मारवाड़ी युवा मंच कटक शाखा का गौरवशाली, स्वर्णिम इतिहास ,7 वीं कड़ी , दिल्ली अधिवेशन की उपलब्धियां (तीसरा , अंतिम भाग)

मारवाड़ी युवा मंच कटक शाखा का गौरवशाली, स्वर्णिम इतिहास ,7 वीं कड़ी , दिल्ली अधिवेशन की उपलब्धियां (तीसरा , अंतिम भाग)

नन्द किशोर जोशी,पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच,सत्र,1991-94 

दिल्ली अधिवेशन के एक सत्र में मुख्य अतिथि रहे भारत के तत्कालीन वित्त मंत्री नारायण दत्त तिवारी।उन दिनों भारत के प्रधानमंत्री थे राजीव गांधी।भारत के वित्त मंत्री नारायण दत्त तिवारी ने अपने संबोधन में बोला कि भारत के वित्त मंत्री में मारवाड़ी जैसे गुण होने चाहिए। मारवाड़ी लोग लक्ष्मी पुत्र हैं,आप लोगों के नस नस में बिजनेस है।

 

आप मारवाड़ी लोग सारे कर्मठ हैं। भारत जैसे विशाल देश की आर्थिक स्थिति को आप लोगों ने बल दिया है।देश की आर्थिक प्रगति के मारवाड़ी लोग सारथी हैं।आप लोगों के बिना आर्थिक विकास की हम सोच भी नहीं सकते।भारत का वित्त मंत्री आप लोगों से यहां अर्थव्यवस्था की सूझबूझ को समझने आया है। मारवाड़ी भाइयों जैसे गुण भारत के वित्त मंत्री में होने चाहिए,तभी देश आगे बढेगा। उपरोक्त बातें मारवाड़ी समाज पर सुनने पश्चात उपस्थित सभी मायुमं के कार्यकर्ताओं ने जोरदार, बारंबार तालियां बजाईं। सदस्यों में भरपूर जोश जगा।

 

अधिवेशन में संस्थापक अध्यक्ष भाईजी प्रमोद सर्राफ का संबोधन प्रेरणादायक रहा। उन्होंने संबोधन में बोला कि किन -किन मुश्किल हालातों से असम , उत्तर पूर्वी भारत में मारवाडियों को गुजरना पड़ता है।

 

दिल्ली अधिवेशन में जुझारू, सूझबूझ से भरे , संगठन के जमीनी कार्यकर्ता,युवा कार्यकर्ता अरुण बजाज अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच के सभापति चुने गए।वे अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच के दूसरे सभापति सर्वसम्मति से चुने गये। सचिव रहे निर्मल दोशी।

 

अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच की एक राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति है।यह समिति अखिल भारतीय स्तर पर मायुमं के सभी कार्यक्रमों की रुपरेखा बनाती है। इसमें साधारण तया पूरे भारत से करीब 25-30 सदस्य होते हैं।इसका मुख्यालय पहले गौहाटी में था,बाद में स्थानांतरित हुआ दिल्ली कश्मीरी गेट एरिया में।साल में अनेकों बार राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठकें भारत के विभिन्न शहरों में आयोजित होती रहती है।

 

इसी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सदस्य के रुप में मुझे चयन किया गया, यानि मैं एनइसि का मेंबर बना।जब मैं एनइसि का मेंबर बनाया गया ,उन दिनों मैं अकेला ही ओडिशा राज्य से एनइसि का मेंबर था।

 

इसके साथ साथ झारसुगुड़ा के ओमप्रकाश बोंदिया राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चुने गए सत्र 1988-91 के लिए।बाद में उन्होंने उसी सत्र में कटक के साथी रमण बगड़िया को संयुक्त सह सचिव चयन किया। अर्थात मैं और रमण बगड़िया दो जन कटक मारवाड़ी युवा मंच के साथी एक साथ अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच की एनइसि में चयनित हुए।

 

इस अधिवेशन में कटक शाखा की एक और खास उपलब्धी यह रही कि उन दिनों युवा मंच का राष्ट्रीय स्तर पर एक अपना मासिक मुखपत्र छपा करता था,इसे मासिक मेगेजिन या मासिक पत्रिका भी बोलते थे।इस मासिक मेगेजिन का नाम था मंचिका।

 

मंचिका चूंकि मासिक मेगेजिन हुआ करती थी,उस मंचिका मेगेजिन में पूरे भारत की युवा मंच की शाखाओं की गतिविधियां फोटो संग छपा करती थी। राष्ट्रीय नेतृत्व के दौरे, प्रांतीय नेतृत्व के दौरे छपा करते थे, युवा मंच साथियों के लेख भी छपा करते थे ।

 

राष्ट्रीय स्तर की युवा मंच की मासिक पत्रिका यानि मेगेजिन की 3 सदस्यता वाली संपादक मंडली में मेरा चयन किया गया था।इस तरह जहां मैं एक तरफ युवा मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सदस्य था , वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय मासिक पत्रिका मंचिका में संपादकीय मंडल में सदस्य चयन किया गया था। क्रमशः

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