मारवाड़ी युवा मंच कटक शाखा का गौरवशाली, स्वर्णिम इतिहास, 13वीं कड़ी ,1991 में सिलीगुड़ी अधिवेशन में कटक शाखा शामिल, मैं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, निर्विरोध निर्वाचित
नन्द किशोर जोशी,पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच,सत्र-1991-94
1989 में कटक में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक पश्चात कटक शाखा के कार्यकर्ताओं ने लगातार शहर में जनसेवा के अनेक कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किए। धीरे धीरे कटक शहर में सेवा के माध्यम से मारवाड़ी युवा मंच के पांव सामाजिक क्षेत्र में जमने लगे।समाज में मारवाड़ी युवा मंच का नाम होने लगा। युवा मंच के नाम की समाज में और समाज के बाहर प्रतिष्ठा बढ़ने लगी।
ओडिया अखबारों में प्रत्येक युवा मंच के सामाजिक कार्यों की रिपोर्टिंग विस्तार से फोटो सहित होने लगी।इसका पोजिटिव असर ओडिशा में मंच की अन्य शाखाओं पर भी होने लगा। ओडिशा के झारसुगुड़ा में प्रथम प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित हुई। प्रांतीय कार्यकर्ता चुने गए।कटक शाखा को भी उसमें उचित प्रतिनिधित्व दिया गया।
1991 में सिलिगुड़ी में युवा मंच का तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित हुआ।उस समय युवा मंच की व्यवस्था के हिसाब से ओडिशा और छत्तीसगढ़ एक जोन में रखे गए सांगठनिक दृष्टिकोण से,क्षेत्र ग में। मुझे सिलीगुड़ी अधिवेशन में निर्विरोध राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चुना गया,1991-94 सत्र के लिए।
सिलिगुड़ी अधिवेशन शानदार, जानदार रहा। सिलिगुड़ी के ओमप्रकाश अग्रवाल राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए। अधिवेशन में एक रात के डिनर सर्विस,परोसगारी में कटक शाखा का योगदान सराहनीय रहा। युवा मंच का राष्ट्रीय नेतृत्व प्रसन्न रहा।
सिलिगुड़ी अधिवेशन से लौटने पर मैंने युवा मंच की व्यवस्था के अनुरूप छत्तीसगढ़ के एक युवा साथी को सह संयुक्त मंत्री चयन किया। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने पश्चात मेरा लगातार ओडिशा की विभिन्न शाखाओं में सांगठनिक दौरा चला।
महाराज अग्रसेन जयंती पर मैं पश्चिम ओडिशा की अनेक शाखाओं में मुख्य अतिथि या मुख्य वक्ता के रुप में शामिल होता रहा। बालेश्वर में आयोजित कृत्रिम पांव प्रत्यारोपण शिविर में कटक से युवा मंच के साथी नथमल चनानी संग सड़क मार्ग से उनकी कार में बैठकर हम दोनों बालेश्वर शिविर में पहुंचे।
वहां बालेश्वर शाखा के प्रेसिडेंट थे उस समय मेरे साथी इंजीनियर किशन अग्रवाल। उन्होंने एक बड़े मैदान में इस कार्यक्रम हेतु विशेष जनसभा आयोजित की थी। स्थानीय विधायक अरुण दे का भाषण शानदार रहा। मैंने भी सभा को संबोधित किया।
मेरे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष काल में मैंने छत्तीसगढ़ का भी दो बार सांगठनिक दौरा किया। वहां रायगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में तत्कालीन राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य साथी दीनदयाल क्याल मेरे संग रायगढ़ गये। क्रमशः


