प्रतिनिधिमंडल ने ‘डिजिटल गुलामी’, निजी बसों की मनमानी वसूली और विवाह दस्तावेजों की विसंगतियों को लेकर केंद्र सरकार से किया आग्रह
झारखंड: ‘सुराज्य अभियान’ ने छात्रों में डिजिटल व्यसन को रोकने, बस यात्रियों के आर्थिक शोषण पर अंकुश लगाने और देशभर में विवाह प्रमाण पत्रों के मानकीकरण हेतु तत्काल नीतिगत सुधारों के लिए एक रणनीतिक राष्ट्रव्यापी पहल शुरू की है। शासन व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, अभियान के समन्वयक श्री शंभू गवारे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के माननीय *राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार जी, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल जी और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी जी से भेंट की।* इस दौरान नागरिक कल्याण के इन तीन महत्वपूर्ण स्तंभों को संबोधित करते हुए एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा गया।
‘सुराज्य अभियान’ के प्रतिनिधिमंडल ने किया नागरिक केंद्रित नीतिगत सुधारों का आग्रह !
1. ‘डिजिटल गुलामी’ के विरुद्ध राष्ट्रीय नीतिगत ढांचा: युवा पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए श्री शंभू गवारे ने कहा कि अनियंत्रित डिजिटल निर्भरता के कारण करोड़ों किशोर गंभीर मानसिक तनाव और अनिद्रा का शिकार हो रहे हैं। अभियान ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए ‘राष्ट्रीय स्क्रीन टाइम नीति’ का प्रस्ताव दिया है, जिसमें गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए प्रतिदिन अधिकतम 1 घंटा स्क्रीन समय और रात 7:00 बजे के बाद अनिवार्य “डिजिटल सनसेट” (इंटरनेट नियंत्रण) की वकालत की गई है। श्री गवारे ने जोर देकर कहा, “विकसित भारत @2047 का दृष्टिकोण हमारे युवाओं के बौद्धिक सशक्तिकरण पर टिका है; हमें उन्हें डिजिटल गुलामी से मुक्त करना ही होगा।” उन्होंने एम्स (AIIMS) की रिपोर्टों का भी हवाला दिया जो इस व्यसन को एक बढ़ते सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के रूप में वर्गीकृत करती हैं।
2. निजी बस किरायों के शोषण और एल्गोरिद्मिक मनमानी पर रोक: प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय विधि मंत्री को निजी बस ऑपरेटरों और ऑनलाइन ट्रैवल एग्रीगेटर्स (OTAs) द्वारा अपनाई जा रही ‘शोषक मूल्य निर्धारण’ प्रणाली से अवगत कराया, जहाँ पीक सीजन के दौरान किराए में 500% तक की मनमानी वृद्धि की जाती है। सामाजिक कल्याण हेतू कार्यरत हिंदू जनजागृति समिति के ‘सुराज्य अभियान’ ने ‘वन नेशन, वन लॉ’ के सिद्धांत के तहत देशभर में एक अनिवार्य ‘फेयर कैप’ (किराये की ऊपरी सीमा) की मांग की है। श्री गवारे ने स्पष्ट किया कि तकनीक सशक्तिकरण का साधन होनी चाहिए, न कि कॉर्पोरेट लूट का। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म्स को ‘व्यावसायिक एजेंट’ माना जाए और उन्हें उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत जवाबदेह बनाया जाए।
3. डिजिटल विवाह प्रमाण पत्रों का राष्ट्रीय मानकीकरण: प्रशासनिक पारदर्शिता और महिलाओं की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुराज्य अभियान ने एक समान ‘राष्ट्रीय डिजिटल मैरिज सर्टिफिकेट’ प्रारूप का प्रस्ताव दिया है। वर्तमान में विभिन्न राज्यों में अलग-अलग दस्तावेज़ प्रारूप होने के कारण महिलाओं को पहचान रिकॉर्ड अपडेट करने या कानूनी अधिकार प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। एक एकीकृत डिजिटल मानक इस प्रक्रिया को सरल बनाएगा, नौकरशाही की देरी को कम करेगा और भ्रष्टाचार की गुंजाइश को समाप्त करेगा।
इस पहल को जमीनी स्तर तक ले जाते हुए, रांची की महापौर एवं उप-महापौर, तथा रांची, बोकारो, रामगढ़ और पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्तों (DC) को भी ज्ञापन सौंपे गए हैं। सुराज्य अभियान ने प्रशासन से ‘डिजिटल डिटॉक्स’ कार्यक्रम चलाने और शिक्षण संस्थानों में पेशेवर काउंसलिंग केंद्र स्थापित करने का आग्रह किया है।

