बंगाल की दुर्गति आरंभ 1967 से  ओडिशा की प्रगति आरंभ 1977 से 

बंगाल की दुर्गति आरंभ 1967 से 

ओडिशा की प्रगति आरंभ 1977 से 

नन्द किशोर जोशी 

एक्जिक्यूटिव एडिटर 

क्रांति ओडिशा मीडिया 

दूसरी, अंतिम कड़ी 

 

ओडिशा में 1977 के पहले दो ही बहुत बड़ी फैक्ट्री थी।एक का नाम है राउरकेला स्टील प्लांट, दूसरी फैक्ट्री का नाम है ओडिशा सिमेंट ।यह डालमिया समूह की फैक्ट्री राजगांगपुर में स्थित है। दोनों की स्थापना 1950 के दशक में हुई।

1977 के पहले कटक चौद्वार में बिजु पटनायक द्वारा दो कारखाने बैठाये गये।एक का नाम कलिंगा ट्यूब्स और दूसरी का नाम ओडिशा टेक्सटाइल मिल। दोनों प्लांट ओडिशा ही नहीं पूरे भारत में अच्छा नाम किये। हजारों लोगों को रोजगार मिला। वहीं चौद्वार में एक पेपर मिल भी बैठायी गयी।

1977 में बिजु पटनायक केंद्र में स्टील एंड माइंस मंत्री बने भारत की प्रथम गैर कांग्रेसी शासन में।बिजु पटनायक के आदेश से ही ओडिशा में नाल्को फैक्ट्री बैठी। नाल्को फैक्ट्री भारत सरकार की आजकल महारत्न कंपनी में आती है,इसका मुख्यालय भुवनेश्वर में है। फैक्ट्री अंगुल और दामनजोडि में है।

नाल्को भारत की सबसे बड़ी सरकारी एलुमिनियम फैक्ट्री है । इसमें हजारों कामगार काम करते हैं। हजारों करोड़ रुपए सालाना केंद्र सरकार को लाभ के रूप में और ओडिशा को टैक्स के रुप में प्राप्त होते हैं।

इसी नाल्को के आने के बाद ओडिशा में सैंकड़ों की संख्या में लघु और मध्यम आकार की फैक्ट्रियां लगीं एंसिलरी और डाउन-स्ट्रीम फैक्ट्री के रूप में। हजारों को रोजगार मिला।नयी टाउनशिप डेवेलप होगयी।1980 ,1990 के पश्चात।

फ्लाई ऐश आधारित नये नये सिमेंट प्लांट लगे ओडिशा में 2000 के पश्चात। फ्लाई ऐश नाल्को, राउरकेला स्टील प्लांट से मिली कच्चे माल के लिए।यह फ्लाई ऐश उन प्लाटों के लिए वेस्ट था, लेकिन सिमेंट प्लांटों के लिए बेस्ट था कच्चे माल के हिसाब से।

सिमेंट प्लांटों की बड़ी संख्या में आने पर ओडिशा में नये बड़े बडे निर्माणों का शुभारंभ हुआ। लाखों को रोजगार मिला सरकारी, प्राइवेट निर्माण क्षेत्र में।

1980 में ओडिशा में शुभारंभ हुए नये नये इंडस्ट्रियल इस्टेट।इन जगहों पर लघु और मध्यम आकार की हजारों फैक्ट्रियां लगीं। आज भी यहां बड़ी संख्या में फैक्ट्री लग रही है ।लाखों को रोजगार डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रोजगार मिला और मिल रहा है।लोगों में खुशहाली आयी।नये नये उद्योगपति खड़े हुए, ओडिशा के राजस्व में बढ़ोतरी हुई।नयी सड़कें बनी , आवागमन के साधन बढ़े।

1980 के पश्चात जितनी भी ओडिशा में सरकारें आयीं,सभी ने ओडिशा में फैक्ट्रियां बड़ी संख्या में लगवाई। बिजनेस फ्रैंडली सरकारें रही। लाखों को रोजगार मुहैया करवाये। राज्य के चहुंमुखी विकास में बढ़ोतरी हुई।

एजुकेशन के मामले में भुवनेश्वर -कटक ओडिशा का हब है। यहां अनेकों प्राइवेट, सरकारी यूनिवर्सिटी आयीं। नेशनल लो यूनिवर्सिटी कटक में है।यह पूर्वी भारत की एकमात्र केंद्र सरकार की

लो यूनिवर्सिटी है। यहां सारे भारत से लो पढ़ने के लिए बच्चे आते हैं।

ओडिशा में आज एम्स अस्पताल भुवनेश्वर में है, आइआइटी भुवनेश्वर में है,सेंट्ल यूनिवर्सिटी कोरापुट में है , आइआइएम संबलपुर में है,नाइजर जटनी में है। इनके अलावा अनेक अनेक बडे बडे एजुकेशनल इंस्टीट्यूट ओडिशा में कार्यरत हैं।

मेडिकल कॉलेज ओडिशा में आज 14 हैं और नये नये हर जिले में अगले कुछ सालों में खुलने वाले हैं। ओडिशा के सभी 30 जिलों में मेडिकल कोलेज होने वाले हैं अगले चंद सालों में।

स्टील प्लांट बड़े ओडिशा में तीन जगह हैं । राउरकेला, जाजपुर के कलिंगा नगर, अंगुल में। यहां लाखों लोगों को रोजगार मिला है। आगामी आने वाले सालों में केन्द्रापड़ा में एल एन मित्तल और जगतसिंहपुर जिले में जिंदल ग्रुप के स्टील प्लांट आने वाले हैं।

मुख्यमंत्री मोहन माझी के केंओझर जिले में जमशेदपुर जितना बडे प्लांट की आधारशिला जल्द रखी जायेगी।इस तरह आने वाले चंद सालों में ओडिशा होगा विश्व की स्टील राजधानी।

कटक में पुरानी,सरकारी बड़ी मेडिकल कोलेज में 5000 करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य जारी है पिछले चार-पांच सालों से।इसी साल यह कार्य संपन्न होगा।यह मेडिकल कॉलेज भारत में सबसे बड़ा सरकारी मेडिकल कॉलेज होगा निर्माण संपन्न होते ही।

इसी बड़ी मेडिकल में और यहां के सरकारी कैंसर अस्पताल में रोज बंगाल, बिहार, झारखंड से सैंकड़ों गरीब रोगी कैंसर के मुफ्त इलाज कराने आते हैं, क्योंकि पूरे पूर्वी भारत में यहां एक मात्र सरकारी कैंसर अस्पताल है।

कटक की बड़ी मेडिकल में और भुवनेश्वर एम्स में तथा प्राइवेट नर्सिंग होम में कटक भुवनेश्वर में रोज सैंकड़ों मरीज आते हैं बंगाल से इलाज कराने के लिए। इसीलिए कटक बड़ी मेडिकल एरिया में सभी दवा दुकानों, टेस्टिंग सेंटरों, नर्सिंग होम में बोर्ड में बंग्ला भाषा में भी लिखा होता है।

पिछले 40-50 सालों से ओडिशा में जितने भी एपार्टमेंट हुए हैं,सभी जगह बंगाल से निर्माण श्रमिक आते हैं।सभी जगह प्लाइवुड का काम बंगाल के कारीगर करते हैं। मतलब बंगाल से श्रमिक यहां रोजगार के लिए आते हैं। इसके अलावा आजकल के केटरिंग सर्विस में भी बंगाली श्रमिक मेचेदा से आते हैं।

कटक की गली-गली में बंगाली सुनार देखने को मिलते हैं। हजारों की संख्या में कार्यरत हैं।ये लोग यहां प्रोपर्टी भी खूब खरीद रहे हैं , मकान बना रहे हैं।आज के दिन कटक -भुवनेश्वर में प्रोपर्टी के दाम कोलकाता के बराबर हैं, कहीं कहीं ज्यादा भी हैं यहां।इस तरह मैंने संक्षिप्त में ओडिशा के विकास, प्रगति के बारे में संक्षिप्त लेखा जोखा दिया।

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