नई दिल्ली, राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव के बाद उत्पन्न राजनीतिक स्थिति की कड़ी निंदा करता है।
जहाँ भारतीय जनता पार्टी ने लगभग 206 सीटों के साथ स्पष्ट और प्रचंड बहुमत प्राप्त किया है, वहीं वर्तमान सरकार का ममता बनर्जी के नेतृत्व में सत्ता पर बने रहना जनादेश का खुला अपमान और लोकतंत्र की मूल भावना के विरुद्ध है।
राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन स्पष्ट रूप से कहता है कि जनता के स्पष्ट फैसले के बाद सत्ता से चिपके रहना न केवल अनैतिक है, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं का भी उल्लंघन है।
संगठन यह भी गंभीर चिंता व्यक्त करता है कि बिना किसी ठोस प्रमाण के चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना और भारत निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता को चुनौती देना अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन की प्रमुख मांगें:
* पश्चिम बंगाल के राज्यपाल तत्काल हस्तक्षेप कर बहुमत की स्थिति स्पष्ट करने हेतु फ्लोर टेस्ट सुनिश्चित करें।
* स्पष्ट जनादेश का सम्मान करते हुए सत्ता का तत्काल एवं पारदर्शी हस्तांतरण सुनिश्चित किया जाए।
* लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने, भ्रम फैलाने तथा जनमानस को गुमराह करने वाले बयानों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
संगठन यह भी चेतावनी देता है कि यदि स्थिति में शीघ्र सुधार नहीं होता और संवैधानिक व्यवस्था प्रभावित होती है, तो आर्टिकल 356 के तहत आवश्यक कदम उठाए जाने पर विचार किया जाना चाहिए।
“लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है — उसके जनादेश का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
राष्ट्रहित सर्वोपरि संगठन देश के संविधान, लोकतंत्र और कानून के शासन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और सभी संवैधानिक संस्थाओं से तत्काल, सख्त एवं निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करता है।

