘इंडिया स्टील पवेलियन’ की स्थापना की है। ‘इनोप्रोम इंडिया 2026’ भारत में आयोजित होने वाली रूस की प्रमुख औद्योगिक प्रदर्शनी है। यह प्रदर्शनी 9 से 11 सितंबर 2026 तक चलेगी।
“एक साथ मिलकर आगे बढ़ना – अनंत प्रगति के लिए” थीम वाले इस पवेलियन में भारतीय इस्पात क्षेत्र की ताकत, विकास की कहानी और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है। इस पवेलियन में इस्पात के क्षेत्र में भारत के वैश्विक महाशक्ति बनने की यात्रा को रेखांकित किया गया है। साथ ही, इसमें कोकिंग कोल, निकेल, विशेष प्रकार के इस्पात, अनुसंधान एवं विकास और इस्पात से जुड़ी उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में भारत और रूस के बीच सहयोग के इतिहास, मौजूदा गतिविधियों तथा भविष्य के अवसरों को भी प्रस्तुत किया गया है।

इस पवेलियन में सेल, एनएमडीसी, मॉयल और मेकॉन जैसे इस्पात मंत्रालय के प्रमुख केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हिस्सा ले रहे हैं। ये उपक्रम अपनी उपलब्धियों, तकनीकी क्षमताओं और इस्पात व खनन से जुड़ी मूल्य श्रृंखला में रूस के उद्योगों के साथ मौजूदा और भविष्य के सहयोग के अवसरों को प्रदर्शित कर रहे हैं।
इस प्रदर्शनी के दौरान, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सहयोग से भारत-रूस व्यवसाय संवाद के तहत भारत मंडपम के हॉल 2 में “इस्पात की मूल्य श्रृंखला में भारत-रूस सहयोग” विषय पर एक सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के सचिव श्री संदीप पौंड्रिक और रूसी संघ के उद्योग तथा व्यापार उप-मंत्री महामहिम श्री मिखाइल यूरिन ने की।
इस सत्र में रूस की प्रमुख इस्पात, खनन और धातुकर्म से जुड़ी कंपनियों, इस्पात मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, सेल, एनएमडीसी, मॉयल और मेकॉन जैसे केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के सीएमडी एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
इस सत्र में इस्पात क्षेत्र के महत्व पर जोर दिया गया, जो औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और मैन्यूफैक्चरिंग में प्रतिस्पर्धात्मकता का एक अहम आधार है। भारत और रूस के पास कच्चे माल की सुरक्षा, धातुकर्म से जुड़ी तकनीक, उत्पादन संबंधी क्षमताएं एवं डाउनस्ट्रीम अनुप्रयोगों सहित इस्पात मूल्य श्रृंखला में एक-दूसरे की पूरक ताकतें मौजूद हैं।
विचार-विमर्श में निवेश, तकनीक के आदान-प्रदान, टिकाऊ उत्पादन के तरीकों और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के जरिए इस्पात के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की गई। दोनों देशों के बीच बेहतर सहयोग से औद्योगिक आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिल सकता है, इस्पात के उन्नत उत्पादों में नवाचार को प्रोत्साहित किया जा सकता है तथा भारत और रूस के बीच गहरी व दीर्घकालिक आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी में योगदान दिया जा सकता है।

