तामिलनाडु में मोदी समर्थित विजय राज  मुस्लिम लिग मांगी शिक्षा विभाग, कांग्रेस मांगी फाइनेंस विभाग 

तामिलनाडु में मोदी समर्थित विजय राज

मुस्लिम लिग मांगी शिक्षा विभाग, कांग्रेस मांगी फाइनेंस विभाग

नन्द किशोर जोशी 

एक्जिक्यूटिव एडिटर

क्रांति ओडिशा मीडिया

 

तामिलनाडु में कांग्रेस 1967 से सत्ता से बाहर हो गयी है।59 साल बाद कांग्रेस तामिलनाडु में सत्ता के गलियारे में पहुंची है। वहां पिछले 59 सालों में डीएमके और एआईडीएमके के बीच करीब करीब बारी बारी से सत्ता की अदला बदली होती आ रही है।

डीएमके और एआईडीएमके दोनों ही द्राविड़ पार्टियां हैं। दोनों की सोच में 80% समानता है। दोनों दलों के बड़े नेता, संस्थापक तामिल फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए लोग हैं।

एक तरफ जहां डीएमके पूरी तरह से 100% हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान , संस्कृत,उत्तर भारत, आर्यन ,भारत विरोधी,ब्राह्मण विरोधी है, वहीं दूसरी तरफ एआइएडीएमके इन्हीं सब मुद्दों पर थोड़ी सोफ्ट है।बस यही थोड़ा सा दोनों द्राविड़ पार्टियों की सोच में फर्क दिखाई देता है।

भाजपा के पिछली तामिलनाडु विधानसभा में 3 विधायक थे। इस बार भाजपा का केवल एक ही विधायक विधानसभा में जीत कर आया है। कारण स्पष्ट है। भाजपा ने डीएमके को अपना प्रधान शत्रु माना।एक तरफ जहां उसको विधानसभा चुनाव में शिकस्त देना,कैसे भी हो तुरंत जरुरी था। इसलिए विजय संग पर्दे के पीछे भाजपा ने हाथ मिलाया।

प्रधानशत्रु यानि डिएमके के भ्रष्टाचार,देश विरोधी एक्टिविटी से तामिलनाडु को मुक्त कराना था। वहीं दूसरी तरफ खुलेआम इसके लिए भाजपा ने एआइएडीएमके से चुनावी गठबंधन किया। मतलब एक द्रविड़ पार्टि को हराने के लिए दूसरी द्रविड़ पार्टि के गठबंधन में शामिल हुई। मतलब दुश्मन का दुश्मन दोस्त।

मोदी यहीं नहीं रुके। मोदी ने एक और कंटिजेंसि प्लान तैयार कर रखा था दो साल पहले ही।उस कंटिजेंसि प्लान के तहत गैर-राजनीतिक,तामिल फिल्म हिरो व्यक्ति जे विजय को आगे किया गया।जे विजय ने अपनी लोकप्रियता को भुनाते हुए,नया राजनीतिक दल बनाया।नाम रखा टिविके।

तामिल फिल्म स्टार जोसेफ विजय के फैंस क्लब तामिलनाडु के गांव गांव में हैं। उन्हीं फैंस क्लब ने टिविके का प्रचार किया और अंततः चुनाव में टिविके को शानदार विजय मिली, विजय तामिलनाडु के नये मुख्यमंत्री बने।

विजय पिछले 59 साल में तामिलनाडु के पहले गैर द्रविड़ दलों के मुख्यमंत्री हैं। विजय के मुख्यमंत्री बनने से भाजपा का पहला मकसद पूरा हुआ,यानि द्रविड़ दलों से छूटकारा।अब दूसरा लक्ष्य रहा आने वाले एक या दो विधानसभा चुनावों में एनडिए की सरकार,वह लक्ष्य भी मोदी, भाजपा हासिल कर पायेंगे , मेहनत, मशक्कत इमानदारी से करके।

क्योंकि मेहनत, मशक्कत इमानदारी से करना,पूरे 365 दिन यानि साल भर इलेक्शन मोड़ में रहना भाजपा की विशेष फितरत है।

सरकार में शामिल है कांग्रेस,जिसके 5 विधायक जीत कर आये हैं। यहां कांग्रेस मांगी फाइनेंस डिपार्टमेंट। सरकार में 2 विधायकों के साथ मुस्लिम लिग शामिल है,मांगी एजुकेशन विभाग।इसका मतलब कांग्रेस को चाहिए फाइनेंस में मलाई और मुस्लिम लिग को चाहिए एजुकेशन में जिहादी एजुकेशन मतलब एजुकेशन का हराकरण ।

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