मायुमं कटक खाद्द वितरण कैंप पुरी रथयात्रा में  ओडिशा के फाइनेंस मिनिस्टर आये,निहारे 

मायुमं कटक खाद्द वितरण कैंप पुरी रथयात्रा में

ओडिशा के फाइनेंस मिनिस्टर आये,निहारे

नन्द किशोर जोशी

पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच 1991-94

 

बात उन दिनों की है जब ओडिशा के मुख्यमंत्री बिजु पटनायक थे।बिजु पटनायक ओडिशा के दो बार मुख्यमंत्री रहे थे। 1962 में वे पहली बार मुख्यमंत्री बने।उनकी शासन की दूसरी पारी रही 1990-95 में।बिजु पटनायक के 90-95 शासन काल में दो फाइनेंस मिनिस्टर थे ओडिशा में।90-93 में फाइनेंस मिनिस्टर थे रामकृष्ण पटनायक।

रामकृष्ण पटनायक को ओडिशा में गंजाम टाइगर भी कहा जाता था उन दिनों।93-95 में वेद प्रकाश अग्रवाल फाइनेंस मिनिस्टर बने ओडिशा के।मंत्री रामकृष्ण पटनायक के विभाग में बदलाव किया गया।

मारवाड़ी युवा मंच कटक शाखा का गठन हुआ था 6 जनवरी 1988 को। श्री जगन्नाथ पुरी रथयात्रा में मायुमं का खाद्द वितरण शिविर लगना आरंभ हुआ 1992 से।

1992 के मायुमं रथयात्रा खाद्द वितरण शिविर के अति निकट पधारे थे ओडिशा के फाइनेंस मिनिस्टर रामकृष्ण पटनायक।वे शिविर से लगभग 8-10 फिट दूर पर खड़े थे सड़क पर।उनके साथ कोई पुलिस, सुरक्षा बल,मंत्री जैसा तामझाम, ठाट-बाट, गाड़ियों का काफिला कुछ भी नहीं था।

 

संभवतः रथयात्रा की जबरदस्त भीड़ की वजह से नहीं था। दूसरी संभावना यह भी थी कि उन्हें सादगी पसंद थी , तामझाम, दिखावा इत्यादि पसंद नहीं था।वजह चाहे जो भी हो, फाइनेंस मिनिस्टर रामकृष्ण पटनायक बिना लाव-लश्कर के चुपचाप,बड़े शांत भाव से आये और करीब 15-20 मिनट मायुमं के कैंप को सड़क पर निकट से खड़े होकर निहारते रहे।

मैं उस शिविर में कार्य व्यस्त रहा।कार्य व्यस्तता के बीच में ही मेरी नज़र उन पर पड़ी कई बार। मैंने अनेक बार माथे पर जोर भी लगाया कि ये कोई विआइपि हैं और मैंने कहीं इन्हें देखा है। वे साधारण धोती कुर्ता में थे।जब मेरी समझ में पूरी तरह से आगया कि ये तो ओडिशा के फाइनेंस मिनिस्टर रामकृष्ण पटनायक हैं, उन्हें पूरे सम्मान,आदर के साथ हमारे शिविर में पधारने का निमंत्रण देना चाहिए।

मैं तुरंत शिविर से उठा। तेज कदमों से बाहर आया सड़क पर। मैं सड़क पर पहुंच कर देखा तो मिनिस्टर रामकृष्ण पटनायक वहां नहीं थे।वे कहीं निकल गये थे। इसतरह मुझे बेहद अफसोस रहा कि एक सज्जन, ओडिशा के फाइनेंस मिनिस्टर रामकृष्ण पटनायक का हम स्वागत, सत्कार नहीं कर सके हमारे कैंप में।यह अफसोस मेरे जीवन में आजतक कायम है।

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