आज पुण्य भूमि सनसाईन फिल्ड में गुप्ता परिवार, एसजिबिएल ग्रुप द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा यज्ञ का सातवां दिन रहा।हर दिन की तरह आज भी कथा आरंभ के पहले जजमान गुप्ता परिवार की तरफ से सज्जन गुप्ता दंपती ने श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ग्रंथ की पूजा अर्चना बड़ी नियम पूर्वक की। इसमें पूरे गुप्ता परिवार ने सहयोग दिया , शामिल हुए।तत्पश्चात श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ।

आज की कथा सुबह 10 बजे आयोजित थी।आज सुबह से ही गर्मी बड़ी भयंकर थी । भयंकर गर्मी की परवाह नहीं करते हुए रोजाना की तरह हजारों श्रद्धालुओं ने समयानुसार पंडाल में पहुंच कर श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का रस पान किया।

17 बार यमनों ने पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर पर हमला किया था। उनमें रक्तबाहु नामक यवन सबसे बड़ा, सबसे ज्यादा क्रूर था।उस समय के गजपति महाराज सोहन देव को स्वप्न हुआ। ठाकुरजी को मंदिर से लाया गया,नावों में बैठाकर स्वर्णपुर लेजाया गया।चतुर्धा मूर्तियां वहां 144 साल पाताली रही। स्वर्णपुर के लोगों ने किसी को नहीं बताया कि ठाकुरजी यहां विराजमान हैं।जो पौधा वहां लगाया गया,उसने बड़े वृक्ष का स्वरूप लिया। वहां के स्थानीय लोग वृक्ष की पूजा करने लगे ,वृक्ष ने विशाल स्वरूप लिया।

उसी वृक्ष के नीचे चतुर्धा मूर्तियां विराजमान थीं एक गुफा में । वहां से ठाकुरजी को लाया गया,पुरी के रत्न सिंहासन पर पुनः ठाकुरजी विराजमान हुए।तभी से जगन्नाथ धाम पुरी में नवकलेवर परंपरा आरंभ हुई।जिस साल में दो आषाढ़ महीने होते हैं,उस साल साधारणतया नवकलेवर होता है श्री जगन्नाथ पुरी मंदिर में।

हमारे देश के केरल में जन्मे आदि शंकराचार्य।केवल 32 साल उम्र में आज से सैंकड़ों साल पहले भारत के चार कोनों में चार पीठों की स्थापना किए आदि शंकराचार्य। बचपन में भक्ति करोगे तो पचपन में ठाकुरजी मिल जायेंगे,ऐसा व्यासपीठ से बोले इंद्रेश जी महाराज। युवावस्था हमारे यहां 16 साल में आरंभ हो जाती है, उससे पूर्व की बाल्यावस्था होती है।

जितने भी प्रसिद्ध लोग होते हैं, जिन्हें आजकल सेलिब्रिटी कहते हैं,वे केमरे के सामने हंसते हैं, वहां से हटते ही डिप्रेशन में आ जाते हैं। अतः पहले अपना जीवन सुधारिए। परिश्रम करके प्राप्त करने से वेल्यू बढ़ती है।सबको प्रसिद्ध होने की पड़ी है, इसके चक्कर में सब बर्बाद हुए पड़ा है।

संसार का एक्जिट गेट केवल एक ही है,वह है मानव शरीर।84 लाख योनियों पश्चात मानव शरीर प्राप्त होता है। ठाकुरजी कहते हैं मानव जीवन का सदुपयोग करो।आज जगन्नाथ जी के श्रृंगार में श्राद्ध वेश है। ठाकुरजी अपने माता-पिता का श्राद्ध कर्म करते हैं।निर्माल्य महाप्रसाद है।आप किसी भी परिस्थिति में महाप्रसाद का सेवन कर सकते हैं।

इसी का दूसरा एवं तीसरा हिस्सा कल आयेगा।

