नई दिल्ली / मणिपुर, राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन ने मणिपुर से आए वरिष्ठ सनातन धर्म प्रचारक एवं पूर्व अध्यक्ष, इस्कॉन मणिपुर से जुड़े अजित दास से विस्तृत चर्चा के उपरांत पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर मणिपुर की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
संगठन के संस्थापक अध्यक्ष सोहन गिरि ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत आज केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती का सामना नहीं कर रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय बन चुका है।
संगठन ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में धार्मिक जनसांख्यिकी में बड़े परिवर्तन देखने को मिले हैं। नागालैंड, मिज़ोरम और मेघालय में ईसाई आबादी बहुसंख्यक हो चुकी है, जबकि अरुणाचल प्रदेश एवं मणिपुर में भी ईसाई आबादी में वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं असम में मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि को लेकर भी लगातार सामाजिक एवं राजनीतिक चिंताएँ व्यक्त की जाती रही हैं।
संगठन के अनुसार वर्ष 2017 के बाद मणिपुर में विकास, आधारभूत संरचना, सीमाई सुरक्षा, कनेक्टिविटी तथा सांस्कृतिक पुनर्जागरण के क्षेत्र में तेज़ गति से कार्य हुए। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा ड्रग्स नेटवर्क, अवैध घुसपैठ, उग्रवादी गतिविधियों एवं सीमा पार तंत्रों के विरुद्ध की गई कार्रवाई से कई अवैध आर्थिक नेटवर्क प्रभावित हुए। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से सामाजिक तनाव, हिंसा और अविश्वास को बढ़ाने के प्रयास तेज हुए।
संगठन ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से जारी हिंसा में 300 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है, 1000 से अधिक लोग घायल हुए हैं तथा 60,000 से अधिक नागरिक विस्थापित हुए हैं। हजारों घर, दुकानें एवं संपत्तियाँ नष्ट हो चुकी हैं, जिससे मणिपुर आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टि से लगभग 15 वर्ष पीछे चला गया है।
संगठन के अनुसार 3 मई 2023 को चुराचांदपुर में आयोजित एक शांति मार्च के दौरान हिंसा भड़कने के बाद स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। संगठन का आरोप है कि कुछ उग्रवादी एवं हथियारबंद तत्वों द्वारा मेतेइ समुदाय की दुकानों एवं संपत्तियों पर हमले किए गए, जिसके बाद व्यापक हिंसा फैल गई और आज तक अशांति का वातावरण बना हुआ है। संगठन ने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं व्यापक जांच की मांग की है ताकि वास्तविक दोषियों और हिंसा को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क की पहचान हो सके।
संगठन ने यह भी कहा कि मणिपुर में लंबे समय से चली आ रही अशांति का एक प्रमुख कारण विभिन्न समुदायों — विशेषकर कुकी, मेतेइ एवं नागा समाज के कुछ उग्र तत्वों द्वारा सरकार के विरुद्ध हथियार उठाना भी रहा है। वर्षों से लंबित सामाजिक, प्रशासनिक एवं राजनीतिक समस्याओं का समयबद्ध समाधान न होने के कारण असंतोष बढ़ता गया, जिसका लाभ अलगाववादी शक्तियों, अवसरवादी राजनीतिक तत्वों एवं राष्ट्रविरोधी शक्तियों ने उठाया।
संगठन ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें इन जटिल समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने में अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं कर सकीं। परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में अविश्वास, असुरक्षा एवं हिंसात्मक प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिला। वर्तमान सरकार को चाहिए कि जिन समस्याओं का समाधान संवैधानिक प्रक्रिया, संवाद एवं शांतिपूर्ण वार्ता से संभव है, उनका शीघ्र समाधान किया जाए तथा युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विश्वास निर्माण की व्यापक नीति अपनाई जाए।
संगठन ने स्पष्ट कहा कि हिंसा और हथियार किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकते। सरकार को कठोर सुरक्षा नीति के साथ-साथ पुनर्वास, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक समरसता एवं संवाद आधारित नीति को भी समान महत्व देना चाहिए, ताकि उग्रवाद की ओर बढ़ रहे युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाया जा सके।
राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन ने केंद्र सरकार से निम्न मांगें तत्काल लागू करने की अपील की है—
1. भारत-म्यांमार सीमा पर पूर्ण फेंसिंग एवं आधुनिक ड्रोन निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।
2. अवैध घुसपैठ रोकने हेतु प्रभावी कानूनी एवं प्रशासनिक तंत्र शीघ्र लागू किया जाए।
3. मणिपुर के सभी राष्ट्रीय एवं राज्यीय हाईवे आम नागरिकों के लिए सुरक्षित रूप से खोले जाएं।
4. जबरन अथवा प्रलोभन आधारित धर्मांतरण रोकने हेतु कठोर कानून एवं त्वरित दंड व्यवस्था बनाई जाए।
5. 60,000 से अधिक विस्थापित नागरिकों की सुरक्षित एवं सम्मानजनक घर वापसी सुनिश्चित की जाए।
6. आतंकवादी एवं अलगाववादी समूहों को आर्थिक अथवा सामरिक सहायता देने वाले विदेशी नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच एवं कूटनीतिक कार्रवाई की जाए।
7. केवल उन्हीं उग्रवादी संगठनों से वार्ता हो जो पूर्ण रूप से हिंसा एवं हथियार त्यागने को तैयार हों; शेष आतंकवादी नेटवर्क के विरुद्ध कठोर सुरक्षा अभियान चलाया जाए।
संगठन ने कहा कि यदि समय रहते निर्णायक एवं संतुलित कदम नहीं उठाए गए तो पूर्वोत्तर भारत की स्थिति भविष्य में और अधिक जटिल हो सकती है। सरकार को विकास, सुरक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण एवं सामाजिक संतुलन — इन सभी पहलुओं पर समान रूप से कार्य करना होगा।
अंत में संगठन ने मणिपुर में स्थायी शांति, राष्ट्रीय एकता तथा सभी समुदायों के सुरक्षित एवं सम्मानजनक भविष्य की कामना की।

