भारत के स्वाधीनता संग्राम में रेवेंशा कोलेज का योगदान  नन्द किशोर जोशी  एक्जिक्यूटिव एडिटर, क्रांति ओडिशा मीडिया 

भारत के स्वाधीनता संग्राम में रेवेंशा कोलेज का योगदान

नन्द किशोर जोशी

एक्जिक्यूटिव एडिटर, क्रांति ओडिशा मीडिया

अखंड भारत में अंग्रेज सबसे अंत में ओडिशा आये 1803 में।उस जमाने में कटक ओडिशा की राजधानी थी। अंग्रेजों ने भी ओडिशा की राजधानी कटक को ही बरकरार रखा। अंग्रेजी हुकूमत का शासन ओडिशा में कटक से ही संचालित होता था।

 

अंग्रेज प्रशासक रेवेंशा ने ओडिशा की प्रथम कोलेज की स्थापना की 1869 में कटक में।उसी अंग्रेज प्रशासक रेवेंशा के नाम से रेवेंशा कोलेज का नाम करण हुआ।2008 में रेवेंशा कोलेज बनी रेवेंशा यूनिवर्सिटी।

 

बात उन दिनों की है जब पूरे विश्व में द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था। 1942 में भारत के कोने कोने में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था। अंग्रेजों के खिलाफ ओडिशा में भी आंदोलन चरम पर था।उस समय कटक स्थित रेवेंशा कोलेज में स्वाधीनता आंदोलन की आग जोर से पकड़ ली थी।

 

अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ रेवेंशा कोलेज में छात्रों के बीच छोटी-छोटी सभायें आयोजित होने लगी थी। छात्रों की सभायें बड़ी गुपचुप तरीके से प्रायः हुआ करती थी।उन दिनों छात्रों के बड़े नेताओं में थे नीलमणि राउतराय,विभुदेंदु मिश्र, सूरजमल शाह , प्रहलाद राय अग्रवाल तथा अन्य अनेक साथी।

एक दिन की बात है कि छात्रों के एक समूह ने निर्णय लिया कि आज रेवेंशा कोलेज की मेन बिल्डिंग से इंग्लैंड के यूनियन जेक को हटायेंगे और उसकी जगह भारत के तिरंगे को फहरायेंगे।

योजना अनुसार इंग्लैंड के यूनियन जैक को हटाया गया और भारत के तिरंगे को छात्रों द्वारा फहराया गया।

 

रेवेंशा कोलेज में भारत के तिरंगे को फहराने की बात जंगल में आग की तरह तुरंत फैल गई।कटक में अंग्रेजी हुकूमत हिल गई। अंग्रेज तुरंत हरकत में आये ,पता लगाये। अंग्रेजी हुकूमत को पता चला कि नीलमणि राउतराय,विवुदेंदु मिश्र, सूरजमल शाह, प्रहलाद राय अग्रवाल एवं उनके अनेक साथियों का यह काम है।

 

तुरंत नीलमणि राउतराय, विवुदेंदु मिश्र, सूरजमल शाह, प्रहलाद राय अग्रवाल समेत अन्य छात्रों की गिरफ्तारियां हुई। उन्हें सर्वप्रथम कटक में दरघा बजार स्थित जेल में भेजा गया।उसके कुछ महीनों पश्चात ब्रहमपुर जेल में स्थानांतरित किया गया।

 

ब्रहमपुर जेल में इनके रहने के समय ही ओडिशा,भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारी लक्ष्मण नायक को ब्रहमपुर जेल में ही फांसी की सजा दी गई। इसतरह लक्ष्मण नायक शहीद हुए। ब्रहमपुर जेल में तीन साल की सजा काटकर ये सारे रिहा हुए।

 

भारत की आजादी पश्चात नीलमणि राउतराय ओडिशा के उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री बने।भारत सरकार में भी केबिनेट मंत्री रहे।विवुदेंदु मिश्र केंद्र सरकार में मंत्री रहे।कटक स्थित ओडिशा हाइकोर्ट में प्रसिद्ध एडवोकेट थे। सूरजमल शाह प्रसिद्ध एडवोकेट के साथ साथ राज्यसभा में सांसद रहे। प्रहलाद राय अग्रवाल ने अपना जीवन समाजसेवा में बीताया।

 

परसों रेवेंशा कोलेज का भारत के एकीकरण में श्रेष्ठ योगदान नामक लेख को भारत के बड़े डिप्लोमैट,बड़े प्रशासक, राष्ट्रवादी चिंतक अखिलेश मिश्र ने भूरी भूरी प्रशंसा की। इनके द्वारा लिखे गए दो शब्द यहां दिए गए हैं।

So nice, NAND Kishore ji!
Keep up your outstanding work!

Warm regards and best wishes.
Akhilesh Mishra
Former Director General,
Indian Council for Cultural Relations (ICCR) and Officer on Special Duty incharge of Development Partnership Administration of India

Former Indian Ambassador to Ireland & High Commissioner to Maldives and
Consul General in Toronto, Canada.

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Email: [email protected]

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