रामायण आयोजन के ७५ साल पूरे ७५ सालों में विद्वान वक्ताओं ने राम दरबार से भक्तों को भक्ति रस पान कराया

रामायण आयोजन के ७५ साल पूरे
७५ सालों में विद्वान वक्ताओं ने राम दरबार से भक्तों को भक्ति रस पान कराया

नन्द किशोर जोशी, एक्जिक्यूटिव एडिटर क्रांति ओडिशा मीडिया
१८ वीं कड़ी

मैंने लेखनी के माध्यम से तपोभूमि मारवाड़ी क्लब में आयोजित श्रीरामचरितमानस नवान्हपारायण पाठ के शुरु से लेकर अभी तक के जजमानों के बारे में संक्षिप्त जिक्र किया। मुझे जितनी जानकारी मिल सकी , उसके आधार पर किया।

तत्पश्चात मैंने कल लेखनी के माध्यम से समय -समय पर व्यासपीठ पर विराजमान विद्वान पंडितों के बारे में जानकारी के आधार पर संक्षिप्त लेख लिखा।राम भक्तों को बहुत -बहुत पसंद आया।

आज मैं विद्वान वक्ताओं के बारे में मिली संक्षिप्त जानकारी के आधार पर लिख रहा हूं।विगत ७५ सालों में समय -समय पर विद्वान पंडितों, आचार्यों , धर्मनिष्ठ वक्ताओं ने यहां प्रवचन देकर सनातन धर्म की बड़ी सेवा की है।सारे भारत से विद्वान वक्ताओं ने यहां आकर प्रभु मर्यादा पुरुषोत्तम राम के सुंदर चरित्र की अनुपम व्याख्या की है। सनातनी धर्मावलंबी लोगों के लिए धर्म रुपी ज्ञान की तिजोरी खोली है।

आजकल जैसे संगीत मय प्रवचन नहीं हुआ करता था उस समय भजनों के संग ।पहले केवल भगवान के जीवन पर,उनके त्याग, आदर्शों पर प्रवचन हुआ करता था।

१९७० के आसपास से मैं बराबर यहां संध्या समय प्रवचन सुना करता था। मैंने प्रसिद्ध वक्ता भयंकर जी , बिंदु जी के बारे में सुना है कि वे बहुत बड़े विद्वान वक्ता थे, मैं ने देखा नहीं है। अपने जमाने में सारे भारत में उनका उस समय नाम था।सारे श्रोताओं को दरबार में अपनी ओजस्वी वाणी से वे बांध कर रख ते थे। भगवान के सद्चरित्र का रसपान कराया था उन्होंने।

मैं जब स्कूल में पढ़ता था उस समय दो विद्वान वक्ताओं ने दरबार से भक्तों को अच्छी अच्छी धार्मिक बातें कही।एक वक्ता तो प्रवचक के साथ साथ आशु कवि भी थे। दरबार से उन्होंने भक्तों को बोला कि मुझे आप अपनी पसंद की एक लाइन लिख के दीजिए, मैं उसपर आपके सामने तुरंत अनेकों लाइन कविता के रुप में लिखूंगा और आपके सामने कविता पाठ करुंगा। कुछ लोगों ने एक एक लाइन लिखी और वे तुरंत आशु कवि के हिसाब से लिखकर कविता पाठ किये।पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

यहां पंडाल में महिला वक्ता भी अनेक आयीं। उनमें प्रमुख हैं शकुंतला रामायणी १९७४-७५ में। विद्वान वक्ता मृदुल कृष्ण शास्त्रीजी १९८६-८७ में यहां आये थे ।पियूष जी महाराज १९८८-८९ में यहां आये थे ।बालक रामजी १९९० के आसपास आये थे।अमिता जी १९९०-९२ में दो तीन बार यहां आयीं थी।

एक संत वक्ता तो ऐसे आये थे कि बालकांड के एक दोहे पर पूरे ९ दिन तक पंडाल में प्रवचन किये।स्वांत: सुखाय तुलसी रघुनाथ गाथा,भाषा निबंधमतिमचंल मातनोति ।

पहले के जमाने में रात ८ बजे पश्चात प्रवचन आरंभ होताथा ।लोग आते-आते ९ बज जाता था।अच्छे , ओजस्वी वक्ताओं को सुनने के लिए पूरा पंडाल भर जाता था।भक्त लोग प्रवचन का खूब आनंद लेते थे

प्रवचकों को लाने में विश्ववंर दयाल सांगानेरिया,श्याम सुंदर मिश्र , शादीराम शर्मा अक्सर कटक के बाहर जाते थे ,अच्छे अच्छे वक्ताओं को ढूंढ कर लाते थे।उस समय इंटरनेट नहीं था, यूट्यूब नहीं थी। इन्होंने कड़ी मेहनत की वक्ताओं को यहां लाने में।उनकी मेहनत को नमन। मुझे वक्ताओं संबंधित तथा अनेक जानकारी मिली है समाजसेवी सज्जन केजरीवाल,भीखराज गोयनका, दिनेश कमानी,किशन मोदी से ,इनको आभार प्रकट करता हूं। क्रमशः

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